Biz Updates: IRFC के पूर्व चेयरमैन के खिलाफ सीबीआई का आरोपपत्र, ईडी ने केरल में जब्त की 30 करोड़ की संपत्ति
Biz Updates: अधिकारियों ने बताया कि बनर्जी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम में 2019 में इसके प्रबंध निदेशक के तौर पर शामिल हुए और बाद में सीएमडी के तौर पर पदोन्नत होने के बाद उन्हें पिछले साल कथित वित्तीय कदाचार और पद के दुरुपयोग के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया था।
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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने ऊंची कीमतों पर उपहारों की खरीद में कथित अनियमितताओं के लिए भारतीय रेल वित्त निगम (आईआरएफसी) के पूर्व चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अमिताभ बनर्जी के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया है।
अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बनर्जी के खिलाफ करीब तीन महीने की जांच के बाद यहां एक विशेष अदालत को अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी। एजेंसी ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के तहत कुछ प्रावधान लगाए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि बनर्जी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम में 2019 में इसके प्रबंध निदेशक के तौर पर शामिल हुए और बाद में सीएमडी के तौर पर पदोन्नत होने के बाद उन्हें पिछले साल कथित वित्तीय कदाचार और पद के दुरुपयोग के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया था।
उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ जांच रेलवे के सतर्कता विभाग से प्राप्त सूचना के आधार पर शुरू की गई थी, जिसमें यह दर्शाया गया था कि उन्हें तोहफे के तौर पर मिले सोने के सिक्के और अन्य गैर-स्वर्ण वस्तुएं ऊंची कीमतों पर तोहफे के तौर पर खरीदे गए।
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस मामले में सीबीआई जांच के लिए मंजूरी दे दी थी। आईआरएफसी रेलवे के स्वामित्व वाला सार्वजनिक उपक्रम है। यह रोलिंग स्टॉक की खरीद के लिए बुनियादी ढांचा परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर को धन उधार देता है। अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान एजेंसी ने दिशानिर्देशों का उल्लंघन पाया और बनर्जी पर भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत आपराधिक कदाचार का आरोप लगाया गया है।
सीबीआई ने पाया कि आईआरएफसी अधिकारियों द्वारा प्रदान की जाने वाली ऐसी महंगी वस्तुओं की खरीद और वितरण के लिए कोई मानक संचालन प्रक्रिया या निर्धारित नियम नहीं थे। रेलवे के सतर्कता विभाग ने आरोप लगाया था कि आईआरएफसी अधिकारी अपनी जांच के दौरान सार्वजनिक धन से खरीदे गए उपहार वस्तुओं के प्राप्तकर्ताओं की सूची का खुलासा करने के इच्छुक नहीं थे, जो प्रथम दृष्टया अधिकारियों की ओर से वित्तीय गबन का स्पष्ट मामला प्रतीत होता है।
एजेंसी के अनुसार एक वित्त कंपनी होने के नाते इस मामले में आईआरएफसी अधिकारियों की ओर से किए गड़बड़ी किए जाने की आशंका है, जिसमें तत्कालीन सीएमडी भी शामिल हैं।
ईडी ने केरल में 30 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को केरल के एक रियल्टी समूह के प्रवर्तक की 30 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क करने की जानकारी दी है। केंद्रीय एजेंसी ने एक बयान में कहा कि हीरा कंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड, उसके प्रबंध निदेशक अब्दुल रशीद, उनके ट्रस्ट हीरा एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट और उसकी सहयोगी कंपनी हीरा समर हॉलीडे होम्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी कुल 62 अचल संपत्तियों को धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत कुर्क किया गया है। इन संपत्तियों का कुल मूल्य 30.28 करोड़ रुपये है।
ईडी ने आरोप लगाया कि हीरा कंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड, राशिद और अन्य आरोपियों ने भारतीय स्टेट बैंक की तिरुवनंतपुरम स्थित कोवडियार शाखा के साथ धोखाधड़ी की और बैंक के पास गिरवी रखी गई प्राथमिक और जमानत वाली प्रतिभूतियों को 'धोखे' से बेचा और कर्ज के पुनर्भुगतान में 'धोखाधड़ी' की।
ईडी ने बताया कि आरोपियों ने इन अपराधों को अंजाम देकर 34.82 करोड़ रुपये कमाए। रशीद को ईडी ने पिछले साल दिसंबर में गिरफ्तार किया था और फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है। ईडी ने कहा कि रशीद ने एसबीआई के पास गिरवी रखी गई अन्य परियोजनाओं को बेचकर प्राप्त धन का उपयोग उनके खिलाफ लिए गए ऋण के पुनर्भुगतान के लिए करने के बजाय धन शोधन का अपराध किया है। मनी लॉन्ड्रिंग मामला बैंक की शिकायत के आधार पर कोच्चि में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दर्ज एक प्राथमिकी से उपजा है।
दिसंबर में भारत का इंजीनियरिंग सामान का निर्यात 10.20 प्रतिशत बढ़ा
प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं में भू-राजनीतिक तनाव और सख्त वित्तीय स्थितियों से उत्पन्न विभिन्न चुनौतियों के बावजूद भारत का इंजीनियरिंग सामान का निर्यात दिसंबर, 2023 में 10.20 प्रतिशत की सालाना वृद्धि के साथ 10.04 अरब डॉलर रहा।
भारतीय इंजीनियरिंग निर्यात संवर्द्धन परिषद (ईईपीसी) के चेयरमैन अरुण कुमार गरोडिया ने कहा, “हालांकि, यह एक मजबूत पुनरुद्धार दिखाता है लेकिन मौजूदा वैश्विक आर्थिक स्थितियों के कारण क्षेत्र को अब भी अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ रहा है।” उन्होंने कहा, “इंजीनियरिंग निर्यातकों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण समय रहा है। यूरोप और अब पश्चिम एशिया में तनाव ने महत्वपूर्ण नकारात्मक जोखिम पैदा कर दिया है।” उन्होंने कहा कि जहां समग्र मांग मजबूत बनी हुई है वहीं लाल सागर संकट एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिससे पारगमन समय में वृद्धि के कारण देरी और माल ढुलाई लागत बढ़ रही है।
एचडीएफसी बैंक को 16,373 करोड़ का मुनाफा
एचडीएफसी बैंक को चालू वित्त वर्ष की दिसंबर तिमाही में 16,373 करोड़ रुपये का फायदा हुआ है। एक साल पहले समान अवधि के 12,259 करोड़ की तुलना में यह 34 फीसदी अधिक है। बैंक ने बताया, इस अवधि में उसकी कुल आय 81,720 करोड़ रुपये रही है। हालांकि, इसका समेकित लाभ 39 फीसदी बढ़कर 17,718 करोड़ और कुल आय 1.15 लाख करोड़ पहुंच गई। शुद्ध एनपीए यानी फंसा कर्ज घटकर 0.31 फीसदी रहा है।
बैंक ऑफ महाराष्ट्र का लाभ 34 फीसदी बढ़ा
बैंक का मुनाफा दिसंबर तिमाही में 34 फीसदी बढ़कर 1,036 करोड़ रुपये पहुंच गया। कुल आय बढ़कर 5,851 करोड़ पहुंच गई। शुद्ध एनपीए घटकर 0.22 फीसदी रहा।
फेडरल बैंक को 1,007 करोड़ का मुनाफा
बैंक को दिसंबर तिमाही में 1,007 करोड़ का मुनाफा हुआ। एक साल पहले यह 804 करोड़ था। कुल आय बढ़कर 6,53 करोड़ रही है। शुद्ध एनपीए घटकर 0.64 फीसदी रह गया।
विनिर्माण इकाइयां लगाने के लिए रियायती कर दर को एक साल बढ़ा सकती है सरकार
कॉरपोरेट की ओर से नई विनिर्माण इकाइयां लगाने के लिए अंतरिम बजट में रियायती 15 फीसदी आयकर दर को एक साल और बढ़ाकर 31 मार्च, 2025 तक किया जा सकता है। इससे निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। अर्न्स्ट एंड यंग (ईवाई) के मुताबिक, अंतरिम बजट में सरकार कर भुगतान में आसानी पर अपना ध्यान केंद्रित रखेगी। सरकार ने 2019 में कहा था, एक अक्तूबर, 2019 या उसके बाद विनिर्माण में निवेश पर नई घरेलू कंपनी को 31 मार्च, 2023 या उससे पहले उत्पादन शुरू करने पर 15 फीसदी दर से आयकर भुगतान का विकल्प होगा। पिछले बजट में योजना को एक साल के लिए 31 मार्च, 2024 तक बढ़ाया गया था।
पुरानी व्यवस्था में भी आयकर छूट सात लाख होने की उम्मीद
अंतरिम बजट में सरकार पुरानी आयकर व्यवस्था में बदलाव कर सकती है। पुराने कर नियम के तहत निचले स्तर पर कुछ अतिरिक्त छूट मिलने की उम्मीद है। पुरानी व्यवस्था में नए उपायों के तहत 7 लाख रुपये तक की आयकर छूट मिल सकती है।
निर्यातकों को शेयरों के बजाय नकदी में मिल सकता है रिफंड
निर्यातकों को कर छूट योजनाओं के लिए शेयरों के बजाय नकद में रिफंड देने पर सरकार विचार कर सकती है। अगर ऐसा होता है तो इससे उनके लिए नकदी प्रवाह में तुरंत सुधार होगा। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव ने कहा, निर्यातित उत्पादों पर शुल्क व करों में छूट (आरओडीटीईपी), राज्य व केंद्रीय करों और लेवी में छूट योजना के तहत रिफंड एक शेयर के रूप में जारी किया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, शेयर को अन्य आयातकों को बेचा जा सकता है, जो बाद में मूल सीमा शुल्क के भुगतान के लिए नकदी के बजाय स्क्रिप का उपयोग कर सकते हैं। ये योजनाएं भारतीय निर्यातकों को चुनिंदा केंद्रीय व राज्य शुल्क वापस करती हैं।