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OPAL Case: रिश्वत मामले में ब्रिटेन, यूएई व दक्षिण कोरिया को न्यायिक अनुरोध भेजेगी सीबीआई, जानें पूरा मामला
Tue, 04 Jul 2023 06:02 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Tue, 04 Jul 2023 06:02 PM IST
सार
OPAL Case: सीबीआई के अनुसार डीएफसीयू के लिए निविदा 20 अप्रैल 2007 को जारी की गई थी। इसमें दो कंसोर्टियम ने भाग लिया था- पहला जर्मनी का लिंडे और कोरिया का एसईसीएल का एक संघ था और दूसरा अमेरिकाका शॉ स्टोन एंड वेबस्टर और भारत का एलएंडटी का था।
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CBI
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
सीबीआई गुजरात में ओएनजीसी पेट्रो एडिशंस लिमिटेड (ओपीएएल) के संयंत्र से संबंधित अनुबंध को प्रभावित करने के आरोपी लॉबिस्ट संजय भंडारी के खिलाफ रिश्वत के मामले में ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और दक्षिण कोरिया को अनुरोध पत्र भेजेगी। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
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यह ठेका दाहेज में ओपीएएल संयंत्र में दोहरी फीड क्रैकर इकाई (डीएफसीयू) स्थापित करने के लिए था। अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी ने मामले और आरोपी व्यक्तियों और कंपनियों से संबंधित सूचना के लिए संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन और दक्षिण कोरिया को अनुरोध पत्र जारी करने की मांग करते हुए तीन आवेदन दायर किए हैं।
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सीबीआई के अनुसार डीएफसीयू के लिए निविदा 20 अप्रैल 2007 को जारी की गई थी। इसमें दो कंसोर्टियम ने भाग लिया था- पहला जर्मनी का लिंडे और कोरिया का एसईसीएल का एक संघ था और दूसरा अमेरिकाका शॉ स्टोन एंड वेबस्टर और भारत का एलएंडटी का था।
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सीबीआई ने आरोप लगाया है कि भंडारी ने संयुक्त अरब अमीरात स्थित सैनटेक इंटरनेशनल के निदेशक के रूप में सैमसंग इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड (एसईसीएल) से 49.99 लाख डॉलर का परामर्श शुल्क लेकर उसके साथ आपराधिक साजिश रची। यह कोरियाई कंपनी और ओपीएएल के बीच हुए अनुबंध समझौते का उल्लंघन है।
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि जांच में भंडारी और एसईसीएल के तत्कालीन वरिष्ठ प्रबंधक होंग नाम कूंग के बीच कई के ई-मेल आदान-प्रदान का पता चला जो सैनटेक और एसईसीएल के बीच एक परामर्श सेवा समझौते से संबंधित था।