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Indian Economy: कृषि और सेवा क्षेत्र ने बढ़ाई अर्थव्यवस्था की रफ्तार, भारत की विकास दर काफी तेज

Thu, 01 Sep 2022 06:38 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Thu, 01 Sep 2022 06:38 AM IST
सार

वित्तीय, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवाओं की विकास दर 2.3 फीसदी से बढ़कर 9.2 फीसदी पहुंच गई। इसके अलावा, बिजली, गैस, जलापूर्ति और अन्य उपयोगी सेवाओं की वृद्धि दर 14.7 फीसदी रही, जो 2021-22 की समान तिमाही में 13.8 फीसदी थी।

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Agriculture and service sector increased the pace of the economy
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay

विस्तार

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर पिछली चार तिमाहियों में सबसे तेज रही। इसकी प्रमुख वजह कृषि और सेवा क्षेत्र का दमदार प्रदर्शन है। इसके साथ भारत दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था बना हुआ है। इससे भारतीय बाजार में वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और निवेश आकर्षित करने में भी मदद मिलेगी।

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राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) के बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर 17.6  फीसदी रही, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 10.5 फीसदी रही थी। कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 4.5 फीसदी रही। 2021-22 की पहली तिमाही में 2.2 फीसदी रही थी। 
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वित्तीय, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवाओं की विकास दर 2.3 फीसदी से बढ़कर 9.2 फीसदी पहुंच गई। इसके अलावा, बिजली, गैस, जलापूर्ति और अन्य उपयोगी सेवाओं की वृद्धि दर 14.7 फीसदी रही, जो 2021-22 की समान तिमाही में 13.8 फीसदी थी। लोक प्रशासन, रक्षा और अन्य सेवाओं के बढ़ने की दर 6.2% से बढ़कर 26.3% पहुंच गई। 
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इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, सितंबर तिमाही में वृद्धि दर नरम पड़ेगी क्योंकि तुलनात्मक आधार अब सामान्य हो रहा है।

17.6% रही सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर, एक साल पहले 10.5% थी
4.5% की दर से बढ़ा कृषि क्षेत्र, एक साल पूर्व 2.2 फीसदी थी दर

विनिर्माण क्षेत्र में भारी गिरावट

अप्रैल-जून, 2021 49%
अप्रैल-जून, 2022 4.8%

ट्रेड-होटल

अप्रैल-जून, 2021 34.3%
अप्रैल-जून, 2022 25.7%

निर्माण

अप्रैल-जून, 2021 71.3%
अप्रैल-जून, 2022 16.8%

खनन

अप्रैल-जून, 2021 18%
अप्रैल-जून, 2022 6.5%

2022-23 में 7.4% तक विकास दर
वित्त सचिव टीवी सोमनाथन ने कहा, भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में 7-7.4% की वृद्धि दर हासिल करने की ओर बढ़ रही है। उन्होंने आयात बढ़ने से राजकोषीय स्थिति पर दबाव पड़ने की चिंताओं को दूर करते हुए कहा, सरकार चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 6.4% पर बनाए रखने के लिए आश्वस्त है।

पांच साल में पहली तिमाही में जीडीपी
अप्रैल-जून, 2018 33.82 लाख  करोड़ रुपये
अप्रैल-जून, 2019   35.49 लाख करोड़ रुपये
अप्रैल-जून, 2020  27.04 लाख करोड़ रुपये
अप्रैल-जून, 2021 32.46 लाख करोड़ रुपये
अप्रैल-जून, 2022 36.85 लाख करोड़ रुपये
(2019 यानी महामारी पूर्व स्तर से 3.83 फीसदी ज्यादा)

मौजूदा कीमत पर जीडीपी में 26.7 फीसदी बढ़ोतरी
एनएसओ ने कहा, मौजूदा कीमत पर जीडीपी (नॉमिनल जीडीपी) 2022-23 की पहली तिमाही में 26.7% बढ़कर 64.95 लाख करोड़ रुपये रही। 2021-22 की समान तिमाही में यह 51.27 लाख करोड़ रुपये थी। 2021-22 में मौजूदा कीमत पर जीडीपी 32.4% बढ़ी है।
  • इस दौरान सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) 12% बढ़कर 34.41 लाख करोड़ रुपये रहा।
  • वास्तविक जीडीपी 2020 की अप्रैल-जून तिमाही में 27.03 लाख करोड़ रुपये थी। कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए लगाए गए लॉकडाउन से 2020-21 की पहली तिमाही में इसमें 23.8% गिरावट आई थी।
जीएसटी संग्रह 1.42-1.43 लाख करोड़ तक संभव
आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ ने कहा, अगस्त में जीएसटी संग्रह 1.42-1.43 लाख करोड़ रुपये रह सकता है। इससे अर्थव्यवस्था में तेजी का संकेत मिलता है। उन्होंने कहा कि सकल स्थिर पूंजी निर्माण अप्रैल-जून में 34.7% बढ़ा, जो 10 साल में सबसे अधिक है।

राजकोषीय घाटा : घटकर 20.5% पर पहुंचा
चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीने यानी अप्रैल-जुलाई के दौरान राजकोषीय घाटा कम होकर सालाना लक्ष्य का 20.5 फीसदी रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 21.3% रहा था। बुधवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, राजकोषीय घाटे का यह आंकड़ा सार्वजनिक वित्त की स्थिति में सुधार का संकेत है। लेखा महानियंत्रक (सीजीए) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, राजकोषीय घाटा (खर्च और राजस्व का अंतर) अप्रैल-जुलाई के दौरान 3,40,831 करोड़ रुपये रहा। यह घाटा सरकार की ओर से बाजार से लिए गए कर्ज की भी दर्शाता है।
  • आंकड़ों के मुताबिक, कर समेत सरकार की प्राप्तियां पहले चार महीने में 2022-23 के बजट अनुमान के 7.85 लाख करोड़ रुपये या 34.4 फीसदी पर पहुंच गई हैं। एक साल पहले की समान अवधि में यह करीब 34.6 फीसदी थीं।
  • कर राजस्व 6.66 लाख करोड़ रुपये या चालू वित्त वर्ष के बजट अनुमान का 34.4% रहा। पिछले साल भी सरकार अप्रैल-जुलाई के दौरान अपने सालाना अनुमान का 34.2% पाने में सफल रही थी।
  • केंद्र सरकार का कुल खर्च 11.26 लाख करोड़ रुपये या बजट अनुमान का 28.6% रहा है। यह लगभग एक साल पहले की समान अवधि के बराबर है।
  • सरकार का पूंजीगत खर्च बजट लक्ष्य का 27.8 फीसदी रहा है, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 23.2 फीसदी था।
  • 2022-23 के लिए राजकोषीय घाटे का अनुमान 16.61 लाख करोड़ या 6.4 फीसदी रखा है।
बुनियादी उद्योग : वृद्धि दर 6 महीने में सबसे कम
आठ बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर जुलाई में धीमी पड़कर 4.5 प्रतिशत रही। उत्पादन वृद्धि की यह दर छह महीने में सबसे कम है। एक साल पहले के समान महीने में यह 9.9 फीसदी रही थी। बुधवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर जून में 13.2 फीसदी, मई में 19.3 फीसदी, अप्रैल में 9.5 फीसदी, मार्च में 4.8 फीसदी, फरवरी में 5.9 फीसदी और जनवरी में 4 फीसदी थी।
  • आंकड़ों के मुताबिक, आठ बुनियादी उद्योगों कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीने यानी अप्रैल-जुलाई में 11.5 फीसदी रही।
  • 2021-22 की समान अवधि में यह 21.4 फीसदी रही थी। आलोच्य महीने में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन में क्रमश: 3.8% और 0.3% की गिरावट दर्ज की गई।

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