{"_id":"615a37f28ebc3ed3bd7d59cb","slug":"arvind-panagariya-said-the-the-foundation-of-the-indian-economy-is-strong","type":"story","status":"publish","title_hn":"भारतीय अर्थव्यवस्था: नीति आयोग के पूर्व अध्यक्ष पनगढ़िया ने कहा- महामारी स्तर को पार कर चुकी है वास्तविक जीडीपी, निजी निवेश की बढ़ रही रफ्तार","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
भारतीय अर्थव्यवस्था: नीति आयोग के पूर्व अध्यक्ष पनगढ़िया ने कहा- महामारी स्तर को पार कर चुकी है वास्तविक जीडीपी, निजी निवेश की बढ़ रही रफ्तार
Mon, 04 Oct 2021 04:39 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 04 Oct 2021 04:39 AM IST
सार
विदेशी पूंजी प्रवाह के सवाल पर पनगढ़िया ने कहा कि इसकी वजह सिर्फ मात्रात्मक सुगमता (क्यूई) नहीं है। निश्चित तौर पर मात्रात्मक सुगमता से आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं से पूंजी का प्रवाह होता है।
विज्ञापन
अरविंद पनगढ़िया
- फोटो : ANI
विस्तार
नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने रविवार को कहा कि 2020-21 की तीसरी और चौथी तिमाही में वास्तविक जीडीपी पहले ही महामारी पूर्व स्तर को पार कर चुकी है। निजी निवेश भी रफ्तार पकड़ रहा है। इन तथ्यों से पता चलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है। हालांकि, देश को जल्द-से-जल्द महामारी पर निर्णायक तरीके से काबू पाने की जरूरत है।
विज्ञापन
पनगढ़िया ने कहा कि टीकाकरण के मोर्चे पर सरकार ने शानदार काम किया है। नागरिकों को भी अपनी ओर से प्रयास करते हुए किसी अन्य के संपर्क में आने से बचना चाहिए और मास्क पहनना चाहिए।
विज्ञापन
कोलंबिया विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर ने कहा कि आम धारणा के विपरीत भारत में निश्चित रूप से निजी निवेश बढ़ना शुरू हो गया है। बीते वित्त वर्ष की तीसरी और चौथी तिमाही में सकल निश्चित पूंजी सृजन (जीएफसीएफ) जीडीपी का क्रमश: 33 फीसदी एवं 34.3 फीसदी रहा है, जो महामारी पूर्व स्तर की समान तिमाहियों से ज्यादा है।
विज्ञापन
हालांकि, इसमें यह गारंटी नहीं है कि यह पूंजी सिर्फ भारत में ही आएगी और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं में नहीं जाएगी। यह पूंजी भारतीय अर्थव्यवस्था में इसलिए आती है क्योंकि विदेशी निवेशकों को यहां ऊंचा रिटर्न मिलने का भरोसा रहता है।
सरकार को पूंजी प्रवाह में पारदर्शिता जरूरी
विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल बुनियादी ढांचा विकास और सरकारी बैंकों के पुनर्पूंजीकरण के लिए करने के सवाल पर पनगढ़िया ने कहा कि वह मौद्रिक नीति और आरबीआई के विदेशी परिचालन को राजकोषीय नीति के साथ जोड़ने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि आरबीआई से सरकार को मिलने वाली पूंजी में पारदर्शिता होनी चाहिए।
अर्थव्यवस्था में सबसे तेज वृद्धि की उम्मीद
विभिन्न विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस साल दुनिया में सबसे तेज वृद्धि हासिल करने की राह पर है। घरेलू अर्थव्यवस्था की चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में वृद्धि दर रिकॉर्ड 20.1 फीसदी रही है।
इसकी वजह पिछले साल का कमजोर आधार प्रभाव है। महामारी की दूसरी लहर के बावजूद विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों ने अच्छी वृद्धि दर्ज की है। उधर, आरबीआई ने 2021-22 के लिए वृद्धि दर अनुमान को 10.5 से घटाकर 9.5 फीसदी कर दिया है।
भारतीय बाजारों पर बढ़ रहा भरोसा, सितंबर में 26,517 करोड़ निवेश
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) का भारतीय बाजारों का भरोसा बढ़ रहा है। यही वजह है एफपीआई ने सितंबर में घरेलू बाजारों में शुद्ध रूप से 26,517 करोड़ रुपये का निवेश किया है। यह लगातार दूसरा महीना है, जब विदेशी निवेशकों ने खरीदारी की है। आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने एक से 30 सितंबर, 2021 के दौरान शेयरों में 13,154 करोड़ और बॉन्ड बाजार में 13,363 करोड़ रुपये निवेश किए। अप्रैल में निवेश 16,459 करोड़ रुपये रहा था।
-कोटक सिक्योरिटीज के कार्यकारी उपाध्यक्ष (इक्विटी तकनीक शोध) श्रीकांत चौहान ने कहा कि ज्यादातर प्रमुख उभरते बाजारों में एफपीआई ने सितंबर में पूंजी डाली है। भारत में एफपीआई का प्रवाह सबसे ऊंचा रहा।
मॉर्निंगस्टार इंडिया के एसोसिएट निदेशक (शोध) हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि मौजूदा रुख से संकेत मिलता है कि एफपीआई अब लघु अवधि की चुनौतियों से आगे देखने लगे हैं। वे धीरे-धीरे अपनी सतर्कता का रुख छोड़ रहे हैं और भारतीय बाजारों में उनका भरोसा बढ़ रहा है।