अमर उजाला संवाद: 'असफलता न बने धब्बा', जानें देश में नवाचार व स्टार्टअप इकोसिस्टम पर और क्या बोले दिग्गज
उत्तराखंड के वित्त मंत्री ने कहा कि 2016 में हमारे यहां चार स्टार्टअप थे आज उत्तराखंड में 850 से अधिक स्टार्टअप हैं। सरकार प्रतिभाओं को उभारने में पूरी मदद कर रही है। उत्तराखंड छोटा और नवोदित राज्य है पर यहां प्रतिभाओं की कमी नहीं है।
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उत्तराखंड के वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में स्टार्टअप्स एंड इंडस्ट्रीज सेशन के दौरान 'संघर्षों की सौगात' विषय पर बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदीजी ने जब से स्टार्टअप योजना शुरू की है, हम लगातार इस दिशा में अच्छा काम कर रहे हैं। 2016 में हमारे यहां चार स्टार्टअप थे आज उत्तराखंड में 850 से अधिक स्टार्टअप हैं। सरकार प्रतिभाओं को उभारने में पूरी मदद कर रही है। उत्तराखंड छोटा और नवोदित राज्य है पर यहां प्रतिभाओं की कमी नहीं है। हमारे यहां उद्यान के क्षेत्र में और कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। सरकार युवाओं को स्टार्टअप के लिए बहुत प्रोत्साहन दे रही है। शांत वातावरण से बड़े और छोटे सभी उद्योगों को फायदा मिलता है। पूरे देश में अच्छा माहौल है पर देवभूमि उत्तराखंड सबसे शांत है। इसका फायदा उद्योगों को मिलता है। लड़कियों के लिए भी सुरक्षा का माहौल है। आने वाले समय में स्टार्टअप के क्षेत्र में और भी बड़े काम होंगे।
आईआईटी रुड़की स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देने की दिशा में काम कर रहाः प्रो. केके पंत
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रोफेसर केके पंत ने अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में स्टाटर्अप्स से जुड़े सेशन में संघर्षों की सौगात विषयों पर बोलते हुए कहा कि आईआईटी बदलाव का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि आईआईटी रुड़की में हर साल 2.5 हजार बच्चे संस्थान में आते हैं। हम उन्हें आइडिया जेनरेट करने का मौका देते हैं। अब पढ़ाई बुकिश नहीं है। आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल जैसे अभियान शुरू होने चीजें बदली हैं। प्रोफेसर पंत ने कहा कि आआईटी रुड़की में हम 1000 आइडिया में से 50 आइडिया शॉर्टलिस्ट करते हैं। ये 50 आइडिया आगे जाते हैं। अपने एलुमिनाई को मैं कहता हूं हम पांच साल में 5 यूनिकॉर्न निकलेंगे जो मिलियन्स में अर्निंग करेगे। हर आदमी टाटा-बिड़ला या बिल गेट्स की कैटेगरी में नहीं जा सकता है पर हम सभी नवाचार के क्षेत्र में बढ़िया काम करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं। आईआईटी रुड़की में 150 स्टार्टअप चल रहे हैं। हम हनी के प्रॉडक्ट पर काम कर रहे हैं और उसे विश्वस्तरीय बनाने पर काम कर कर रहे हैं। हम आइडियाज को इन्क्यूबेट करने का काम कर रहे हैं। आने वाले समय में स्टार्टअप्स इकोसिस्टम की मजूबूती देने के लिए चाइल्ड एजुकेशन और महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी काम किया जाना चाहिए।
स्टार्टअप की दुनिया में जो इनोवेशन होंगे वे भारत से निकलेंगेः वैभव वर्धन
आईएनसी42 मीडिया के संस्थापक और सीईओ वैभव वर्धन ने कहा भारत में स्टार्टअप का नया दौर शुरू हो गया है। देश में 139 बिलियन डॉलर स्टार्टअप फंडिंग हो चुकी है। 90 हजार स्टार्टअप हैं। पांच बिलियन डॉलर अर्ली स्टार्टअप फंडिंग हो चुकी है। देश में वीसी (वेंचर कैपिटल) मनी आ रहा है। वैभव ने कहा कि नवाचार के मामले में अभी हमारा देश शुरू हुआ है। जितने भी फ्यूचर इनोवेशन होंगे वे भारत से ही निकलेंगे।
बढ़ते स्टार्टअप्स के बीच यह ध्यान रखना जरूरी कि असफलता धब्बा ना बनेः संदीप अग्रवाल
संवाद कार्यक्रम में स्टार्टअप्स एंड इंडस्ट्रीज सेशन के तहत देश को दो यूनिकॉर्न ड्रूम और शॉपक्लूज देने वाले सीईओ संदीप अग्रवाल ने कहा कि अमर उजाला संवाद उत्तराखंड की ग्रोथ का एक हिस्सा है। जब हम गूगल को या फेसबुक को देखते हैं तो यह रेवोल्यूशन यूएस में 1956 में एचपी की शुरूआत के साथ शुरू हुआ। वहीं से स्टार्टअप का इकोसिस्टम बना। भारत में स्टार्टअप का कल्चर पिछले दस साल में शुरू हुआ। अब तक करीब 110 यूनिकॉर्न बन चुके हैं। आइडिया एक पार्ट है। उसे विकसित करने के लिए या आइडिया को फंड करने करने के लिए कितने लोग तैयार हैं यह भी अहम है। जब हमने ने स्टार्टअप्स की नींच रखी थी जो देश में महज चार एंजल इन्वेस्टर थे पर आज भारत में 50 हजार से अधिक एंजल इन्वेस्टर हैं। इसलिए यह कहना है कि हम स्टार्टअप के मामले में सही दिशा में जा रहे हैं बिल्कुल सही है। हालांकि यहां एक बात का ध्यान रखा जाना जरूरी है कि फेल्योर या असफलता को कभी धब्बा नहीं माना जाना चाहिए।
उद्योग जगत की परेशानियों को दूर करने की दिशा में हो और कामः अनिल कुमार त्यागी
न्यूबर्ग इंजीनियरिंग के सीएमडी अनिल कुमार त्यागी ने अमर उजाला परिवार को संवाद कार्यक्रम के लिए बधाई देते हुए कहा कि आने वाला समय और आने वाला 25 वर्ष देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आज चीन करीब 17 ट्रिलियन डॉलर के करीब है। उन्होने 15 वर्षों में यह उपलब्धि हासिल की है। हमारे पास वही पोटेंशियल उपलब्ध है जो स्विट्जरलैंड के पास है। ऐसे में हमारे समाने यह स्पष्ट होना चाहिए कि देश को कहां जाने की आवश्यकता है। उद्योगों की परेशानियों को दूर करने पर काम किया जाना चाहिए। अगले 25 वर्षों के लिए रोडमैप तैयार किया जाना चाहिए।