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नीति आयोग: रासायनिक क्षेत्र 2040 तक एक ट्रिलियन डॉलर पर पहुंचने की संभावना, सात लाख नौकरियां होंगी पैदा

Thu, 03 Jul 2025 08:00 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Thu, 03 Jul 2025 08:00 PM IST
सार

नीति आयोग की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत का रसानियक क्षेत्र 2040 तक 1 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को छू सकता है और जीवीसी में यह 12 प्रतिशत की हिस्सेदारी हासिल कर लेगा। वहीं साल 2030 तक इसकी जीवीसी में 5 से 6 प्रतिशत की हिस्सेदारी का लक्ष्य रखा गया है। 

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Chemical sector likely to reach one trillion dollars by 2040, seven lakh jobs will be created
नीति आयोग - फोटो : ANI

विस्तार

भारत का रासायनिक क्षेत्र 2040 तक 1 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को छू सकता है। नीति आयोग की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार यह वैश्विक मूल्य श्रृंखला (जीवीसी) में 12 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल कर लेगा। इससे वह वैश्विक रासायनिक महाशक्ति बन जाएगा। 

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रसायनिक क्षेत्र में भारत की 3.5 प्रतिशत की हिस्सेदारी 

वर्तमान में जवीसी में भारत की हिस्सेदारी 3.5 प्रतिशत है, जबकि 2023 में इसका केमिकल व्यापार घाटा 31 अरब डॉलर रहा। यह देश की आयातित फीडस्टॉक और विशेष रसायनों पर भारी निर्भरता को दर्शाता है। वर्ष 2030 के लिए भारत का विजन है कि वह वैश्विक मूल्य श्रृंखला में 5 से 6 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ वैश्विक रासायनिक विनिर्माण महाशक्ति बने।

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रासायनिक क्षेत्र देश के पारंपरिक उद्योगों से कहीं बड़ा है

नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने कहा कि रासायनिक क्षेत्र देश के कई पारंपरिक उद्योगों से कहीं बड़ा है और इसका लाभ उठाने का यह सही समय है। उन्होंने कहा कि भारत रसायनों का एक प्रमुख उत्पादक है। यह एक तेजी से बढ़ता हुआ क्षेत्र है।  

रोजगार और निर्यात में वृद्धि

रिपोर्ट में कहा गया कि मौजूदा उत्पादन को दोगुना करने और 31 अरब डॉलर के व्यापार घाटे को नेट जीर पर लाने का प्रयास किया जाएगा। इस पहल से 35 से 40 अरब डॉलर का अतिरिक्त निर्यात होगा और लगभग 7 लाख कुशल नौकरियां पैदा होंगी। इसके लिए सराक को लक्षित सुधारों को लागू करना होगा।

इन पहलों पर जोर

  • मौजूदा क्लस्टरों को आधुनिक बनाकर और नए विकसित करके भारत में विश्वस्तरीय केमिकल हब की स्थापना करना।
  • केंद्रीय धिकार प्राप्त समिति का गठन और उसके अंतर्गत केमिकल फंड की स्थापना, जिसमें साझा अवसंरचना और संचालन व्यय (Opex) सब्सिडी जैसी योजनाएं होंगी।
  • मौजूदा बंदरगार बुनियादी ढांचे  और उच्च क्षमता वाले 8 क्लस्टरों का विकास।
  • आत्मनिर्भरता बढ़ाने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए R&D को प्रोत्साहन और उद्योग–शिक्षा सहयोग बढ़ाना।
  • बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ साझेदारी को बढ़ावा देना, साथ ही उद्योग विकास के लिए एफटीए की दिशा में कदम।
  • रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की गई है कि सरकार आयात बिल, निर्यात क्षमता और एंड-मार्केट की जरूरत के आधार पर केमिकल उत्पादन के लिए प्रोत्साहन योजनाएं शुरू करे।
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