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GTRI: 'चीनी ढील के बीच भारत को आत्मनिर्भरता पर देना होगा जोर', जीटीआरआई ने दिया सुझाव

Wed, 20 Aug 2025 01:09 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Wed, 20 Aug 2025 01:09 PM IST
सार

जीटीआरआई की रिपोर्ट के अनुसार भले ही चीन ने निर्यात प्रतिबंधों पर ढील दे दी है, लेकिन भारत को चीन पर निर्भरता कम करनी होगी। व्यापार चुनौतियों के बीच भारत के पास आत्मनिर्भरता ही एकमात्र सुरक्षा की गारंटी है। 

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Amid Chinese laxity, India will have to focus on self-reliance, GTRI suggests
भारत चीन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चीन की ओर से निर्यात प्रतिबंधों में ढील का कदम स्वागत के योग्य है लेकिन व्यापार चुनौतियों के बीच आत्मनिर्भरता ही भारत का एकमात्र सहारा है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने एक रिपोर्ट में यह सुझाव दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत चीनी आयात पर अपनी गहरी आर्थिक निर्भरता को नजरअंदाज नहीं कर सकता। 

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चीन के प्रतिबंधों से भारत पर पड़ा था असर
दरअसल, चीन ने रेयर अर्थ मेटल पर प्रतिबंध लगा दिया था, इससे भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में हलचल मच गई थी। जून में चीनी बैटरी दिग्गज CATL ने फॉक्सकॉन के चेन्नई प्लांट से अपने इंजीनियरों को वापस बुला लिया था, इससे परिचालन पर असर पड़ा था। 
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वित्त वर्ष 2025 में चीन के साथ व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर रहा
हालिया ढील के बावजूद, आर्थिक असंतुलन गहरा बना हुआ है। वित्त वर्ष 2025 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा रिकॉर्ड 100 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं बीजिंग ने हालिया युद्ध में पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया है। व्यापार घाटा तब होता है जब कोई देश अन्य देशों को बेची जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की तुलना में उनसे अधिक वस्तुएं और सेवाएं खरीदता है। 

चीन पर निर्भरता भारत को पहुंचा सकती है नुकसान
जीटीआरआई ने चिंता जताई है कि इस तरह की निर्भरता संकट के समय चीन को बड़ा लाभ पहुंचा सकती है। भारत के रोजमर्रा के उत्पाद, जैसे 80.5 प्रतिशत लैपटॉप और 86 प्रतिशत फ्लैट पैनल डिस्प्ले में चीनी आयात का प्रभुत्व है। 


द्विपक्षीय व्यापार में भारत की हिस्सेदारी घटकर 11.2 प्रतिशत रह गई
इसके अलावा द्विपक्षीय व्यापार में भारत की हिस्सेदारी दो दशक पहले के 42.3 प्रतिशत से घटकर मात्र 11.2 प्रतिशत रह गई है। यह तीव्र गिरावट भारत की आपूर्ति शृंखलाओं की कमजोरी और चीनी इनपुट पर बढ़ती निर्भरता को उजागर करती है। 

भारत के चीन के रिश्ते
रिपोर्ट में जोर देकर कहा गया है कि भारत और चीन के रिश्तों में असंतुलन को नहीं छिपाया जा सकता। भारत के पास एक ही रास्ता है कि घेरलू विनिर्माण को मजबूत करना, आयात पर निर्भरता कम करना और लचीली आपूर्ति शृंखलाएं बनना। एक मजबूत और अधिक आत्मनिर्भर भारत, चीन के साथ समान शर्तों पर बातचीत करने में बेहतर स्थिति में होगा। भारत अचनाक आए बदलावों के आगे झुकने के बजाय संबंधों को स्थिर और व्यावहारिक बनाए रखेगा। 

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