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बजट 2020: एक्सपर्ट की राय, मिडिल क्लास को नहीं मिली कोई खास राहत

बजट डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: paliwal पालीवाल Updated Sun, 02 Feb 2020 05:25 AM IST
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Union Budget 2020: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
Union Budget 2020: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : LokSabha
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सदी का पहला बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश कर चुकीं हैं। इस बजट से मिडिल क्लास को बहुत आस थी, क्योंकि अर्थव्यवस्था में छाई सुस्ती और बढ़ती महंगाई का असर उन पर पड़ रहा था। लेकिन बजट भाषण के बाद मिडिल क्लास को निराशा ही हाथ लगी है। जहां एक तरफ करदाताओं पर दोहरी मार पड़ी है, वहीं इससे उनके द्वारा किए निवेश पर भी असर पड़ेगा। एलआईसी और आईडीबीआई में विनिवेश करने का फैसला भी लोगों को रास नहीं आ रहा है। एक्सपर्ट की माने तो इन सभी का प्रभाव कही न कहीं देखने को मिलेगा। 
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बचत प्रभावित हुई तो निवेश के लिए पैसा कहां से आएगा

सरकार ने राजकोषीय घाटा बढ़ाकर निवेश और खपत को बढ़ावा दिया है, लेकिन आयकर छूट के लिहाज से सही फैसला नहीं लिया है। इससे बचत योजनाएं प्रभावित होंगी। आज बचत नहीं करेंगे तो कल निवेश के लिए पैसा कहां से लाएंगे।


आर्थिक सर्वे में नॉमिनल जीडीपी 10 फीसदी रहने का अनुमान था। इसमें छह फीसदी जीडीपी और चार फीसदी राजकोषीय घाटा है। जाहिर है कि अर्थव्यवस्था इतनी तेजी से आगे नहीं बढ़ेगी, जितनी पहले उम्मीद थी। कृषि क्षेत्र को बढ़ावा दिया गया है, लेकिन यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि इस क्षेत्र में निवेश का लाभ ट्रेडर्स के हाथों में सीमित न रह जाए। किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर दाम मिलना चाहिए। आयकर छूट से जुड़े बदलाव से बचत योजनाओं को झटका लग सकता है। सरकार ने आयकर की पुरानी या नई दरें चुनने का विकल्प दिया है, लेकिन जो नया विकल्प चुनेगा उसे छूट का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसे में वह जमा योजनाओं में क्यों पैसा लगाएगा।

टैक्स में छूट लंबी अवधि की बचत को प्रोत्साहित करने के लिए दी जाती है। छूट नहीं मिलेगी तो दीर्घ अवधि की बचत प्रभावित होगी। इसी बचत से विकास के लिए पैसा आता है। सरकार एलआईसी और आईडीबीआई में हिस्सेदारी  बेचकर पैसा जुटाएगी। कुछ सफल संचालित हो रही कंपनियां भी बेची जाएंगी। इससे सरकार पैसा जुटाकर दूसरी योजनाओं में लगाएगी।  एक्सपोर्ट एग्रीमेंट पर पुनर्विचार करने का फैसला अच्छा है। कई विदेशी कंपनियां भारत में अपने प्रोडक्ट को डंप कर रही हैं। इससे मैन्युफैक्चरिंग प्रभावित हो रही है। रोजगार पैदा करने के लिए स्टार्टअप, स्किल डेवलेपमेंट और टैक्नोलॉजी के अपग्रेडेशन पर खास जोर दिया है। इससे फार्मा, टेक्सटाइल, ऑटो जैसे श्रम आधारित उद्योगों में रोजगार सृजन होगा। एमएसएमई, हेल्थ केयर और पर्यटन के लिए भी बजट अच्छा है।

----बृंदा जागीरदार, अर्थशास्त्री  (लेखिका बैंकिंग व वित्तीय मामलों की जानकार)

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करदाताओं  पर दोहरी मार निवेश को भी झटका

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