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सीधे गारंटर के खिलाफ शुरू की जा सकेगी दिवाला प्रक्रिया, एनसीएलएटी ने दी नई व्यवस्था
Mon, 21 Jan 2019 09:15 AM IST
अमर शर्मा
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Mon, 21 Jan 2019 09:15 AM IST
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राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने कॉरपोरेट लेनदारों के साथ उनके गारंटर पर भी शिकंजा कसने के लिए मजबूत व्यवस्था दी है। एनसीएलएटी ने अपने एक फैसले में कहा है कि अब सीधे कॉरपोरेट गारंटर के खिलाफ भी दिवाला एवं ऋणशोधन (आईबीसी) प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।
एनसीएलएटी का मानना है कि डिफॉल्टर कंपनियों को ऋण देने वाले प्रमुख लेनदारों के लिए सीआईआरपी लागू किए बिना कॉरपोरेट गारंटरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जा सकती है। एनसीएलएटी की तीन सदस्यीय पीठ ने एक फैसले में यह व्यवस्था दी है। एनसीएलएटी के चेयरमैन न्यायमूर्ति एसजे मुखोपाध्याय ने कहा कि हम मानते हैं कि कॉरपोरेट गारंटरों के खिलाफ 'कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया' शुरू करने से पहले प्रमुख लेनदारों के खिलाफ इस प्रक्रिया को शुरू करना आवश्यक नहीं है।
प्रमुख लेनदार के खिलाफ कोई भी सीआईआरपी शुरू किए बिना यह गारंटरों को धारा-7 के तहत इसके दायरे में लाया जा सकता है। आईबीसी की धारा-7 कॉरपोरेट लेनदार के खिलाफ स्वयं या वित्तीय लेनदारों के साथ मिलकर राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के समक्ष दिवाला याचिका दायर करने के लिए वित्तीय देनदार को सशक्त बनाती है। साथ ही कर्ज के समाधान के लिए ऋणदाता को कर्ज लेने वाली कंपनी में अधिकारी नियुक्त करने की भी अनुमति देता है।
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गारंटर भी होगा वित्तीय लेनदार
पीठ ने कहा कि कॉरपोरेट गांरट को भी वित्तीय लेनदार माना जाएगा और उसके खिलाफ बिना प्रमुख कर्जदाता पर शिकंजा कसे भी कार्रवाई शुरू की जा सकेगी। एनसीएलएटी ने स्पष्ट किया कि आईबीसी कानून का प्रावधान कर्जदाता को गारंटर के खिलाफ सीआईआरपी शुरू करने से नहीं रोकता है।
आरईसी मामले में दिया निर्देश
एनसीएलएटी का यह निर्देश इस महीने की शुरुआत में एनसीएलटी की कोलकाता पीठ के एक आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर आया है। कोलकाता पीठ ने राज्य के स्वामित्व वाली ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आरईसी) द्वारा फेरो एलाइस कॉरपोरेशन के खिलाफ दिवालिया याचिका दायर करने की अनुमति दी है।
दरअसल, आरईसी ने मई, 2009 में फैकोर पावर को 517.90 करोड़ रुपये का ऋण दिया था। इसके लिए उसने फेरो एलाइस कॉरपोरेशन के साथ एक कॉरपोरेट गारंटी समझौते पर हस्ताक्षर किया था। बाद में फैकोर पावर ने बकाया नहीं चुकाया और रकम एनपीए हो गई। इस पर आरईसी ने गारंटर होने के नाते फेरो एलाइस से लोन चुकाने को कहा। एनसीएलएटी ने इसके खिलाफ फेरो एलाइस की याचिका को ठुकरा दिया और उसे कर्ज चुकाने का निर्देश दिया।
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एनसीएलएटी का मानना है कि डिफॉल्टर कंपनियों को ऋण देने वाले प्रमुख लेनदारों के लिए सीआईआरपी लागू किए बिना कॉरपोरेट गारंटरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जा सकती है। एनसीएलएटी की तीन सदस्यीय पीठ ने एक फैसले में यह व्यवस्था दी है। एनसीएलएटी के चेयरमैन न्यायमूर्ति एसजे मुखोपाध्याय ने कहा कि हम मानते हैं कि कॉरपोरेट गारंटरों के खिलाफ 'कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया' शुरू करने से पहले प्रमुख लेनदारों के खिलाफ इस प्रक्रिया को शुरू करना आवश्यक नहीं है।
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प्रमुख लेनदार के खिलाफ कोई भी सीआईआरपी शुरू किए बिना यह गारंटरों को धारा-7 के तहत इसके दायरे में लाया जा सकता है। आईबीसी की धारा-7 कॉरपोरेट लेनदार के खिलाफ स्वयं या वित्तीय लेनदारों के साथ मिलकर राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के समक्ष दिवाला याचिका दायर करने के लिए वित्तीय देनदार को सशक्त बनाती है। साथ ही कर्ज के समाधान के लिए ऋणदाता को कर्ज लेने वाली कंपनी में अधिकारी नियुक्त करने की भी अनुमति देता है।
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गारंटर भी होगा वित्तीय लेनदार
पीठ ने कहा कि कॉरपोरेट गांरट को भी वित्तीय लेनदार माना जाएगा और उसके खिलाफ बिना प्रमुख कर्जदाता पर शिकंजा कसे भी कार्रवाई शुरू की जा सकेगी। एनसीएलएटी ने स्पष्ट किया कि आईबीसी कानून का प्रावधान कर्जदाता को गारंटर के खिलाफ सीआईआरपी शुरू करने से नहीं रोकता है।
आरईसी मामले में दिया निर्देश
एनसीएलएटी का यह निर्देश इस महीने की शुरुआत में एनसीएलटी की कोलकाता पीठ के एक आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर आया है। कोलकाता पीठ ने राज्य के स्वामित्व वाली ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आरईसी) द्वारा फेरो एलाइस कॉरपोरेशन के खिलाफ दिवालिया याचिका दायर करने की अनुमति दी है।
दरअसल, आरईसी ने मई, 2009 में फैकोर पावर को 517.90 करोड़ रुपये का ऋण दिया था। इसके लिए उसने फेरो एलाइस कॉरपोरेशन के साथ एक कॉरपोरेट गारंटी समझौते पर हस्ताक्षर किया था। बाद में फैकोर पावर ने बकाया नहीं चुकाया और रकम एनपीए हो गई। इस पर आरईसी ने गारंटर होने के नाते फेरो एलाइस से लोन चुकाने को कहा। एनसीएलएटी ने इसके खिलाफ फेरो एलाइस की याचिका को ठुकरा दिया और उसे कर्ज चुकाने का निर्देश दिया।