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Zero-Tariff Deal: अमेरिका और ब्रिटेन जीरो टैरिफ डील पर सहमत हुए, फार्मा सेक्टर की कंपनियों को लाभ; जानिए सबकुछ

Tue, 02 Dec 2025 07:35 AM IST
ज्योति भास्कर बिजनेस डेस्क, अमर उजाला।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला। Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 02 Dec 2025 07:35 AM IST
सार

अमेरिका और ब्रिटेन के बीच जीरो टैरिफ डील पर सहमति बन गई है। कम से कम तीन साल के लिए हुए इस करार के तहत ब्रिटेन अमेरिका में दवाओं का निर्यात कर सकेगा। इस डील के लागू होने के बाद फार्मा सेक्टर की कंपनियों को लाभ मिलेगा। क्या हैं जीरो टैरिफ डील की बारीकियां? दोनों देशों को किस तरह के आर्थिक लाभ मिलेंगे? जानिए सबकुछ

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US UK Zero-Tariff Deal medicines export three years benefit to pharma sector companies know details in hindi
अमेरिका और ब्रिटेन की सरकारों के बीच जीरो टैरिफ डील पर सहमति बनी (फाइल) - फोटो : PTI

विस्तार

अमेरिका और ब्रिटेन के बीच जीरो टैरिफ डील पर सहमति बन गई है। फार्मा सेक्टर की कंपनियों को इस डील से बड़े लाभ होने के आसार हैं। दोनों देशों के बीच हुए इस करार का असर तीन साल तक रहेगा। अधिकारियों के मुताबिक ब्रिटेन ने कम से कम तीन साल के लिए अमेरिका में निर्यात की जाने वाली सभी दवाओं पर जीरो परसेंट टैरिफ की दर पक्की कर ली है। इसके बदले में ब्रिटेन अब नई दवाओं पर अधिक खर्च कर सकेगा। इस डील के तहत अमेरिका ने आश्वासन दिया है कि ब्रिटेन में बनी दवाओं, दवा में इस्तेमाल होने वाली चीजें (इंग्रेडिएंट्स) और मेडिकल टेक्नोलॉजी को इंपोर्ट टैक्स से छूट मिलेगी।

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दोनों देशों के बीच जीरो टैरिफ डील के मायने
अमेरिका और ब्रिटेन के बीच हुए इस समझौते के बारे में अधिकारियों ने सोमवार को कहा, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नीत प्रशासन ने कहा है कि इस डील के बदले में UK की दवा कंपनियों ने अमेरिका में अधिक निवेश करने और अधिक नौकरियों के अवसर सृजित करने का वादा किया है। दूसरी तरफ ब्रिटेन में प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के नेतृत्व वाली सरकार ने कहा है कि यूके से सभी दवाओं के निर्यात पर जीरो परसेंट रेट किसी भी देश को दी गई सबसे कम दर है। इस डील के हिस्से के तौर पर ब्रिटेन ने कहा है कि देश की सरकार नेशनल हेल्थ सर्विस नए और असरदार इलाज पर लगभग 25 परसेंट अधिक खर्च करेगी। यह भी दिलचस्प है कि बीते दो दशकों में इस तरह के खर्च में सरकार ने पहली बार इतनी बड़ी बढ़ोतरी करने का एलान किया है।

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मरीजों को जरूरत के मुताबिक दवाएं जल्दी मिल सकेंगी

अधिकारियों के मुताबिक इस डील के बाद UK की हेल्थ अथॉरिटी अब उन दवाओं को भी मंजूरी दे पाएंगी जिनकी मदद से सेहत में काफी सुधार होता है। इससे पहले केवल कॉस्ट-इफेक्टिवनेस के आधार पर दवाओं को मंजूरी देने से मना कर दिया गया था। इन बीमारियों में ब्रेकथ्रू कैंसर ट्रीटमेंट या रेयर बीमारियों की थेरेपी भी शामिल हैं। ब्रिटेन के साइंस और टेक्नोलॉजी सेक्रेटरी लिज केंडल ने कहा, अमेरिका के साथ यह जरूरी डील पक्का करेगी कि ब्रिटेन के मरीजों को उनकी जरूरत के मुताबिक दवाएं जल्दी मिलें। साथ ही दुनिया की शीर्ष कंपनियों के साथ काम कर रहे वैज्ञानिक ऐसे इलाज पर शोध कर सकें जिन्हें अपनाकर जिंदगी बदली जा सके।

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एडवांस्ड मेडिसिनल रिसर्च को आकर्षित करने में मदद मिलेगी
ब्रिटेन में स्वास्थ्य क्षेत्र की शीर्ष इकाई- एसोसिएशन ऑफ द ब्रिटिश फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री (ABPI) ने भी जीरो टैरिफ डील को लेकर खुशी का इजहार किया। इंडस्ट्री ने कहा, यह डील पक्का करने की दिशा में एक जरूरी कदम है कि मरीज राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS) के तहत बेहतर लाभ पा सकेंगे। मरीजों को जरूरी और नई दवाएं आसानी से मिल सकेंगी। ABPI अधिकारी रिचर्ड टॉरबेट ने कहा, इस डील के बाद UK ग्लोबल लाइफ साइंस इन्वेस्टमेंट और एडवांस्ड मेडिसिनल रिसर्च को आकर्षित कर सकेगा। मेडिकल से जुड़े शोध में देश की स्थिति और मजबूत होगी।

अमेरिकी स्वास्थ्य मंत्री का बयान- ऐसे संतुलन की दरकार लंबे समय से थी
इस संबंध में अमेरिकी स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्ट एफ केनेडी जूनियर ने कहा, जीरो टैरिफ डील नई दवाओं के लिए वैश्विक माहौल को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि US-UK फार्मास्युटिकल ट्रेड में लंबे समय से संतुलन की दरकार थी, लेकिन अब ये बैलेंस बनाया जा सकेगा।

दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच बनी थी सहमति
बता दें कि इस वर्ष की शुरुआत में ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के बीच व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति बनी थी। इस सहमति के तहत ही बीफ और इथेनॉल सहित कई अमेरिकी उत्पादों को लेकर अहम फैसले हुए। इसके मुताबिक ब्रिटिश बाजार में अधिक पहुंच के बदले अमेरिका ने ब्रिटिश कारों, स्टील और एल्युमिनियम पर आयात कर में कटौती करेगा।

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