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Biz Updates: एचएएल को मिला नया नेतृत्व, रवि के ने संभाली CMD की कमान; एयरोस्पेस क्षेत्र में बढ़त का लक्ष्य

Fri, 01 May 2026 02:30 PM IST
Shivam Garg न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shivam Garg Updated Fri, 01 May 2026 02:30 PM IST
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शेयर बाजार, कारोबार और वाणिज्य जगत की अहम खबरें - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

सार्वजनिक क्षेत्र की अग्रणी एयरोस्पेस कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने शुक्रवार को घोषणा की कि रवि के ने कंपनी के 22वें अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (CMD) के रूप में कार्यभार ग्रहण कर लिया है। उन्होंने डी.के. सुनील का स्थान लिया है, जो 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त हुए।

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रवि के के पास एयरोस्पेस एवं रक्षा, विनिर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में तीन दशक से अधिक का समृद्ध अनुभव है। इससे पहले वे एचएएल में निदेशक (ऑपरेशंस) के पद पर कार्यरत थे, जहाँ उन्होंने रणनीतिक योजना को दिशा दी और कंपनी को ‘महारत्न’ का दर्जा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए रवि के ने कहा कि उनका लक्ष्य एचएएल को नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), उत्कृष्ट संचालन और मानव संसाधन के दम पर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी एयरोस्पेस एवं रक्षा कंपनी के रूप में स्थापित करना है।

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उन्होंने अपने करियर में कई अहम नेतृत्व पद संभाले हैं, जिनमें एलसीए तेजस डिवीजन के कार्यकारी निदेशक एवं महाप्रबंधक और कॉर्पोरेट प्लानिंग के कार्यकारी निदेशक शामिल हैं। उनके कार्यकाल के दौरान एचएएल ने कई बड़े अनुबंध हासिल किए, जैसे भारतीय वायुसेना के लिए 180 एलसीए तेजस विमानों की आपूर्ति, तथा भारतीय सेना और वायुसेना के लिए 156 एलसीएच ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टरों का सौदा। इसके अलावा, उन्होंने भारतीय वायुसेना में तेजस बेड़े के सफल संचालन में भी अहम योगदान दिया।

ग्राहक-केंद्रित पहलों के माध्यम से उन्होंने विमानों की उपलब्धता दर में सुधार किया, वायुसेना के ठिकानों के साथ निर्बाध डेटा संचार व्यवस्था स्थापित की और त्वरित सहायता के लिए सिंगल पॉइंट ऑफ कॉन्टैक्ट (SPOC) की शुरुआत की। रवि के कर्नाटक के मलनाड कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक हैं। वे आईआईएम अहमदाबाद और फ्रांस के आईएएस, टूलूज़ के पूर्व छात्र भी हैं। इसके अतिरिक्त, वे मल्टी-रोल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट लिमिटेड के बोर्ड में नामित निदेशक के रूप में भी अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

रोजाना 100 उड़ानें कम करने की तैयारी में एअर इंडिया
एअर इंडिया ने विमानन ईंधन एटीएफ के महंगे होने के कारण रोज 100 उड़ानें कम करने की तैयारी की है। कंपनी ने इसकी घोषणा नहीं की है, लेकिन कंपनी के बड़े अधिकारियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों मागर्गों पर यह कटौती हो सकती है। एयरलाइन वर्तमान मैं प्रतिदिन लगभग 1,100 उड़ानें संचालित करती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जून माह में भारत से यूरोप, उत्तरी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर मार्गों पर सबसे अधिक कटौती होने की उम्मीद है। इससे यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
 

छोटी गाड़ियों की वापसी से चमका वाहन बाजार
नए वित्त वर्ष की शुरुआत वाहन कंपनियों के लिए उम्मीद से मजबूत रही है। अप्रैल में घरेलू बाजार में यात्री वाहनों की बिक्री करीब 4.45 से 4.5 लाख के बीच रहने का अनुमान है। पिछले साल अप्रैल में यह आंकड़ा 3.54 लाख था। यानी करीब 27 फीसदी की बढ़ोतरी।

इस तेजी की खास बात यह है कि बाजार को सिर्फ बड़ी गाड़ियों ने सहारा नहीं दिया, बल्कि  छोटे वाहनों ने भी मजबूत वापसी की है। लंबे समय से यह माना जा रहा था कि छोटी कारों की मांग कमजोर हो रही है, लेकिन अप्रैल के आंकड़ों ने इस धारणा को चुनौती दी है। मारुति की छोटी गाड़ियों ऑल्टो, एस-प्रेसो, सेलेरियो और वैगनआर की बिक्री 74.4 फीसदी बढ़ी। यह संकेत है कि सही कीमत और बेहतर माहौल मिले, तो छोटी कारों का ग्राहक अभी बाजार से गायब नहीं हुआ है।

वाहन बाजार को तीन बातों से सहारा मिला है। जीएसटी 2.0 का असर पिछले वित्त वर्ष की दूसरी छमाही से जारी है। इसके साथ रेपो दर में कटौती और आयकर राहत ने भी उपभोक्ता भरोसे को मजबूत किया है। यही वजह है कि कंपनियों ने अप्रैल में रिकॉर्ड या मजबूत बिक्री दर्ज की।

मारुति के पास 1.65 लाख लंबित बुकिंग हैं। छोटी गाड़ियों पर प्रतीक्षा अवधि एक महीने तक पहुंच गई है। कंपनी उत्पादन धीरे-धीरे बढ़ा रही है। फिर भी, एक जोखिम साफ है। पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई तो छोटी कारों की मांग पर असर पड़ेगा।

विदेशी मुद्रा भंडार घटा, फिर भी 9 माह के आयात के लिए पर्याप्त
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार डॉलर के लिहाज से घटा है। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, 24 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में कुल विदेशी मुद्रा भंडार 4.82 अरब डॉलर घटकर 698.49 अरब डॉलर रह गया। यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब रुपये पर दबाव बना हुआ है और बाजार में आरबीआई की संभावित सक्रियता को लेकर चर्चा रही।

हालांकि, इस आंकड़े की दिलचस्प परत भी है। डॉलर में भंडार घटा, लेकिन रुपये के मूल्य में कुल रिजर्व 47,758 करोड़ बढ़कर 65.82 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसका मतलब है कि विनिमय दर और वैल्यूएशन असर ने रुपये में रिजर्व की तस्वीर अलग बना दी। आयात के लिहाज से देखें तो स्थिति मजबूत है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में भारत का कुल आयात 76.55 अरब डॉलर रहा। इस आधार पर 698.49 अरब डॉलर का मौजूदा भंडार करीब 9.1 महीने के कुल आयात के बराबर है। सिर्फ माल आयात देखें, जो मार्च में 59.59 अरब डॉलर था। ऐसे में यह भंडार 11.7 महीने के आयात के लिए पर्याप्त है। आरबीआई के मुताबिक, विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां  2.84 अरब डॉलर घटकर 554.62 अरब डॉलर रह गईं। सोने के भंडार का मूल्य भी 1.90 अरब डॉलर घटा है।
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