फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   CBI files charge sheet against former ABG Shipyard Chairman Rishi Agarwal and others

CBI: एबीजी शिपयार्ड के पूर्व चेयरमैन व अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल, 23000 करोड़ के बैंक फ्रॉड का है मामला

Sat, 19 Nov 2022 06:13 PM IST
विवेक दास बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विवेक दास Updated Sat, 19 Nov 2022 06:13 PM IST
सार

CBI: सीबीआई की ओर से कहा गया है कि उसने 22,842 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से संबंधित एक मामले में मुंबई स्थित निजी कंपनी एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड और उसके अध्यक्ष व प्रमोटर, 18 अन्य संस्थाओं सहित 25 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।

विज्ञापन
CBI files charge sheet against former ABG Shipyard Chairman Rishi Agarwal and others
ABG Shipyard case: Former Chairman and MD Rishi Aggarwal - फोटो : ANI

विस्तार

सीबीआई ने 23,000 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में एबीजी शिपयार्ड के पूर्व अध्यक्ष ऋषि अग्रवाल और अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दायर कर दिया है। एजेंसी के एक अधिकारी ने इस बात की जानकारी दी है।

विज्ञापन

विज्ञापन

सीबीआई की ओर से कहा गया है कि उसने 22,842 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से संबंधित एक मामले में मुंबई स्थित निजी कंपनी एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड और उसके अध्यक्ष व प्रमोटर, 18 अन्य संस्थाओं (भारत स्थित फर्मों और अपतटीय संस्थाओं) सहित 25 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है।

विज्ञापन
विज्ञापन

क्या है एबीजी शिपयार्ड घोटाला?

करीब 23 हजार करोड़ के एबीजी शिपयार्ड घोटाला देश का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला माना जाता है। पानी के जहाज बनाने वाली कंपनी एबीजी शिपयार्ड ने 28 बैंकों को चूना लगाकर, करीब 22,842 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। यह घोटाला विजय माल्या के 9 हजार करोड़ और नीरव मोदी के 14 हजार करोड़ रुपये की गड़बड़ी से भी अधिक का है।

कंपनी का क्या है कारोबार?

एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड की शुरुआत साल 1985 में हुई थी। गुजरात के दाहेज और सूरत में एबीजी समूह की यह शिपयार्ड कंपनी पानी के जहाज बनाने और उनकी मरम्मत का काम करती है। अब तक यह कंपनी 165 जहाज बना चुकी है। इस कंपनी ने 1991 तक तगड़ा मुनाफा कमाते हुए देश-विदेश से बड़े ऑर्डर हासिल किए। 

कैसे लिखी गई घोटाले की पटकथा? 

रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 में कंपनी को 55 करोड़ डॉलर से ज्यादा का भारी नुकसान हुआ और इसके बाद एबीजी शिपयार्ड की हालत पतली होती गई। अपनी वित्तीय हालत का हवाला देते हुए कंपनी ने बैंकों से कर्ज लिया और इस सबसे बड़े घोटाले को अंजाम दिया। 

किन बैंकों से लिया कितना कर्ज?
स्टेट बैंक की शिकायत के मुताबिक, कंपनी ने बैंक से 2,925 करोड़ रुपये का कर्ज लिया। इसके अलावा आईसीआईसीआई बैंक से 7,089 करोड़ , आईडीबीआई बैंक से 3,634 करोड़, बैंक ऑफ बड़ौदा से 1,614 करोड़, पंजाब नेशनल बैंक से 1,244 करोड़ , इंडियन ओवरसीज बैंक से 1,228 करोड़ का कर्ज लिया। इस तरह से कंपनी ने कुल 28 बैंकों से कर्ज लिया।  

सही मदों में नहीं हुआ पैसों का इस्तेमाल? 
एसबीआई ने अपनी शिकायत में बताया कि, इन पैसों का इस्तेमाल उन मदों में नहीं हुआ जिनके लिए बैंक ने इन्हें जारी किया था बल्कि दूसरे मदों में इसे लगाया गया। 

8 नवंबर 2019 को एसबीआई ने की पहली शिकायत 
एसबीआई ने इस मामले में पहली शिकायत 8 नवंबर 2019 को की थी। डेढ़ साल से अधिक समय तक जांच-पड़ताल करने के बाद, सीबीआई ने 7 फरवरी, 2022 को मामले में प्राथमिकी दर्ज की। एसबीआई ने यह भी बताया कि आखिर क्यों बैंकों के संघ की तरफ से उसने की मामले में केस दर्ज करवाया। दरअसल, आईसीआईसीआई और आईडीबीआई बैंक कंसोर्शियम में पहले और दूसरे अग्रणी ऋणदाता थे। हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में एसबीआई सबसे बड़ा ऋणदाता था। इसलिए यह तय हुआ कि सीबीआई के पास शिकायत दर्ज एसबीआई कराएगा। 

2013 में एनपीए हो गया था लोन 
एसबीआई ने बताया है कि उसे 2013 में ही पता चल गया था कि कंपनी का लोन एनपीए हो गया है। इसके बाद एसबीआई की ओर से लोन रिकवरी के लिए कई कोशिश की गईं, लेकिन सफलता नहीं मिली। 

सीबीआई ने की थी छापेमारी
सात फरवरी को मामले में पहली प्राथमिकी दर्ज करने के बाद सीबीआई ने 12 फरवरी को 13 स्थानों पर छापेमारी की, जिसके बाद देश का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया। 

सीबीआई ने जारी किया था लुकआउट नोटिस
सीबीआई ने एबीजी शिपयार्ड कंपनी के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ऋषि कमलेश अग्रवाल और आठ अन्य लोगों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया था। बाद में उनकी गिरफ्तारी की गई। केंद्रीय एजेंसी ने ऋषि कमलेश अग्रवाल के अलावा एबीजी शिपयार्ड के तत्कालीन कार्यकारी निदेशक संथानम मुथास्वामी, निदेशकों- अश्विनी कुमार, सुशील कुमार अग्रवाल और रवि विमल नेवेतिया और एक अन्य कंपनी एबीजी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ भी कथित रूप से आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आधिकारिक दुरुपयोग जैसे अपराधों के लिए मामला दर्ज किया था

यूपीए काल का है घोटाला 
स्टेट बैंक के अनुसार, यह घोटाला यूपीए सरकार के समय का है। दरअसल, जब 2013 में एबीजी शिपयार्ड के लोन को एनपीए घोषित किया गया था, तब यूपीए सरकार थी।  साल 2005 से साल 2012 के बीच यह घोटाला हुआ।  साल 2017 में एनसीएलएटी (NCLAT) में मामला गया था। 

पैसों का यहां हुआ इस्तेमाल
रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों पर आरोप है कि बैंक फ्रॉड के जरिए प्राप्त किए गए पैसे को विदेश में भेजकर अरबों रुपये की प्रॉपर्टी खरीदी गईं। 18 जनवरी 2019 को अर्नस्ट एंड यंग एलपी द्वारा दाखिल अप्रैल 2012 से जुलाई 2017 तक की फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट की जांच में सामने आया है कि कंपनी ने गैरकानूनी गतिविधियों के जरिए बैंक से कर्ज में हेरफेर किया और रकम ठिकाने लगा दी। बैंकों का ये भारी-भरकम लोन अमाउंट जुलाई 2016 में एनपीए घोषित हो गया था।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed