आर्थिक सुस्ती की चपेट में सीमेंट उद्योग, मांग न होने से उत्पादन में हुई गिरावट
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आर्थिक सुस्ती का असर सीमेंट उद्योग पर भी हुआ है और इस वर्ष अप्रैल से मांग में कमी की समस्यायें आ रही है जिसके कारण अभी सीमेंट कंपनियां अपनी पूरी क्षमता से परिचालन नहीं कर पा रही हैं। प्लास्टिक कचरे की परेशानी से निजात दिलाने के लिए सीमेंट उद्योग आगे आया है। देश के सीमेंट उत्पादकों ने सरकार के साथ मिलकर तय किया है कि अब वह अपनी भट्ठियों में प्लास्टिक कचरे से बने ईंधन का इस्तेमाल करेंगे। इससे जहां देश के करीब 50 फीसदी प्लास्टिक के कचरे का निपटान हो सकेगा, वहीं कोयले पर आयात बिल भी घटेगा और विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।
देश के सीमेंट निर्माताओं के संगठन सीमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (सीएमए) के अध्यक्ष और डालमिया सीमेंट के एमडी एवं सीईओ महेंद्र सिंघी ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। इस अवसर पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण सचिव सीके मिश्रा और पेयजल एवं स्वच्छता सचिव परमेश्वरन अय्यर भी मौजूद थे।
सिंघी ने कहा कि देश के हर हिस्से में प्लास्टिक कचरा बीनने के लिए दो अक्तूबर से 27 अक्टूबर तक विशेष अभियान चलेगा। उन्होंने बताया कि देश के कुुल प्लास्टिक कचरे में से करीब 50 फीसदी कचरे को साफ कर ऐसा स्वरूप दिया जाएगा, ताकि सीमेंट कारखाने की भट्ठी में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सके। अभी सीमेंट उद्योग की भट्ठी में ईंधन के रूप में पेट्रोलियम कोक या कोयले का इस्तेमाल होता है, जबकि भारत में सबसे ज्यादा निर्भरता कोयले पर ही है।
रोजगार का भी होगा सृजन
सीएमए का कहना है कि सीमेंट कारखाने की भट्ठी में प्लास्टिक कचरे से बने ईंधन का इस्तेमाल करने से तिहरा लाभ होगा। इससे गांव-शहर प्लास्टिक कचरे से मुक्त होंगे और इसे बीनने और साफ करने में काफी लोगों को रोजगार भी मिलेगा जबकि कोयले का आयात घटने से जो विदेशी मुद्रा बचेगी उसका उपयोग अन्य चीजों के आयात में हो सकेगा। पर्यावरण सचिव ने सीमेंट उद्योग को एक तरह से चेतावनी देते हुए कहा कि सिर्फ बोलने भर से कुछ नहीं होगा, इस दिशा में काम भी करना होगा। सीमेंट उद्योग ने एक साल पहले भी वादा किया था कि वह कम से कम 25 फीसदी वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल करेंगे, लेकिन अभी पांच फीसदी के स्तर तक भी नहीं पहुंच सके हैं।
आर्थिक सुस्ती की चपेट में सीमेंट उद्योग
महेन्द्र सिंघी ने कहा कि अभी देश की सीमेंट कंपनियां अपनी स्थापित क्षमता का 70 फीसदी ही उपयोग कर पा रही है। मांग में कमी के कारण 30 फीसदी क्षमता का उपयोग नहीं कर पा रही है क्योंकि यह पूरी तरह से मांग आधारित उद्योग है, मांग आने पर उत्पादन तत्काल शुरू हो जाता है।
भारत में सबसे सस्ता सीमेंट
उन्होंने कहा कि उनके संगठन ने सीमेंट पर पर जीएसटी को 28 फीसदी से कम कर 18 फीसदी करने की मांग नहीं की है लेकिन यह सरकार पर है कि वह इस संबंध में कब निर्णय लेती है। उनका संगठन सरकार के साथ है। उन्होंने कहा कि अभी देश में सीमेंट पूरी दुनिया से लगभग सस्ती है क्योंकि छह रुपये प्रति किलो यह बिक रहा है। इसमें 28 फीसदी जीएसटी भी जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि सीमेंट उद्योग सरकार के प्लास्टिक के उपयोग में कमी लाने पर पूरी तरह से साथ है।