Tariffs: व्यापारी दुविधा में, 50% अमेरिकी टैरिफ से भारतीय कारोबार को होगा कितना बड़ा नुकसान? जानिए सबकुछ
सीटीआई के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अमेरिका से आयातित वस्तुओं पर जवाबी टैरिफ लगाने सहित त्वरित और रणनीतिक कार्रवाई की अपीली की है। पीएम को भेजे अपने पत्र में गोयल ने क्या-क्या कहा है, आइए जानते हैं विस्तार से।
विस्तार
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने हाल ही में अमेरिका की ओर से टैरिफ बढ़ाने की योजना पर चिंता जताई है। सीटीआई ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर 50 शुल्क लगाता है तो भारत के निर्यात पर आधारित व्यवसायों पर को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसे देखते हुए व्यापारी दुविधा में हैं।
सीटीआई ने पीएम को पत्र लिखकर की रणनीतिक कार्रवाई की मांग
सीटीआई के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अमेरिका से आयातित वस्तुओं पर जवाबी टैरिफ लगाने सहित त्वरित और रणनीतिक कार्रवाई की अपीली की है। पीएम को भेजे अपने पत्र में, गोयल ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले भारत से होने वाले आयात पर 25 प्रतिशत टैरिफ का एलान किया, फिर इसे 27 अगस्त से दोगुना करके 50% करने की बात कही है। अमेरिका की ओर से भारत पर लगाने से भारतीय निर्यातकों और निर्माताओं, विशेष रूप से शिपमेंट कारोबार से जुड़े लोगों या कंफर्म ऑर्डर हासिल कर चुके लोगों के बीच भ्रम और अशांति की स्थिति पैदा कर दी है।
गोयल ने कहा, "व्यापारी दुविधा में हैं। पहले से भेजे गए सामान या अमेरिका पहुंचने वाले सामान का क्या होगा?" उन्होंने 2024 में अमेरिका को भारत के महत्वपूर्ण निर्यात का हवाला दिया- जिसमें 1.7 लाख करोड़ रुपये मूल्य के इंजीनियरिंग सामान जैसे स्टील उत्पाद, मशीनरी और ऑटोमोबाइल पार्ट्स शामिल हैं- जिन पर वर्तमान में 10 प्रतिशत कर लगता है। नए ढांचे के तहत, टैरिफ बढ़कर 25 प्रतिशत हो जाएगा, जिससे उत्पाद की कीमतें बढ़ेंगी और अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा कम होगी।
रत्न आभूषण व वस्त्र उद्योग को सबसे अधिक नुकसान की आशंका
गोयल ने कहा, "उदाहरण के लिए, 100 अमेरिकी डॉलर की एक वस्तु जो वर्तमान में टैरिफ के बाद 110 अमेरिकी डॉलर में बिकती है, अब 125 अमेरिकी डॉलर की हो जाएगी। इससे निर्यात की मात्रा में 10-15 प्रतिशत की कमी आ सकती है।" उन्होंने कहा कि अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह के प्रभाव की उम्मीद है। रत्न और आभूषण क्षेत्र, जिसने पिछले साल 90,000 करोड़ रुपये के सामान का निर्यात किया था और वर्तमान में 10 प्रतिशत टैरिफ का सामना कर रहा है। नए टैरिफ के एलान के बाद यह क्षेत्र भी संकट में है। कपड़ा क्षेत्र, जिस पर टैरिफ 10 प्रतिशत से बढ़कर 25 प्रतिशत हो गया है, और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र– जिसके 1.25 लाख करोड़ रुपये के निर्यात पर केवल 0.41 प्रतिशत कर लगता था- नए टैरिफ लागू होने पर लागत में भारी वृद्धि का सामना करेगा।
दवा उद्योग तक भी पहुंच सकती है टैरिफ की आंच
इलेक्ट्रॉनिक्स, खासकर स्मार्टफोन से जुड़े निर्यात के मामले में भारत को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। गोयल ने कहा, "100 डॉलर का एक स्मार्टफोन वर्तमान में अमेरिका में 100.41 डॉलर में आता है। 25 प्रतिशत टैरिफ के साथ, अब इसकी कीमत 125 डॉलर होगी- यह स्थिति इस क्षेत्र के लिए एक बड़ा झटका है।" गोयल के अनुसार दवा उद्योग को भी नए टैरिफ के एलान से नुकसान होगा। भारत ने 2024 में शून्य आयात शुल्क के साथ अमेरिका को 92,000 करोड़ रुपये की दवाइयां निर्यात कीं। यदि प्रस्तावित 25 प्रतिशत टैरिफ लागू होता है, तो भारतीय दवाएं काफी महंगी हो जाएंगी, जिससे वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देशों को बाजार हिस्सेदारी हासिल करने का अवसर मिलेगा।
टैरिफ के अमल में आने से नौकरियों पर भी बढ़ सकता है खतरा
गोयल ने चेतावनी दी, "यह केवल व्यावसायिक घाटे का मामला नहीं है; यह नौकरियों का मामला है। हजारों भारतीय कंपनियां अमेरिका को निर्यात करती हैं- ऐसे में लाखों नौकरियां दांव पर हैं।" सीटीआई ने भारत सरकार से कड़ा रुख अपनाने का आग्रह किया है। गोयल ने सुझाव दिया कि भारत जर्मनी, ब्रिटेन, सिंगापुर और मलेशिया जैसे वैकल्पिक बाजारों की पहचान करे, जहां भारतीय इंजीनियरिंग वस्तुओं की मांग बढ़ रही है। उन्होंने अमेरिकी आयात पर भारत की निर्भरता कम करने का भी आह्वान किया। भारत वर्तमान में अमेरिका से बड़ी मात्रा में खनिज, कीमती पत्थर, आभूषण, सिक्के, धातुएं, परमाणु रिएक्टर और पुर्जे, विद्युत और प्रकाशीय उपकरण, प्लास्टिक, रसायन, मेवे, सूखे मेवे, लोहा और इस्पात सहित कई वस्तुओं का आयात करता है। गोयल ने कहा, "भारत को अन्य वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश करनी चाहिए और अमेरिकी वस्तुओं पर अपनी निर्भरता कम करनी चाहिए।
भारत को कितने बड़े नुकसान का अंदेशा?
कुछ जानकारों का मानना है कि अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ के एलान से भारत का कोई बहुत बड़ा नुकसान नहीं होने वाला। भारत के 95% निर्यात को अमेरिकी टैरिफ से नुकसान की आशंका नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत का कुल निर्यात 820 अरब डॉलर का था। जिसमें टैरिफ के कारण प्रभावित होने वाला हिस्सा महज 4.8% ही है। इसका मतलब है कि केवल लगभग 40 अरब डॉलर का भारतीय निर्यात ही अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित हो सकता है। बाकी 780 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात पर कोई प्रभाव पड़ने की फिलहाल आशंका नहीं है। जानकारों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, ऑटो पार्ट्स, धातु और सेवा क्षेत्र पर फिलहाल टैरिफ से प्रभावित होने की आशंका नहीं है।