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बजट 2021: देखना है बोझ से दब रहे मध्यम वर्ग को कितना उबार पाती हैं वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण

Tue, 19 Jan 2021 03:57 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 19 Jan 2021 03:57 PM IST
सार

  • बेरोजगारी की मार से देश को उबारना सबसे बड़ी चुनौती
  • आधारभूत ढांचा, कृषि, शिक्षा, सुरक्षा, यातायात सबने फैलाए हाथ

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Budget 2021: Will finance minister Nirmala Sitharaman would be able to ease off the burdened middle class
संसद परिसर में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : PTI (फाइल फोटो)

विस्तार

01 फरवरी 2021 को केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद भवन में बजट 2021-21 पेश करेंगी। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि 90 के दशक के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा चुनौती पूर्ण बजट होगा। सरकार का खजाना खाली है। कोविड-19 से निपटने की पहाड़ सी चुनौती है और सामने बेरोजगारी की मार ने मध्यमवर्ग को एक बड़े बोझ के नीचे ला दिया है। आधारभूत संरचना विकास के जरिए असंगठित क्षेत्र को राहत देने की चुनौती है, तो सूक्ष्म, लघु और मझोले (एमएसएमई) को रफ्तार देने का लक्ष्य भी है। ऐसे में अर्थशात्रियों का अनुमान है कि राजकोषीय घाटा 7-8 फीसदी को पार कर सकता है।

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देश का मध्य वर्ग मुख्यतया नौकरीपेशा है। उसके सामने रोजगार का संकट लगातार बढ़ रहा है। खर्च और जीवन यापन की चुनौती बढ़ रही है। स्वदेशी जागरण मंच के सह संयोजक और अर्थशास्त्री अश्विनी महाजन भी मानते हैं कि मध्य वर्ग एमएसपी और एमआरपी के बीच में फंसता जा रहा है।

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रियल एस्टेट, विनिर्माण, आधारभूत संरचना भी जरूरी

रियल एस्टेट कारोबारियों का कहना है कि सरकार क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्टीम (सीएलएसएस) से लोगों के मकान खरीदने को जोड़े। लोगों के घर का सपना पूरा करने के लिए यह जरूरी है। सीएलएसएस के तहत मिलने वाली सब्सिडी की सीमा बढ़ाई जाए। नाइट फ्रैंक इंडिया के सीएमडी शिशर बैजल के अनुसार ऐसा होने पर ही रियल एस्टेट समस्या से उबर सकता है और इसके जरिए मजदूरों, कामगारों समेत मध्यवर्ग और अन्य को बड़ी राहत मिल सकती है।  

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कई उद्योगों और संगठनों ने केन्द्र सरकार को अपने सुझाव भेज दिए हैं। इसमें टैक्स में कटौती की मांग प्रमुखता से रखी गई है। अश्विनी महाजन का कहना है कि सरकार के सामने चीन से मुकाबले की भी बड़ी चुनौती है। आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया को वास्तविकता में लाना है। इसलिए केन्द्र सरकार को राजकोषीय घाटे की परवाह नहीं करनी चाहिए और कुछ कड़े फैसले भी लेने चाहिए।

बहुत उम्मीद मत रखिए...

अर्थशास्त्री डा. सौम्यकांति घोष ने अमर उजाला से कहा कि लोगों को बहुत उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। यह बजट चुनौतीपूर्ण है और सरकार का राजस्व संग्रह कमजोर रहा है। उसके हाथ बहुत तंग हैं। जबकि चुनौतियां काफी बड़ी हैं। डा. सारथी आचार्य का कहना है कि दो चुनौती सबसे बड़ी है। पहली कोविड-19 की चुनौती से पार पाना, दूसरा रोजगार के अवसर बढ़ाना। यह तभी संभव है, जब लघु, छोटे और मझोले उद्योग 2019 वाली स्थिति में चलने लगें। विनिर्माण क्षेत्र में कुछ तेजी आए।

हालांकि सारथी को पेट्रोलियम उत्पादों का मूल्य बढ़ने का कारण समझ में नहीं आ रहा है। सारथी के अनुसार कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत घट रही है, हमारे यहां बढ़ रही है। ऐसा होने पर आयात के बढ़ने की संभावना रहती है। यह स्थिति मेक इन इंडिया के लिए बड़ा झटका है। इसलिए एक चुनौती इसे नारेबाजी से वास्तविकता में जमीन पर उतारने की है। मुझे तो लग रहा है कि सरकार को बिना राजकोषीय घाटे की परवाह किए खर्च बढ़ाना होगा।

आईएमएफ, विश्व बैंक की ओर ध्यान नहीं देना है। कृषि अर्थव्यवस्था को भी धार देनी है। टैक्सटाइल इंडस्ट्री को मुश्किलों से उबारना है। तभी पूंजी प्रवाह की स्थिति आएगी और इसका असर अर्थव्यवस्था के विकास में देखने को मिलेगा।

आज रात 12 बजे से 'फलां' बंद नहीं चलेगा!

डा. सारथी आचार्य का केन्द्र सरकार के एक बड़े फैसले पर सवाल है। अमर उजाला से बातचीत में उनका कहना है कि रात 12 बजे से यह व्यवस्था बंद, वह चालू जैसी नीतियों से बाहर आना होगा। इसका हमें नुकसान उठाना पड़ा है। बिना होमवर्क, व्यवस्थित तैयारी के किसी भी निर्णय का अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसलिए यहां सबक लेने की जरूरत है। रातों रात चावल मत उगाइए, वैकल्पिक खेती अपनाइए जैसा प्रयोग भी नहीं चल सकता।

सरकार को एकतरफा बाजार खोल देने और उसके हवाले सबकुछ करने की नीति से भी बचना चाहिए। रहा सवाल ई-कॉमर्स का तो अब खुली अर्थव्यवस्था में हम विश्व का रुख नहीं बदल सकते, लेकिन इसे नियंत्रित और मैनेज किया जा सकता। हमें भी यूरोप की तरह दूरगामी योजनाबद्ध तरीके को अपनाना होगा।

गूगल जैसी कंपनियों से टैक्स वसूलने की नीति बनाए सरकार

स्वदेशी जागरण मंच के अश्विनी महाजन कहते हैं कि मेक इन इंडिया, आत्म निर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करना ही होगा। चीन से आयात घटाने की नीति पर ठोस उपाय के साथ आने की चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। बजट 2020-21 में इसका रोड-मैप आना चाहिए। गूगल जैसी कंपनियों से टैक्स वसूलने में सरकार को संवेदनशील होना पड़ेगा। ये कंपनियां विदेश में बिलिंग करके, भारत में मुनाफा कमाती हैं।



भारत में 100-200 करोड़ की बिलिंग करके टैक्स देने से बचती है। विदेश में बिलिंग करके वहीं टैक्स भरती हैं। यहां जीएसटी में हेरा-फेरी करती हैं। इन कंपनियों पर न्यूनतम वैकल्पिक कर लगाना चाहिए। वित्तमंत्री को इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे। लोगो के लिए रोजगार, आमदनी बढ़ाने का प्रयास करना होगा। तभी मध्यवर्ग बोझ से उबर सकेगा।

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