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न्यू इंडिया की ओर बढ़ते कदम, वैश्विक पटल पर महाशक्ति के रूप में उभर सकता है भारत

Mon, 08 Jul 2019 11:18 AM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Mon, 08 Jul 2019 11:18 AM IST
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Budget 2019 for New India strived to address the core issues
सांकेतिक तस्वीर

देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मोदी 2.0 सरकार का पहला बजट पेश करके भारत को अगले पांच साल में पांच खरब डालर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है। इस कवायद में उन्होंने राष्ट्र निर्माता की भूमिका अपनाते हुए एक मझे हुए लेखाकार की भूमिका निभाई है। इस बजट को लेकर तमाम तरह की आलोचनाएं की जा सकती हैं जिसका लोकतंत्र में सभी को पूरा अधिकार है। लेकिन इसमें जो प्रावधान किए गए हैं वह देश की दशा और दिशा तय करने में उल्लेखनीय भूमिका निभा सकते हैं। 

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कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग के सीईओ राजीव सिंह का कहना है कि इन कदमों का लक्ष्य न्यू इंडिया के लिए भविष्य की योजनाओं और विकास की रणनीति के साथ मजबूत बुनियाद रखना है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में चिंताजनक माहौल और घरेलू अर्थव्यवस्था में सुस्ती को देखते हुए बजट में यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है कि यह विस्तार और आर्थिक वृद्धि को रफ्तार देने वाला साबित हो। साथ ही ऐसे कई उपाय किए गए हैं जिससे राजकोषीय घाटा सीमा के भीतर रहे जो रेटिंग एजेंसियों की साख में गिरावट को रोकने के लिए बहुत जरूरी है। इस मोर्चे पर वित्त मंत्री सीतारमण अपनी सूझबूझ से बजट में अच्छा संतुलन बनाने में सफल रही हैं।

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विकास पर 100 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान

विकास के इंजन को रफ्तार देने के लिए वित्त मंत्री ने बजट में कई बड़े उपाय किए हैं। इसके तहत बुनियादी ढांचे के विकास पर 100 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान किया है। रेलवे के विस्तार के लिए आने वाले वर्षो में 50 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। चूंकि भारत को बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए लंबी अवधि में बड़ी मात्रा में पूंजी की जरूरत है इसलिए सरकारी उधारी जुटाने के लिए वैश्विक बाजार में संभावनाएं तलाशने की घोषणा की गई है।

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यदि इसका विवेकपूर्ण इस्तेमाल किया जाए तो राजकोषीय घाटा, ब्याज दरों में अंतर और वित्तीय तरलता की स्थिति को देखते हुए यह उचित रणनीति साबित हो सकती है। इस उपाय से बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के निर्माण और आधुनिकीकरण में मदद मिल सकती है जो लंबी अवधि में आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देंगी।

रियल एस्टेट उद्योग को मिल सकता है बढ़ावा 

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को 70,000 करोड़ रुपये की पूंजी देने से बैंकिंग प्रणाली में मजबूती आएगी जिससे बैंक पहले की तुलना में ज्यादा कर्ज दे सकेंगे। एनबीएफसी से एक लाख करोड़ रुपये की उच्च साख दर वाली संपत्ति खरीद पर सरकार ने पहले छह महीने में 10 फीसदी तक के नुकसान की छह महीने की गारंटी लेने की घोषणा की है। इससे वित्तीय तरलता संबंधी चिंताएं दूर होंगी। साथ ही ऋण वृद्धि की दर बढ़ाने में मदद मिलेगी। किफायती आवासों पर होम लोन के ब्याज पर आयकर में अतिरिक्त कटौती से रियल एस्टेट उद्योग को बढ़ावा मिल सकता है। 

रोजगार सृजन को बढ़ावा देने में होगी मदद

एक और अहम कदम के तहत आवास वित्त कंपनियों का नियामक अब आरबीआई होगा। अभी तक यह कंपनियां एनएचबी के दिशानिर्देशों के तहत काम करती थीं। इस पहल से एनबीएफसी क्षेत्र को भारी राहत मिलेगी। इसी तरह सरकार की विदेशी बाजारों से उधारी योजनाओं से घरेलू बाजार में ब्याज दरों में कटौती का माहौल बनेगा। बहरहाल, ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद, ऋण की उपलब्ध बढ़ने और सालाना 400 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाले उद्यमों पर कारपोरेट टैक्स का स्लैब 25 फीसदी करने की पहल मध्यम से दीर्घावधि में आर्थिक वृद्धि और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने में मदद करेगी।

Budget 2019 for New India strived to address the core issues
Nirmala Sitharaman - फोटो : PTI

समावेशी विकास का मजबूत खाका तैयार 

इस बजट में प्रधानमंत्री किसान सम्मान, सभी के लिए आवास, हर घर जल, सभी के लिए बिजली और सभी बस्तियों के लिए सड़क की योजनाओं के जरिए समावेशी विकास का मजबूत खाका तैयार किया गया है। इससे ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार आएगा। इसी तरह शून्य बजट खेती और किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में समावेशी विकास को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। सरकार ने सालाना दो करोड़ से ज्यादा की आय वालों पर जो उपकर बढ़ाया है उसे अमीर और गरीब के बीच की खाई कम करने के प्रयासों के रूप में देखा जा सकता है। 

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा

इलेक्ट्रिक वाहनों के कर्ज पर सालाना 1.5 लाख रुपये के ब्याज पर टैक्स में अतिरिक्त छूट की घोषणा स्वच्छ भारत अभियान को आगे बढ़ाने का संकेत है। सड़क एवं बुनियादी ढांचा उपकर और डीजल व पेट्रोल पर शुल्क में वृद्धि से बिजली चालित वाहनों को बढ़ावा मिलेगा। लंबी अवधि में यह पहल स्वच्छ भारत की दिशा में उपयोगी साबित हो सकती है।

डिजिटल लेनदेन को मिलेगा प्रोत्साहन

सरकार ने ऑनलाइन बड़े ट्रांजेक्शन पर एमडीआर शुल्क को खत्म करके और एक साल में बैंक से एक करोड़ रुपये से ज्यादा की नकद निकासी पर दो फीसद टीडीएस का प्रावधान करके डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहित करने का उपाय किया है। 

भ्रष्टाचार पर लगेगा अंकुश

आधार के जरिए आयकर रिटर्न भरने, रिटर्न फार्म में टीडीएस संबंधी सूचनाएं पहले से दर्ज होने और कर आकलन में अधिकारियों की मनमानी पर अंकुश लगाने की पहल देश को डिजिटल इकोनॉमी की ओर ले जा सकती है। साथ ही जनधन-आधार-मोबाइल को आपस में जोड़ना एक बड़ी डिजिटल पहल है। इसके जरिए विभिन्न सरकारी योजनाओं की सब्सिडी सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में हस्तांतरित करने में मदद मिल रही है। इससे देश में भ्रष्टाचार पर काफी हद तक अंकुश लगा है। यह डिजिटल पहल स्वच्छ भारत और वित्तीय समावेशन का कारगर उपकरण साबित हो रही है। 

मेक इन इंडिया अभियान को बड़ा प्रोत्साहन

इस बजट के जरिए सरकार ने स्टार्टअप कंपनियों और मेक इन इंडिया अभियान को बड़ा प्रोत्साहन दिया है। इसके तहत भारत में निर्मित उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए आयात पर शुल्क में वृद्धि की गई है। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में एफडीआई की सीमा बढ़ाने, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को केवाईसी मानदंडों में ढील देने, विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय इक्विटी मार्केट को आकर्षक बनाने और विनिवेश की रफ्तार बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया गया है। साथ ही शिक्षा, अनुसंधान, कौशल विकास और रोजगार सृजन के विभिन्न उपायों को रेखांकित किया गया है।

वैश्विक पटल पर महाशक्ति के रूप में उभर सकता है भारत 

यदि कुल मिलाकर देखा जाए तो यह बजट भारत को अगले एक साल में तीन खरब डॉलर और पांच साल में पांच खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में कारगर कदम है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए राजकोषीय स्थिति को नियंत्रण में रखने, बुनियादी ढांचे के विकास और रोजगार बढ़ाने के लिए विदेशी निवेश बढ़ाने, बैंकिंग, एनबीएफसी व आवास क्षेत्र की अड़चनों को दूर करने और अर्थव्यवस्था को डिजिटल की ओर ले जाने जैसे बड़े मुद्दों पर विशेष जोर देना होगा। यदि सरकार इस मोर्चे पर सफल रहती है भारत मोदी 2.0 सरकार के कार्यकाल में वैश्विक पटल पर महाशक्ति के रूप में उभर सकता है।

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