What is Big Beautiful Bill: क्या है बिग ब्यूटीफुल बिल? जिससे निराश एलन मस्क ने कर ली ट्रंप से राहें जुदा
What is Big Beautiful Bill: एलन मस्क मस्क ने अमेरिकी प्रशासन से अलग होने का एलान कर दिया है। दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी ने डोनाल्ड ट्रंप सरकार के वन बिग ब्यूटीफुल बिल के बारे निराशा जताने के बाद सरकार से दूर जाने का फैसला किया है। क्या है यह वन बिग ब्यूटीफुल बिल? आइए विस्तार से जानते हैं।
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एलन मस्क मस्क ने अमेरिकी प्रशासन से अलग होने का एलान कर दिया है। दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी ने पिछले हफ्ते प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकंस की ओर से पारित और राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से समर्थित 'वन बिग ब्यूटीफुल बिल' (ओबीबीबी) के प्रति निराशा जताने के बाद यह फैसला किया है। हाल ही में डिपार्टमेंट आपॅफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी या DOGE की कमान संभाल रहे ट्रंप ने एक साक्षात्कार के दौरान इस बिल पर अपनी असहमति जारी की थी। मस्क ने कहा, "मैं स्पष्ट रूप से भारी-भरकम खर्चे वाले इस बिल को देखकर निराश हूं। यह बिल बजट के घाटे को कम करने की बजाय बढ़ाता है, और DOGE की ओर से किए जाने काम को कमजोर करता है।"
ओबीबीबी के कारण ट्रंप और मस्क के बीच उभरे मतभेद
मस्क की टिप्पणियों से ऐसा लगता है कि उनका ट्रम्प के साथ इस मसले पर मतभेद हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़े पैमाने पर खर्च वाले इस पैकेज 'वन बिग ब्यूटीफुल बिल' की वकालत की है। इस विधेयक अभी सीनेट से पारित होना है। इसके बाद यह ट्रम्प के 2017 के कर कटौती की तैयारियों को आगे बढ़ाएगा। बिल पास होने के बाद कानून के अमल में आने से सीमा सुरक्षा का खर्च बढ़ेगा, मेडिक एड के लिए काम की आश्यकता को के लागू करेगा और स्वच्छ ऊर्जा कर क्रेडिट को वापस किया जा सकेगा। आइए अब इस बिल के बारे में विस्तार से जानते हैं।
क्या है वन बिग ब्यूटीफुल बिल?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका के लोगों से कुछ प्रमुख वादों के आधार पर अपना दूसरा कार्यकाल हासिल किया। इन वादों में से कुछ जैसे विभिन्न देशों से आयात पर टैरिफ लगाना जैसे काम कार्यकारी आदेशों के जरिए अमल में लाए जा सकते हैं। लेकिन, कुछ वादे ऐसे भी हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए कानून में बदलाव की जरूरत है। जो अमेरिकी कांग्रेस (प्रतिनिधि सभा और सीनेट से मिलकर बना) का विशेष अधिकार है। ऐसे में अपने सभी चुनावी वादों को पूरा करने के लिए ट्रंप को कुछ चीजों के लिए कांग्रेस की मंजूरी लेनी ही होगी। इसे देखते हुए ट्रंप ने अपने वादों को पूरा करने के लिए जरूरी कानूनी बदलावों को समाहित कर बनाया है- 'वन बिग ब्यूटीफुल बिल यानी OBBB'। इस विधेयक में ट्रंप ने अपने नीतिगत एजेंडे और अभियान के वादों को एक साथ समाहित किया है। ऐसे में एक तरह से हम यह कह सकते हैं कि ओबीबीबी ट्रंप सरकार के लिए एक मजबूरी है।
ओबीबीबी में पांच पहलू शामिल किए गए हैं, अब इनके बारे में जानते है
- ओबीबीबी का पहला तत्व यह है कि यह आयकर और संपत्ति कर में कटौती को बढ़ाता है और स्थायी बनाता है जिसे ट्रम्प ने 2017 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान लागू किया था।
- ओबीबीबी ओवरटाइम, टिप्स और सामाजिक सुरक्षा से आय जैसी चीजों पर नए कर कटौती के दायरे में लाने से जुड़े प्रावधान लागू करेगा। व्हाइट हाउस का दावा है, "प्रति वर्ष $30,000 और $80,000 के बीच कमाने वाले अमेरिकियों को अगले साल अपने करों में 15% की कटौती जैसी राह मिलेगी"।
- ओबीबीबी का तीसरा बड़ा पहलू है, सीमा सुरक्षा (अवैध आव्रजन को रोकने के लिए) और अमेरिकी सैन्य व रक्षा क्षमताओं के सुधार पर अधिक खर्च।
- ओबीबीबी का चौथा पहलू है सरकारी खर्च में 'बर्बादी, धोखाधड़ी और दुरुपयोग' को कम करना है।
- ओबीबीबी का पांचवां तत्व तथाकथित रूप से 'सरकार की लोन लेने की सीमा' को बढ़ाना है। चूंकि सरकार की ओर से उधार ली जाने वाली राशि पिछले कुछ वर्षों में बढ़ रही है, इसलिए अमेरिकी कांग्रेस को समय-समय पर औपचारिक रूप से ऋण सीमा बढ़ानी पड़ती है। ऋण सीमा बढ़ाए बिना, अमेरिकी सरकार अपने बिलों का भुगतान करने की स्थिति में नहीं होगी।
ओबीबीबी में ऐसा क्या है, जो आलोचकों को रास नहीं आ रहा?
कुल मिलाकर, ओबीबीबी से जुड़ी दो व्यापक चिंताएं हैं, जिन्हें अर्थशास्त्रियों और अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों ने उजागर किया है। इनमें जोश हॉले (मिसौरी से सीनेटर) जैसे कई रिपब्लिकन भी शामिल हैं। पहली चिंता ओबीबीबी के प्रतिकूल राजकोषीय (सरकारी बजट से संबंधित) प्रभाव और इसके व्यापक आर्थिक प्रभावों के बारे में है। इसके लागू होने से एक ओर कर कटौती होगी और दूसरी ओर खर्च में बढ़ोतरी की जाएगी। इससे अमेरिकी सरकार की वित्त स्थिति खराब हो सकती है। अमेरिकी सरकार की कमाई और खर्च का अंतर यानी फेडरल घाटा पहले से ही काफी अधिक है। 2024 तक के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका के फेडरल घाटा करीब 1.9 ट्रिलियन डॉलर है। यह राशि अमेरिका की जीडीपी का लगभग 6.4% है। यह राशि कितनी अधिक है इसका अंदाजा हम इस बात से लगा सकते हैं यह 2024 भारत के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 50% है। ओबीबीबी से संघीय घाटे में और वृद्धि होने और पहले से ही बढ़ते अमेरिकी ऋण के ढेर में और इजाफा होने की आशंका है। इसी बात की चिंता एलन मस्क ने भी जताई है।