वाहन क्षेत्र में बंद नहीं हुआ कोई कारखाना, सुरक्षित हैं नौकरियांः अर्जुन राम मेघवाल
- भारी उद्योग राज्य मंत्री ने लोकसभा में कहा, बदलाव के दौर से गुजर रहा वाहन क्षेत्र
- 01 अप्रैल, 2020 से देशभर में लागू होने जा रहे हैं बीएस-6 मानक
- सरकार कर रही है जरूरी उपाय, अक्तूबर में बढ़ी वाहनों की बिक्री
विस्तार
देश के वाहन उद्योग में पिछले एक साल से जारी सुस्ती के बीच सोमवार को भारी उद्योग राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि वाहन क्षेत्र में नौकरियों के जाने का खतरा नहीं है और न ही चिंता की कोई बात है। राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश का वाहन क्षेत्र बदलाव के दौर में है।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी गई समय-सीमा के अनुसार एक अप्रैल, 2020 से देशभर में बीएस-6 मानक लागू होने हैं। इस कारण वाहन कंपनियां बीएस-4 से बीएस-6 को लागू करने की प्रक्रिया से गुजर रही हैं।ऐसे में नौकरियों को लेकर चिंता का कोई कारण नहीं है। कोई भी नौकरी खतरे में नहीं है और सरकार ने हितधारकों से बात करने के बाद सुधार के लिए सभी जरूरी उपाय किए हैं। उन्होंने आगे कहा कि हम इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की ओर बढ़ रहे हैं।
इसके अलावा, केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने एक लिखित जवाब में कहा कि पिछले तीन वर्षों में किसी भी वाहन या इससे जुड़ी विनिर्माण इकाइयां बंद नहीं हुई हैं। सियाम के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि त्योहारी सीजन और यूटिलिटी वाहनों के नए मॉडल बाजार में आने से अक्तूबर में यात्री वाहनों की बिक्री में मामूली तेजी रही थी।
पीएमजेजेबीवाई में 5.91 करोड़ लोग पंजीकृत
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में कहा कि 31 मार्च, 2019 तक प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) के तहत 5.91 करोड़ और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) के तहत 15.47 करोड़ लोगों को पंजीकृत किया गया है।
उन्होंने कहा कि सभी भारतीयों और खासकर गरीबों एवं वंचितों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली बनाने को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 मई, 2015 को इन दोनों सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की शुरुआत की थी। वहीं, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) कंपनी के बोर्ड द्वारा संचालित प्रक्रिया है। बोर्ड को ऐसी गतिविधियों के बारे में फैसला लेने, उसे लागू करने और निगरानी करने का अधिकार है।
मुद्रा योजना ने बांटे गए 10.24 लाख करोड़
श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने लोकसभा में कहा कि 1 नवंबर, 2019 तक प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 10.24 लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि का वितरण किया गया है। इसे 20.84 करोड़ खातों में पहुंचाया गया। यह योजना 8 अप्रैल, 2015 में शुरू की गई थी। इसके तहत छोटे उद्यम शुरू करने के लिए के लिए 10 लाख रुपये तक का कर्ज मिलता है।
वहीं, निर्मला सीतारमण ने कहा कि राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने रूरल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड के तहत देशभर की विभिन्न परियोजनाओं के लिए 3.44 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज स्वीकृत किया है। उन्होंने कहा कि नाबार्ड राज्य सरकारों/सरकारी स्वामित्व वाले निगमों को कृषि और ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने में निवेश के लिए कर्ज देता है।