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Gujarat: अमित शाह ने गुजरात में लॉन्च की भारत टैक्सी सर्विस, जानिए इस नई कैब सेवा से ड्राइवर्स को क्या फायदा

Sat, 27 Jun 2026 02:32 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Sat, 27 Jun 2026 02:32 PM IST
सार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात में 'भारत टैक्सी सर्विस' लॉन्च कर दी है, यह ड्राइवर्स के स्वामित्व वाली देश की पहली कैब सर्विस है। जानिए कैसे यह को-ऑपरेटिव मॉडल कैब सेक्टर में बदलाव लाएगा।

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Amit Shah Launches 'Bharat Taxi': India's First Driver-Owned Ride-Hailing Platform
भारत टैक्सी लॉन्चिंग - फोटो : amarujala.com

विस्तार

क्या आप भी निजी कैब कंपनियों की मनमानी और कैंसिलेशन की समस्याओं से परेशान हैं? अब इस समस्या का एक नया और ठोस समाधान 'को-ऑपरेटिव मॉडल' (सहकारी ढांचे) के जरिए सामने आया है। केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को गुजरात में भारत टैक्सी सर्विस को आधिकारिक रूप से लॉन्च कर दिया है। यह भारत का पहला ऐसा राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है, जिसका मालिकाना हक सीधे तौर पर इसे चलाने वाले ड्राइवर्स के पास होगा। भारतीय मोबिलिटी सेक्टर में इस पहल को ट्रांसपोर्टेशन एक्सेसिबिलिटी के एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है।

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'भारत टैक्सी' की शुरुआत कहां हुई और इसके विस्तार की क्या योजना है?

लॉन्चिंग के पहले चरण में इस सेवा को गुजरात राज्य के 14 प्रमुख शहरों में शुरू किया गया है। सरकार और सहकारिता मंत्रालय का लक्ष्य बेहद आक्रामक है; उन्होंने अगले एक महीने के भीतर इस सर्विस के ऑपरेशंस का विस्तार पूरे गुजरात राज्य में करने की योजना बनाई है। 

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इस नए को-ऑपरेटिव मॉडल की जरूरत क्यों पड़ी?

लॉन्चिंग कार्यक्रम में जनसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि भारत के आर्थिक विकास के साथ-साथ टैक्सी सेवाओं की मांग में भारी बढ़ोतरी हुई है और आज यह जरूरत हर घर तक पहुंच गई है। उन्होंने साफ किया कि प्राइवेट सेक्टर की टैक्सी सेवाओं में कई तरह की दिक्कतें उभर कर सामने आ रही थीं, जिससे परेशान होकर आम जनता और ड्राइवर्स दोनों ने ही उनसे मुलाकात कर समाधान की उम्मीद जताई थी। इसी वजह से एक नए सहकारी ढांचे को विकसित करने का निर्णय लिया गया।

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क्या प्राइवेट कंपनियों पर लगाम कसने के लिए केवल नया कानून बनाना काफी नहीं था?

अमित शाह के अनुसार, जब यह मुद्दा सामने आया, तो शुरुआत में यह विचार भी आया था कि सरकार को प्राइवेट कैब कंपनियों को नियंत्रित करने के लिए एक नया कानून बनाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल एक नया कानून बना देना किसी भी समस्या का 100 प्रतिशत समाधान नहीं हो सकता। यही कारण है कि सिर्फ कानूनी बंदिशों पर निर्भर रहने के बजाय सरकार ने एक ऐसा बिजनेस मॉडल तलाशने का फैसला किया जो बुनियादी रूप से ही शोषण से मुक्त हो। 

इस नई पहल से कैब सेक्टर में क्या बड़ा बदलाव आएगा?

इस बिजनेस मॉडल के पीछे का सबसे बड़ा विचार कैब सेक्टर से शोषण-आधारित व्यापार को खत्म करना है। जब टैक्सी सर्विस को-ऑपरेटिव मॉडल पर चलेगी, तो मुनाफे और कंट्रोल का एक बड़ा हिस्सा सीधे ड्राइवर्स के पास रहेगा, जिससे प्राइवेट कंपनियों द्वारा होने वाला शोषण खुद ही कम होने लगेगा। शाह ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत ने सहकारिता के माध्यम से कई अन्य सेक्टर्स में शानदार सफलता हासिल की है, इसलिए यही मॉडल टैक्सी सेक्टर की समस्याओं का भी एक सार्थक और प्रभावी समाधान बन सकता है। कुल मिलाकर, 'भारत टैक्सी' का यह नया प्रयोग भारतीय मोबिलिटी सेक्टर के लिए एक बहुत बड़ा कदम है। अगर गुजरात में यह पायलट प्रोजेक्ट सफलता हासिल करता है, तो यह देश भर में राइड-हेलिंग बिजनेस के तौर-तरीकों को हमेशा के लिए बदल सकता है।

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