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Report: निर्यातकों के लिए 22.5 अरब का पैकेज लाने की तैयारी, बिना गारंटी सस्ते ब्याज पर कर्ज दे सकती है सरकार
Fri, 12 Sep 2025 06:29 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Fri, 12 Sep 2025 06:29 AM IST
सार
रिपोर्ट के मुताबिक, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय इस पैकेज के तहत प्रभावित निर्यातकों को बिना किसी गारंटी के रियायती ब्याज दरों पर कर्ज दिया जा सकता है। हालांकि, सरकार ने अभी इस संभावित पैकेज के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सरकार ने 50 फीसदी अमेरिका टैरिफ से प्रभावित निर्यातकों की मदद के लिए एक व्यापक राहत पैकेज लाने की योजना बनाई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह राहत पैकेज 22.5 अरब रुपये (25.5 करोड़ डॉलर) का हो सकता है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय इस पैकेज के तहत प्रभावित निर्यातकों को बिना किसी गारंटी के रियायती ब्याज दरों पर कर्ज दिया जा सकता है। हालांकि, सरकार ने अभी इस संभावित पैकेज के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि राहत पैकेज की इस योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल इस सप्ताह या आने वाले दिनों में मंजूरी दे सकता है। इस पैकेज का वित्तपोषण फरवरी में आए 2025-26 के केंद्रीय बजट में निर्यात प्रोत्साहन के लिए पहले से आवंटित फंड से किया जाएगा।
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रिपोर्ट के मुताबिक, कपड़ा, रत्न-आभूषण, चमड़ा, जूते, रसायन, इंजीनियरिंग सामान, समुद्री निर्यात और कृषि जैसे श्रम प्रधान क्षेत्र उच्च अमेरिकी टैरिफ के कारण सबसे अधिक जोखिम में हैं। ये ऐसे क्षेत्र हैं, जो लोगों को बड़ी संख्या में रोजगार देते हैं। भारी-भरकम टैरिफ से इनकी प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता घट रही है। ऑर्डर रद्द होने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है, जिसका असर रोजगार पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार जल्द ही इन प्रभावित क्षेत्रों के लिए व्यापक राहत पैकेज की घोषणा कर सकती है।
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12 फीसदी घट सकता है झींगा निर्यातकों का राजस्व
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने एक रिपोर्ट में कहा, अमेरिका टैरिफ के कारण झींगा निर्यातकों का राजस्व 2025-26 में सालाना आधार पर 12 फीसदी घट सकता है। वहीं, मार्जिन में 150 आधार अंकों की गिरावट आ सकती है। झींगा निर्यात के लिए अमेरिका भारत का सबसे महत्वपूर्ण बाजार है। मूल्य और मात्रा के लिहाज के लिहाज से इसकी 48 फीसदी तक हिस्सेदारी है।