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सीबीआईसी: वसूली से पहले कारोबारियों को जीएसटीआर-1 और 3बी में गलतियां सुधारने का मिलेगा समय

Mon, 10 Jan 2022 06:57 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 10 Jan 2022 06:57 AM IST
सार

सीबीआईसी ने कहा कि कर अधिकारी ऐसी विसंगतियों की वजह समझाने के लिए कारोबारियों को उचित समय देंगे।

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Businessmen will get time to rectify mistakes in GSTR 1 and 3B before recovery
जीएसटी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कम टैक्स चुकाने या कर का भुगतान नहीं करने की वजह से वसूली कार्रवाई शुरू करने से पहले बिक्री रिटर्न जीएसटीआर-1 में दर्शाए गए कारोबार के अंतर और कर भुगतान फॉर्म जीएसटीआर 3 बी में गलतियां सुधारने के लिए कारोबारियों को उचित समय दिया मिलेगा। इस संबंध में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने दिशा निर्देश जारी किया है।

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सीबीआईसी ने कहा कि कर अधिकारी ऐसी विसंगतियों की वजह समझाने के लिए कारोबारियों को उचित समय देंगे। जीएसटी कानून में 1 जनवरी, 2022 से हुए बदलाव में के मुताबिक, कर अधिकारियों को उन व्यवसायों के खिलाफ सीधे वसूली कार्रवाई शुरू करने की इजाजत दी गई थी, जिन्होंने मासिक रिटर्न जीएसटीआर-1 में अधिक बिक्री दिखाई थी, लेकिन कर भुगतान के दौरान मासिक कर भुगतान फॉर्म जीएसटीआर -3 बी में इसका उल्लेख नहीं किया। इस कदम का मकसद फर्जी बिलिंग जैसी गतिविधियों पर रोक लगाना है।
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पहले मिलता था नोटिस 
फर्जी बिलिंग से विक्रेता जीएसटीआर -1 में अधिक बिक्री दिखाते थे ताकि खरीदार इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा कर सके। जीएसटीआर -3 बी में घटी बिक्री दिखाकर कम टैक्स जमा करते थे। अभी तक जीएसटी कानून के तहत ऐसे मामलों में पहले कारण बताओ नोटिस जारी होता था और फिर वसूली प्रक्रिया शुरू की जाती थी। 
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जीएसटीआर-3 बी फॉर्म में जल्द कैलकुलेटर सुविधा 
जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) करदाताओं की मदद के लिए जीएसटीआर-3 बी में जल्द कैलकुलेटर की सुविधा शुरू करेगी। इससे न सिर्फ रिटर्न भरना और सुगम हो जाएगा बल्कि करदाता विलंबित कर भुगतान के लिए ब्याज की गणना कर सकेंगे। 


जीएसटीएन ने ने कहा, नई सुविधा के जरिये जीएसटीआर -3 बी में करदाताओं की ओर से विशेष कर अवधि के लिए घोषित राशि के आधार पर न्यूनतम ब्याज की गणना होगी। जीएसटी कानून के मुताबिक, समय पर टैक्स चुकाने में विफल रहने पर 18 % ब्याज लगता है। आईटीसी के लिए गैर- वाजिब या अधिक दावा करने पर 24 फीसदी ब्याज लगाया जाता है

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