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अनिल अंबानी की मुश्किलें बढ़ीं: ईडी ने ₹1800 करोड़ की संपत्ति की जब्त, विस्तार से जानिए क्या है पूरा मामला

Wed, 28 Jan 2026 09:13 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 28 Jan 2026 09:13 PM IST
सार

अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप पर ईडी का बड़ा एक्शन। मनी लॉन्ड्रिंग केस में 1,800 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त, जिसमें मुंबई मेट्रो और बीएसईएस के शेयर्स शामिल हैं। जानिए यस बैंक और आरकॉम लोन के फ्रॉड का पूरा मामला।

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Anil Ambani ED Attachment Reliance Group Money Laundering Probe Yes Bank Fraud Reliance Infrastructure
अनिल अंबानी - फोटो : PTI

विस्तार

रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी की कंपनियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत एजेंसी ने बुधवार को ग्रुप की 1,800 करोड़ रुपये से ज्यादा की नई संपत्तियां जब्त  कर ली हैं। इस ताजा कार्रवाई के साथ ही इस मामले में अब तक कुल 12,000 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।

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क्या-क्या हुआ जब्त? 
ईडी ने यह कार्रवाई 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए) के तहत की है। जब्त की गई नई संपत्तियों में शामिल हैं:

  • रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की बीएसईएस (बीएसईएस) यमुना पावर और बीएसईएस राजधानी पावर में हिस्सेदारी।
  • मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड में कंपनी के शेयर्स।
  • इसके अलावा, कंपनी के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के मकान और म्यूचुअल फंड्स को भी जब्त किया गया है।

क्या है 'पैसों की हेराफेरी' का आरोप? 
ईडी की जांच में सार्वजनिक धन के 'फर्जीवाड़े और डायवर्जन' की बात सामने आई है। इसे आसान भाषा में ऐसे समझा जा सकता है:

1. यस बैंक कनेक्शन
आरोप है कि रिलायंस निप्पॉन म्यूचुअल फंड ने सेबी के कड़े नियमों से बचने के लिए सीधे अपनी ग्रुप कंपनियों में पैसा नहीं लगाया। इसके बजाय, उन्होंने यह पैसा यस बैंक के जरिए रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस तक पहुचाया। बाद में यह पैसा डूब गया और लोन 'नॉन-परफॉर्मिंग' यानी एनपीए हो गए।

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2. लोन की हेराफेरी
रिलायंस कम्युनिकेशंस और उसकी ग्रुप कंपनियों पर बैंकों का करीब 40,185 करोड़ रुपये बकाया है। ईडी का दावा है कि कंपनी ने लोन के 13,600 करोड़ रुपये पुराने कर्ज चुकाने में और 12,600 करोड़ रुपये अपनी ही दूसरी पार्टियों को भेजने में खर्च कर दिए।
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3. विदेश भेजा पैसा
जांच एजेंसी ने यह भी पाया कि बिल डिस्काउंटिंग के नाम पर भारी गड़बड़ी की गई और कुछ लोन का पैसा भारत से बाहर (Foreign Remittances) भेज दिया गया। हालांकि, अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनियों ने पहले किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया था।

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