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RBI MPC: मजबूत विकास दर और भारत में घटती महंगाई के बीच आरबीआई रेपो दर 5.5% पर ही स्थिर रखेगा, रिपोर्ट में दावा

Tue, 02 Dec 2025 10:26 AM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Tue, 02 Dec 2025 10:26 AM IST
सार

बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार आरबीआई आगामी मौद्रिक नीति बैठक में रेपो दर को 5.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रख सकता है। इसमें कहा गया है कि भारत का आर्थिक प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है। वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत रही, जो बाजार की उम्मीदों से अधिक है। 

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Amid strong growth and declining inflation in India, RBI will keep the repo rate steady at 5.5%, claims report
भारतीय रिजर्व बैंक - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

आरबीआई आगामी मौद्रिक नीति बैठक में रेपो दर को 5.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रख सकता है। बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय बैंक की ओर से रुख को तटस्थ बनाए रखने की उम्मीद है। 

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तीसरी तिमाही का जीडीपी आंकड़ा बाजार की उम्मीदों से अधिक

इसमें कहा गया है कि भारत का आर्थिक प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है। वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत रही, जो बाजार की उम्मीदों से अधिक है। 

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शहरी खतप में सुधार और ग्रामीण मांग में दिखी मजबूती

रिपोर्ट के अनुसार शहरी खपत में सुधार और ग्रामीण मांग में मजबूती के चलते तीसरी तिमाही में भी यह गति जारी रहने की संभावना है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि क्रेडिट मांग में तेजी के कारण निजी निवेश में सुधार के संकेत मिल रहे हैं।

कम कीमतों के कारण महंगाई का दबाव कम हुआ

मुद्रास्फीति के मोर्चे पर, रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि कीमतों का दबाव काफी कम हुआ है। खाद्य कीमतों में लगातार गिरावट के कारण, अक्तूबर 2025 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति घटकर 0.25 प्रतिशत के निचले स्तर पर आ गई। महंगाई में और कमी आने की उम्मीद है और यह RBI के अपने अनुमानों से भी नीचे आ सकती है।

रिपोर्ट में खाद्य मुद्रास्फीति के बेहतर परिदृश्य का श्रेय पर्याप्त वर्षा, समय पर आपूर्ति पक्ष के उपायों और बेहतर उत्पादन प्रवृत्तियों को दिया गया है। हालांकि मुख्य मुद्रास्फीति 4 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है, लेकिन इसका मुख्य कारण सोने की ऊंची कीमतें हैं, न कि मजंबूत मांग। कम जीएसटी दरों के लाभों से इसका प्रभाव आंशिक रूप से कम हो गया है।

आरबीआई आगामी बैठक में सतर्कता बरत सकता है

संभावित ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश के बावजूद, रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई आगामी बैठक में सतर्कता बरत सकता है, खासकर तब जब विकास दर मजबूत बनी हुई है।

एमपीसी अपने विकास अनुमानों को बढ़ा सकती है

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि आगे चलकर और अधिक मौद्रिक सहायता की जरूरत पड़ सकती है, खासकर अगर मौजूदा टैरिफ-संबंधी चुनौतियां बनी रहती हैं। मौजूदा दर को बनाए रखने से पिछली दरों में कटौती के प्रभावों को पूरी तरह से प्रणाली में लागू होने के लिए अधिक समय मिलेगा। हाल के आर्थिक संकेतकों को देखते हुए, रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि एमपीसी अपने विकास अनुमानों को बढ़ाएगी। साथ ही, मुद्रास्फीति के अनुमानों में भी कमी आने की संभावना है।

बता दें कि अक्तूबर की नीति बैठक में भी आरबीआई की समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय लेकर नीतिगत रेपो दर को 5.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा।
एमपीसी की बैठक 3 दिसंबर से 5 दिसंबर तक निर्धारित है, जबकि नीतिगत निर्णय की घोषणा 5 दिसंबर को की जाएगी, जिसकी घोषणा आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा सुबह 10 बजे करेंगे। 

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