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लंच ब्रेक के दौरान भी काउंटर बंद नहीं कर सकते हैं बैंक

Thu, 06 Apr 2017 08:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/हल्द्वानी
अमर उजाला ब्यूरो/हल्द्वानी Updated Thu, 06 Apr 2017 08:55 AM IST
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 bank will not close counter during working hour
- फोटो : अमर उजाला
लंच ब्रेक के दौरान भी बैंक अपना काउंटर बंद नहीं कर सकते हैं। रिजर्व बैंक ने एक आरटीआई के जवाब में यह फैसला सुनाया है। 
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नियमों और समय को हवाला देकर ग्राहकों से जुर्माने के रूप में बार-बार पैसे काटने वाले और लौटाने वाले बैंकों को अब जागरूक ग्राहक भी निर्बाध सेवा के लिए आरबीआई के नियम गिना सकते हैं। आरटीआई के सवालों के जवाब में रिजर्व बैंक ने साफ-साफ जबाव दिया है कि कार्य अवधि में बैंक कभी भी अपने काउंटर या टेलर बंद नहीं कर सकते। कार्य अवधि में यदि कोई खाताधारक पहुंच गया तो उसके कार्यों का निष्पादन बैंक को करना ही होगा, चाहे उसे कैश को छोड़कर अन्य कार्यों के लिए कार्य अवधि क्यों न बढ़ानी पड़े।

हल्द्वानी निवासी डा. प्रमोद अग्रवाल गोल्डी ने आरटीआई के जरिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, मुंबई से यह पूछा था कि एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा समेत अन्य बैंकों में क्या कोई लंच टाइम होता है? लंच टाइम में बैंककर्मी लेन-देन संबंधी सेवा अपने ग्राहकों दे सकता या नहीं ? दोनों सवालों के हाल में भेजे गए जवाब में कहा गया है कि आरबीआई के डिपार्टमेंट ऑफ बिजनेस रेगूलेशन ने बैंकों में कार्य अवधि के दौरान कोई लंच टाइम यानी लंच ब्रेक की व्यवस्था नहीं दी है। 
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इस संबंध में आरबीआई ने बैंकों ने एक जुलाई 2015 को एक सर्कुलर भी जारी किया था। उक्त सर्कुलर के पैरा संख्या 7.2,  7.3 और 7.4 में साफ लिखा है कि बैंक अपनी सुविधा के मुताबिक कार्य अवधि तय कर सकता है, लेकिन यदि वह अपने कार्यों के लिए बैंक बंद करता है तो इस बाबत उसे अपने उपभोक्ताओं को पूर्व सूचना अनिवार्य रूप से देनी होगी। 
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आरटीआई के खुलासे में हम उपभोक्ताओं को यह बता दें कि आरबीआई ने बैंकिंग सिस्टम के सुचारू संचालन के लिए कार्य अवधि शुरू होने से 15 मिनट पहले बैंक कर्मचारियों के पहुंचने का नियम तय किया हुआ है। 

शिकायत का मौका न दें बैंक 

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बैंक अकाउंट


आरबीआई ने बैंक मैनेजरों और अन्य अधिकारियों को निर्बाध सेवाओं के लिए यह सुनिश्चित करने के लिए कहा हुआ है कि शाखाओं में कार्य अवधि के दौरान कोई भी काउंटर या टेलर बंद न रहे। बैंको को यह हिदायत है कि इससे संबंधित किसी ग्राहक को शिकायत का मौका न दें। आरबीआई का यह निर्देश भी कम लोग जानते हैं कि कार्य अवधि खत्म होने से पूर्व बैंक हॉल में प्रवेश कर चुके सभी ग्राहकों को अटेंड करना बैंकों के लिए जरूरी है। यहां तक कि कैश को छोड़कर चेक, रिसिप्ट समेत अन्य लंबति कार्यों के लिए यदि जरूरत पड़े तो बैंक को कार्य अवधि एक घंटा अतिरिक्त बढ़ाने का निर्देश है।   

आरटीआई के जरिए पूछे गए सवाल के जवाब में आरबीआई ने कहा है कि किसी भी सेवा के लिए बैंक रिजनेबल चार्ज ही ले सकते हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए आरबीआई ने वर्किंग ग्रुप बनाया हुआ है। बैंकिंग कोड्स एंड स्टैंडर्स बोर्ड ऑफ इंडिया बीसीएसबीआई बैंक चार्जेज पर निगरानी रख रही है। इसी तरह आरबीआई ने कहा है कि होम लोन को समय से पहले बंद कराए जाने पर बैंक अपने ग्राहक से किसी तरह का बंदी चार्ज या प्रिपेमेंट पेनाल्टी वसूल नहीं सकता। 

कोर बैंकिंग सॉल्यूशन व्यवस्था शुरू होने के बाद भी यह पाया गया है कि कुछ बैंक अपने ग्राहकों से होम और गैर होम ब्रांचेज में एक तरह की सेवा के लिए अलग-अलग चार्ज लेते हैं, जबकि आरबीआई ने पैरा 6.6 में इंटरसोल चार्जेज में अंतर पाटने का निर्देश दिया हुआ है। इसी तरह एसएमएस अलर्ट भेजने के लिए भी ग्राहकों की वास्तविक उपयोगिता के आधार पर ही चार्ज लगाने के लिए कहा गया है। बेजा चार्ज पर उपभोक्ता उचित फोरम में बैंक के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं।

आईटीआई के जरिए यह पूछा गया कि क्या हम 1111 या 2222 बैंक में जमा या निकाल नहीं सकते, क्योंकि चिल्लर के चक्कर में बैंककर्मी अकसर इसके लिए मना कर देते हैं। आरबीआई का कहना है कि इस संबंध में अलग से कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है। आपको यह भी बता दें कि आरबीआई ने आईटीआई के सवाल के जवाब में कहा है कि 50 पैसे का सिक्का अभी वैध है। यानी आप 50 पैसे से लेकर 10 रुपये तक के सिक्के बैंकों में जमा कर सकते हैं। इसके लिए बैंक मना नहीं कर सकता।
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