Biz Updates: 73000 से अधिक स्टार्टअप्स में कम-से-कम एक महिला निदेशक; EPFO ने जोड़े अक्तूबर में 13.41 लाख सदस्य
देश में उद्योग संवर्द्धन एवं आतंरिक व्यापार विभाग से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की संख्या बढ़कर 1.57 लाख से अधिक पहुंच गई है। इन्हें स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत मान्यता दी गई है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के मुताबिक, इनमें 73,000 से अधिक स्टार्टअप में कम-से-कम एक महिला निदेशक हैं।
भारत पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर सबसे ज्वलंत स्टार्टअप तंत्र में से एक के रूप में उभरा है। इसने तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप हब के रूप में अपनी जगह बनाई है। 100 से अधिक यूनिकॉर्न के साथ भारतीय स्टार्टअप तंत्र शोध और उद्यमिता के भविष्य को नया आकार दे रहा है। मंत्रालय ने कहा, बंगलूरू, हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली-एनसीआर जैसे शहर नवाचार केंद्र बन गए हैं। 2024 में 13 स्टार्टअप ने आईपीओ के जरिये 29,247.4 करोड़ जुटाए हैं।
ईपीएफओ ने जोड़े अक्तूबर में रिकॉर्ड 13.41 लाख सदस्य
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने अक्तूबर, 2024 में शुद्ध रूप से रिकॉर्ड 13.41 लाख नए सदस्य जोड़े हैं। इनमें 58.49 फीसदी हिस्सा 18 से 25 वर्ष वालों का है। 2.09 लाख सदस्य महिलाएं हैं। आंकड़ों के मुताबिक, अक्तूबर में करीब 12.90 लाख सदस्य बाहर निकल गए और बाद में ईपीएफओ में फिर से शामिल हो गए। यह अक्तूबर, 2023 की तुलना में सालाना आधार पर 16.23 फीसदी वृद्धि है।
पीली मटर के शुल्क मुक्त आयात की अवधि बढ़ी
केंद्र सरकार ने पीली मटर के बिना शुल्क आयात की अवधि बढ़ा कर फरवरी, 2025 तक कर दी है। मौजूदा अवधि 31 दिसंबर है। भारत पीली मटर का दुनिया का सबसे बड़ा आयातक है। वित्त वर्ष 2024 में 20 लाख टन पीली मटर का आयात किया गया था।
सेबी के साथ 28.5 लाख भरकर निपटाया मामला
अल्टरनेट इन्वेस्टमेंट फंड के नियमों के उल्लंघन मामले में तीन लोगों और कंपनियों ने 28.5 लाख रुपये भरकर सेबी के साथ मामला निपटाया है। इनमें पी रामा कृष्णा, उत्तिष्ठ विराट फंड और उत्तिष्ठ मैनेजमेंट शामिल हैं। सेबी ने अक्तूबर में कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
सरकार राजकोषीय घाटे को 4.5% तक लाएगी
सरकार गुणवत्तापूर्ण खर्च में सुधार, सामाजिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने और 2025-26 में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.5 फीसदी पर लाने पर ध्यान देना जारी रखेगी। वित्त मंत्रालय के एक दस्तावेज में यह जानकारी दी गई। वित्त मंत्री एक फरवरी को 2025-26 का बजट पेश करेंगी।
घरेलू अर्थव्यवस्था के चालू और अगले वित्त वर्ष में 6.5 फीसदी की दर से बढ़ने की संभावना है। सितंबर तिमाही में वृद्धि दर अनुमान से कम 5.4 फीसदी रही है। अर्न्स्ट एण्ड यंग (ईवाई) ने एक रिपोर्ट में कहा, निजी निवेश की मांग में तेजी नहीं आई है। सरकारी निवेश की वृद्धि भी नकारात्मक रही है। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में इसमें 15.4 फीसदी गिरावट आई है। इसका असर वृद्धि दर पर भी दिखेगा।
नई दिल्ली: भारत ने चीन से एलएनजी ईंधन टैंक के आयात की डंपिंग-रोधी जांच की शुरू
भारत ने चीन से आयात कर एलएनजी ईंधन टैंक की कथित डंपिंग की जांच शुरू की है। एक घरेलू कंपनी की शिकायत के बाद यह कार्रवाई शुरू की गई है। वाणिज्य मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, वाणिज्य मंत्रालय की जांच शाखा व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) ईंधन टैंकों की डंपिंग की जांच कर रहा है। इसके आयात से कथित तौर पर घरेलू उद्योग को नुकसान पहुंच रहा है।
आइनॉक्स इंडिया लिमिटेड ने डंपिंग-रोधी शुल्क लगाने की अपील करते हुए एक आवेदन दायर किया है। इसमें कहा गया है कि सस्ते आयात से घरेलू उद्योग को नुकसान हो रहा है। इन टैंकों का इस्तेमाल ट्रक जैसे बड़े वाहनों में मीथेन गैस को रखने और ले जाने के लिए किया जाता है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्तीय क्षेत्र में एआई (फ्री-एआई) के जिम्मेदार और नैतिक सक्षमता के लिए एक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए विविध क्षेत्रों के विशेषज्ञों वाली आठ सदस्यीय समिति का गठन किया है। आरबीआई ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि समिति अपनी पहली बैठक की तारीख से छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी।
वित्तीय क्षेत्र का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, जो एआई, टोकनाइजेशन और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी तकनीकों से सक्षम है। इन तकनीकों से लाभ उठाने के लिए, एल्गोरिदम पूर्वाग्रह, व्याख्यात्मकता, डेटा गोपनीयता जैसे संबंधित जोखिमों को संबोधित करते हुए, आरबीआई ने हाल ही में आयोजित मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में संकेत दिया था कि वह जिम्मेदार और नैतिक एआई उपयोग के लिए एक रूपरेखा के लिए एक समिति स्थापित करेगा। आठ सदस्यीय समिति की अध्यक्षता आईआईटी बॉम्बे के कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर पुष्पक भट्टाचार्य करेंगे।
बलरामन रवींद्रन, प्रोफेसर और प्रमुख, वाधवानी स्कूल ऑफ डेटा साइंस एंड एआई, आईआईटी मद्रास; अभिषेक सिंह, अतिरिक्त सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय; राहुल मथन, पार्टनर, ट्राइलीगल; अंजनी राठौर, ग्रुप हेड और चीफ डिजिटल एक्सपीरियंस ऑफिसर, एचडीएफसी बैंक और श्री हरि नगरालू, हेड, सिक्योरिटी एआई रिसर्च, माइक्रोसॉफ्ट इंडिया (आर एंड डी) समिति में शामिल अन्य सदस्य हैं।
पर्यटन में उछाल से 14% तक बढ़ सकता है ब्रांडेड होटलों का राजस्व
देश में पर्यटन में उछाल से ब्रांडेड होटलों का राजस्व चालू वित्त वर्ष में 13-14 फीसदी बढ़ सकता है। अगले वित्त वर्ष में 11-12 फीसदी की वृद्धि की उम्मीद है।
रेटिंग्स एजेंसी क्रिसिल ने एक रिपोर्ट में कहा, चालू वित्त वर्ष में विदेशी पर्यटकों की आमद बढ़कर महामारी-पूर्व स्तर के पार पहुंचने की उम्मीद है। यह ब्रांडेड होटलों के औसत कमरे की दरों में 6-7 फीसदी की वृद्धि करेगा। हालांकि, यह वृद्धि अगले वित्त वर्ष में 3-4 फीसदी तक कम हो जाएगी, क्योंकि नए कमरे की क्षमता में वृद्धि होगी। चालू और अगले वित्त वर्ष के दौरान कमरों की आपूर्ति में कुल 20 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
रुपये में गिरावट से 15 अरब डॉलर बढ़ सकता है आयात बिल
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट से देश का आयात बिल करीब 15 अरब डॉलर बढ़ने की आशंका है। शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव ने बृहस्पतिवार को एक रिपोर्ट में कहा कि पिछले साल दिसंबर की तुलना में भारतीय रुपये में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 2.34 फीसदी की गिरावट आई है। चीन की मुद्रा युआन में 0.06 फीसदी की गिरावट आई है।
बजट: सालाना 15 लाख कमाने वालों को आयकर में मिल सकती है राहत
सरकार मध्य वर्ग को राहत देने के साथ खपत बढ़ाने की योजना बना रही है। इस प्रयास के तहत आगामी बजट में सालाना 15 लाख रुपये कमाने वालों को आयकर के मोर्चे पर राहत मिल सकती है। इस कदम से उच्च जीवन लागत के बोझ से दबे शहरवासियों सहित लाखों करदाताओं को फायदा हो सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, इस योजना से उन लोगों को फायदा होगा, जो 2020 में पेश नई कर प्रणाली का विकल्प चुनते हैं। इस योजना में किसी भी तरह की कोई छूट नहीं मिलती है। इस प्रणाली के तहत तीन लाख रुपये से 15 लाख रुपये की वार्षिक आय पर 5-20 फीसदी के बीच कर लगता है। ज्यादा कमाई पर 30 फीसदी तक का टैक्स लगता है। सूत्रों का कहना है कि कर दरों को कम करने से अधिक लोग नई प्रणाली चुनेंगे, जो कम जटिल है। फिलहाल ज्यादातर लोग पुरानी कर व्यवस्था को ही चुन रहे हैं। सरकार अगर टैक्स को कम करने का फैसला करती है तो इससे मध्य वर्ग के हाथों में अधिक पैसा आएगा। इससे न सिर्फ खपत बढ़ेगी बल्कि अर्थव्यवस्था को गति देने में भी मदद मिल सकती है।