{"_id":"66cef5dc10f12d192f09372f","slug":"cabinet-approval-to-establish-12-industrial-smart-cities-rs-28-602-crore-will-be-spent-2024-08-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Cabinet: 12 औद्योगिक स्मार्ट शहर स्थापित करने को मंजूरी, अश्विनी वैष्णव बोले- 28,602 करोड़ रुपये होंगे खर्च","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
Cabinet: 12 औद्योगिक स्मार्ट शहर स्थापित करने को मंजूरी, अश्विनी वैष्णव बोले- 28,602 करोड़ रुपये होंगे खर्च
Wed, 28 Aug 2024 03:33 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Wed, 28 Aug 2024 03:33 PM IST
सार
Cabinet Decision: सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विणी वैष्णव ने बताया कि ये औद्योगिक क्षेत्र उत्तराखंड के खुरपिया, पंजाब में राजपुरा-पटियाला, महाराष्ट्र में दिघी, केरल में पलक्कड़, यूपी में आगरा और प्रयागराज, बिहार में गया, तेलंगाना में जहीराबाद, एपी में ओरवाकल और कोप्पर्थी और राजस्थान में जोधपुर-पाली में स्थित होंगे।
विज्ञापन
कैबिनेट की बैठक
- फोटो : amarujala.com
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को 28,602 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश के साथ घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए 10 राज्यों में 12 नए औद्योगिक शहर बनाने को मंजूरी दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को इसकी जानकारी दी।
विज्ञापन
10 राज्यों में फैले और छह प्रमुख गलियारों के साथ रणनीतिक रूप से नियोजित ये परियोजनाएं भारत की विनिर्माण क्षमताओं और आर्थिक विकास को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण छलांग साबित होंगे।
विज्ञापन
सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विणी वैष्णव ने बताया कि ये औद्योगिक क्षेत्र उत्तराखंड के खुरपिया, पंजाब में राजपुरा-पटियाला, महाराष्ट्र में दिघी, केरल में पलक्कड़, यूपी में आगरा और प्रयागराज, बिहार में गया, तेलंगाना में जहीराबाद, एपी में ओरवाकल और कोप्पर्थी और राजस्थान में जोधपुर-पाली में स्थित होंगे।
विज्ञापन
यह कदम देश के औद्योगिक परिदृश्य को बदल देगा, औद्योगिक नोड्स और शहरों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार करेगा जो आर्थिक विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को काफी बढ़ावा देगा। उन्हें वैश्विक मानकों के ग्रीनफील्ड स्मार्ट शहरों के रूप में विकसित किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए कहा, "दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि शहर उन्नत बुनियादी ढांचे से सुसज्जित हैं जो टिकाऊ और कुशल औद्योगिक संचालन का समर्थन करते हैं।"
एनआईसीडीपी से रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर पैदा होने की उम्मीद है, जिसमें अनुमानित 1 मिलियन प्रत्यक्ष नौकरियां और नियोजित औद्योगीकरण के माध्यम से 3 मिलियन तक अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी। इन परियोजनाओं से लगभग 1.52 लाख करोड़ रुपये की निवेश क्षमता पैदा होगी।
पूर्वोत्तर क्षेत्र में 15 गीगावाट पनबिजली परियोजनाओं के लिए 4,136 करोड़ रुपये
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को पूर्वोत्तर राज्यों को अगले आठ साल में कुल 15,000 मेगावाट (15 गीगावाट) क्षमता की पनबिजली परियोजनाएं विकसित करने के लिए 4,136 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता को मंजूरी दे दी।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में बिजली मंत्रालय के पूर्वोत्तर क्षेत्र की राज्य सरकारों को केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इन राज्यों को यह सहायता राज्य सरकार और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के बीच संयुक्त उद्यम के जरिये पनबिजली परियोजनाओं के विकास में उनकी इक्विटी भागीदारी के लिए दी जाएगी।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल के निर्णयों की जानकारी देते हुए कहा कि इस योजना का परिव्यय 4,136 करोड़ रुपये है और इसे 2024-25 से 2031-32 तक क्रियान्वित किया जाएगा।
बयान में कहा गया है कि इस योजना के तहत कुल 15,000 मेगावाट की पनबिजली क्षमता के लिए समर्थन दिया जाएगा। इस योजना को बिजली मंत्रालय के कुल परिव्यय से पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए 10 प्रतिशत सकल बजटीय सहायता (जीबीएस) के माध्यम से वित्तपोषित किया जाएगा।
पूर्वोत्तर क्षेत्र की सरकारों के इक्विटी हिस्से के लिए अनुदान कुल परियोजना इक्विटी के 24 प्रतिशत तक सीमित होगा। यह प्रति परियोजना अधिकतम 750 करोड़ रुपये होगा। यदि जरूरत हुई तो प्रत्येक परियोजना के लिए 750 करोड़ रुपये की सीमा पर अलग-अलग मामलों के आधार पर पुनर्विचार किया जाएगा।
संयुक्त उद्यम में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और राज्य सरकार का इक्विटी अनुपात अनुदान वितरण के समय बनाए रखा जाएगा। केंद्रीय वित्तीय सहायता केवल व्यावहारिक पनबिजली परियोजनाओं तक ही सीमित होगी।
बयान में कहा गया है कि इस योजना के साथ पनबिजली विकास में राज्य सरकारों की भागीदारी को प्रोत्साहन मिलेगा और जोखिम तथा जिम्मेदारियों को समानता के आधार पर साझा किया जाएगा।