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Bofa Report: भारतीय बाजार से 2027 तक रुठे रहेंगे विदेशी निवेशक, कमजोर रुपया बन रहा बाजार के लिए चुनौती
Sat, 23 May 2026 07:10 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Sat, 23 May 2026 07:10 AM IST
सार
बोफा ग्लोबल रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार विदेशी निवेशकों की भारतीय शेयर बाजार में बड़ी वापसी 2027 से पहले मुश्किल दिख रही है। कमजोर रुपया, कंपनियों की धीमी कमाई और महंगे बाजार मूल्यांकन के कारण एफआईआई लगातार पैसा निकाल रहे हैं। वर्ष 2026 में अब तक करीब 23 अरब डॉलर निकाले जा चुके हैं। हालांकि घरेलू निवेशक और म्यूचुअल फंड बाजार को सहारा देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। आइए, विस्तार से रिपोर्ट पर नजर डालते हैं...
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महंगे बाजार ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
भारतीय शेयर बाजार में घरेलू निवेशकों का भरोसा लगातार बना हुआ है, लेकिन विदेशी निवेशक तेजी से पैसा निकाल रहे हैं। अमेरिकी वित्तीय संस्था बोफा ग्लोबल रिसर्च की रिपोर्ट ने संकेत दिया है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की बड़ी वापसी 2027 से पहले मुश्किल दिख रही है। रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय बाजार अभी भी एशिया के कई देशों के मुकाबले महंगा बना हुआ है, जबकि कंपनियों की कमाई की रफ्तार धीमी है और रुपया भी कमजोर पड़ रहा है। यही वजह है कि विदेशी निवेशक भारत से दूरी बना रहे हैं। वर्ष 2026 में अब तक एफआईआई भारतीय शेयर बाजार से करीब 23 अरब डॉलर निकाल चुके हैं।
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आखिर विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा क्यों निकाल रहे हैं?
रिपोर्ट के अनुसार विदेशी निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता भारतीय कंपनियों की कमाई और बाजार का महंगा मूल्यांकन है। बोफा ने अनुमान लगाया है कि चालू वित्त वर्ष में निफ्टी-50 कंपनियों की कमाई वृद्धि केवल 7 फीसदी रह सकती है। वहीं मार्च 2027 तक समाप्त होने वाले अगले वित्त वर्ष में यह वृद्धि 8.5 फीसदी रहने का अनुमान है। यानी कमाई की रफ्तार बहुत तेज नहीं है। दूसरी तरफ निफ्टी अभी भी करीब 18 गुना एक साल आगे की कमाई के मूल्यांकन पर कारोबार कर रहा है। इसके मुकाबले दक्षिण कोरिया जैसे बाजार करीब 7.5 गुना पर ट्रेड कर रहे हैं। ऐसे में विदेशी निवेशकों को भारत का बाजार महंगा लग रहा है। यही कारण है कि वे अपना पैसा दूसरे देशों की तरफ ले जा रहे हैं।
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कमजोर रुपये से विदेशी निवेशकों को कितना नुकसान हो रहा?
विदेशी निवेशकों के लिए केवल शेयर बाजार में गिरावट ही चिंता नहीं है। रुपये की कमजोरी भी उनके रिटर्न को प्रभावित कर रही है। जब विदेशी निवेशक डॉलर में पैसा लगाते हैं और बाद में रुपया कमजोर हो जाता है, तो उन्हें डॉलर के हिसाब से कम फायदा मिलता है। यही वजह है कि विदेशी निवेशक ऐसे बाजारों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं जहां कमाई तेज हो और मुद्रा भी मजबूत बनी रहे। भारत में निफ्टी इस साल करीब 9 फीसदी टूट चुका है। इसके बावजूद बाजार का मूल्यांकन अभी भी ऊंचा है। इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है।
आखिर विदेशी पैसा किस तरफ जा रहा है?
बोफा की रिपोर्ट के मुताबिक विदेशी निवेशकों का पैसा अब एशिया के एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित बाजारों की तरफ जा रहा है। दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देश सेमीकंडक्टर, चिप निर्माण और एआई तकनीक से जुड़े बड़े केंद्र बन चुके हैं। वहां कंपनियों की कमाई के अनुमान बेहतर हो रहे हैं और बाजार भारत के मुकाबले सस्ते हैं। यही वजह है कि वैश्विक निवेशक फिलहाल भारत की खपत आधारित अर्थव्यवस्था के बजाय एआई आधारित बाजारों को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। इससे भारत में विदेशी निवेश का दबाव बना हुआ है।
घरेलू निवेशक बाजार को कैसे संभाल रहे हैं?
विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार पूरी तरह नहीं टूटा है। इसकी बड़ी वजह घरेलू निवेशक हैं। म्यूचुअल फंड, एसआईपी और खुदरा निवेशक लगातार बाजार में पैसा लगा रहे हैं। यही घरेलू पूंजी बाजार को सहारा दे रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर घरेलू निवेशकों का भरोसा इसी तरह बना रहा, तो बाजार में स्थिरता बनी रह सकती है। हालांकि विदेशी निवेशकों की वापसी के बिना बाजार में बड़ी तेजी आना मुश्किल माना जा रहा है।