Loksabha: मणिपुर पर हंगामे के बीच अपतटीय क्षेत्र खनिज कानून में संशोधन विधेयक पेश, जन विश्वास बिल पारित
Loksabha: लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी से जब सभापति ने विधेयक पेश किए जाने के बारे में बोलने को कहा तो उन्होंने अपनी पार्टी के सदस्य गौरव गोगोई की ओर से पेश विपक्ष समर्थित अविश्वास प्रस्ताव का मुद्दा उठाया।
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मणिपुर मुद्दे पर विपक्ष के विरोध के बीच अपतटीय क्षेत्र खनिज कानून में संशोधन के लिए एक विधेयक गुरुवार को लोकसभा में पेश किया गया। मणिपुर की स्थिति पर स्थगन के बाद दोपहर दो बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने पर केंद्रीय संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्री प्रह्लाद जोशी ने विधेयक पेश किया।
लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी से जब सभापति ने विधेयक पेश किए जाने के बारे में बोलने को कहा तो उन्होंने अपनी पार्टी के सदस्य गौरव गोगोई की ओर से पेश विपक्ष समर्थित अविश्वास प्रस्ताव का मुद्दा उठाया।
कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे किरीट सोलंकी ने उनसे अपने भाषण को विधेयक तक सीमित रखने को कहा। तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने भी कहा कि विधेयक पर बोलने की बारी आने पर मणिपुर के मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए।
इस दौरान प्रह्लाद जोशी ने कहा कि सरकार के पास कानून में संशोधन करने की विधायी क्षमता है और उन्हें यह विधेयक पेश करने की अनुमति दी जानी चाहिए। इसके बाद अपतटीय क्षेत्र खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2023 को ध्वनिमत से पेश किया गया।
जन विश्वास बिल लोकसभा में पारित, कारोबारी सुगमता को बढ़ावा देना है लक्ष्य
लोकसभा ने गुरुवार को जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2023 पारित कर दिया जिसमें 183 अधिनियमों के 42 प्रावधानों में संशोधन कर मामूली अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर कारोबारी सुगमता को बढ़ावा देने का प्रावधान है।
लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा हुई और ध्वनिमत से इसे पारित कर दिया गया क्योंकि विपक्षी सदस्यों ने मणिपुर मुद्दे पर विरोध और नारेबाजी की। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूर्वोत्तर राज्य में हिंसा पर संसद में बयान देने की मांग कर रहे हैं।
विधेयक को पारित कराने के लिए पेश करते हुए वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इससे कई प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर कारोबार सुगमता को बढ़ावा मिलेगा। बिल कई जुर्माने को दंड में परिवर्तित करता है, जिसका अर्थ है कि सजा देने के लिए अदालत का अभियोजन आवश्यक नहीं है। यह कई अपराधों के लिए सजा के रूप में कारावास को भी हटा देता है। डाकघर अधिनियम, 1898 के तहत सभी अपराधों को हटाया जा रहा है।
गोयल ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले नौ साल में करीब 40,000 ऐसे प्रावधानों और प्रक्रियाओं को या तो सरल बनाया है या हटा दिया है जिनसे लोगों को परेशानी होने की आशंका थी। जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2022 को 22 दिसंबर 2022 को लोकसभा में पेश किया गया था। विधेयक को 22 दिसंबर 2022 को दोनों सदनों की संयुक्त समिति को भेजा गया था। यह रिपोर्ट 20 मार्च, 2023 को लोकसभा में पेश की गई थी।