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बाजार: ऑपरेशन सिंदूर के बाद डिफेंस बना निवेश का नया भरोसा, शेयरों में 17% की छलांग; निवेशकों की बंपर कमाई
Mon, 19 May 2025 06:18 AM IST
शुभम कुमार
सलिल कुमार शाह निदेशक, लक्ष्मीश्री इन्वेस्टमेंट
सलिल कुमार शाह निदेशक, लक्ष्मीश्री इन्वेस्टमेंट
Published by: शुभम कुमार
Updated Mon, 19 May 2025 06:18 AM IST
सार
पहलगाम में बर्बर आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत के सपने की एक ठोस झलक है। इससे डिफेंस सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी देखी जा रही है। ऐसे में क्या डिफेंस शेयरों में निवेश का यह सही मौका है?
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भारतीय शेयर बाजार
- फोटो : एडोव
विस्तार
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय शेयर बाजार में डिफेंस सेक्टर से जुड़े शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली है। भारत ने पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए जो सैन्य कार्रवाई की, उसमें स्वदेशी हथियार और तकनीक सफल साबित हुए हैं। पिछले एक सप्ताह यानी 12-16 मई के बीच डिफेंस इंडेक्स 17.21 फीसदी उछल गया। इस दौरान सेंसेक्स में सिर्फ 0.64 फीसदी और निफ्टी में 1.73 फीसदी वृद्धि दर्ज हुई।
फिलहाल निवेशक डिफेंस स्टॉक्स में जमकर पैसा लगा रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि भारत की डिफेंस इंडस्ट्री में विकास की काफी संभावनाएं है। रक्षा क्षेत्र की प्रमुख सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लि. (एचएएल) की बाजार पूंजी हाल ही में तीन लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है, जिससे यह कंपनी अब लॉर्जकैप स्टॉक्स की कतार में खड़ी हो गई है।
डिफेंस ईटीएफ भी एक अहम विकल्प
अगर कोई निवेशक रक्षा क्षेत्र में हिस्सा लेना चाहता है लेकिन सीधे किसी कंपनी में निवेश करना नहीं चाहता, तो वह डिफेन्स ईटीएफ के जरिये भी निवेश कर सकता है। इन ईटीएफ में कई प्रमुख डिफेंस कंपनियों के शेयर शामिल होते हैं और ये जोखिम को थोड़ा कम करते हैं। साथ ही, सेक्टर की ग्रोथ का फायदा भी देते हैं।
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कुछ चुनौतियां भी: केवल सरकारी ऑर्डर पर ही निर्भरता
डिफेन्स क्षेत्र में कुछ चुनौतियां भी हैं। अब भी कई कंपनियां केवल सरकारी ऑर्डरों पर निर्भर हैं। अगर सरकार की तरफ से ऑर्डर में देरी होती है या बजट में कटौती होती है, तो इससे इन कंपनियों की कमाई पर असर पड़ सकता है। रक्षा उत्पादों का निर्यात करना आसान नहीं है, क्योंकि इसमें कई प्रक्रियाएं और अनुमति की जरूरत होती है। इसलिए डिफेंस स्टॉक्स में निवेश सोच-समझकर करें।
सही लक्ष्य पर कंपनियों के तिमाही नतीजे
ऑपरेशन के बाद, रक्षा क्षेत्र की कंपनी भारत डायनामिक्स लि., हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लि., पारस डिफेंस और जेन टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियों के शेयरों में उल्लेखनीय तेजी आई। खासतौर पर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स और भारत डायनामिक्स ने निवेशकों का जबरदस्त ध्यान आकर्षित किया।
हाल में घोषित वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही के नतीजों ने भी डिफेंस सेक्टर को मजबूती दी है। कोचीन शिपयार्ड ने 287 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 27 फीसदी अधिक है। गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स का मुनाफा दोगुना होकर 224 करोड़ पहुंच गया। एचएएल का मुनाफा थोड़ा कम हुआ, लेकिन पूरे वर्ष के लिए उसने 10 फीसदी की वृद्धि दर्ज की और 2.5 लाख करोड़ से अधिक का ऑर्डर बुक बनाए रखा है।
बाजार मूल्य 1.5 लाख करोड़ से ज्यादा बढ़ा
ऑपरेशन सिंदूर के बाद दो ही दिनों में भारतीय रक्षा कंपनियों के बाजार मूल्य में 1.5 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा बढ़ गया। इस तेजी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब केवल हथियारों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि एक बड़ा निर्माता और निर्यातक बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह ऑपरेशन भारत के आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र की सच्ची तस्वीर पेश करता है। ऐसे में डिफेंस सेक्टर के चुनिंदा शेयरों में निवेश का सही मौका है। लक्ष्मीश्री की रिसर्च एनालिस्ट टीम ने लंबी अवधि के लिए भारत डायनामिक्स लि., हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स, बीईएल, गार्डन रीच शिप, और मझगांव डॉक जैसे डिफेंस स्टॉक्स खरीदने की सलाह दी है।
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सरकारी के साथ निजी कंपनियों में मौके
सरकार की नीति भी अब इस दिशा में बढ़ चुकी है कि भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने 400 से ज्यादा रक्षा उपकरणों को ऐसी लिस्ट में डाला है, जिन्हें अब विदेश से आयात नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, सरकार ने आईडीईएक्स जैसे प्लेटफॉर्म शुरू किए हैं, जिससे स्टार्टअप्स को नए-नए रक्षा उपकरण बनाने का मौका मिल रहा है। इससे निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों में रक्षा तकनीक पर काम हो रहा है। ये सभी पहल भारत को रक्षा उत्पादन और निर्यात में अगली पंक्ति में लाकर खड़ा कर सकती हैं।
विदेश में भारतीय रक्षा उत्पादों की मांग
हाल के वर्षों में मिस्र, आर्मेनिया, ब्राजील और ओमान जैसे देशों ने रक्षा उत्पाद खरीदने में रुचि दिखाई है। फिलिपीन ने तो पहले ही भारत से ब्रह्मोस मिसाइल की खरीद का करार कर लिया है। इससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में भारत न केवल आत्मनिर्भर होगा, बल्कि रक्षा उपकरणों का बड़ा निर्यातक भी बन सकता है।
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फिलहाल निवेशक डिफेंस स्टॉक्स में जमकर पैसा लगा रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि भारत की डिफेंस इंडस्ट्री में विकास की काफी संभावनाएं है। रक्षा क्षेत्र की प्रमुख सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लि. (एचएएल) की बाजार पूंजी हाल ही में तीन लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है, जिससे यह कंपनी अब लॉर्जकैप स्टॉक्स की कतार में खड़ी हो गई है।
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डिफेंस ईटीएफ भी एक अहम विकल्प
अगर कोई निवेशक रक्षा क्षेत्र में हिस्सा लेना चाहता है लेकिन सीधे किसी कंपनी में निवेश करना नहीं चाहता, तो वह डिफेन्स ईटीएफ के जरिये भी निवेश कर सकता है। इन ईटीएफ में कई प्रमुख डिफेंस कंपनियों के शेयर शामिल होते हैं और ये जोखिम को थोड़ा कम करते हैं। साथ ही, सेक्टर की ग्रोथ का फायदा भी देते हैं।
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कुछ चुनौतियां भी: केवल सरकारी ऑर्डर पर ही निर्भरता
डिफेन्स क्षेत्र में कुछ चुनौतियां भी हैं। अब भी कई कंपनियां केवल सरकारी ऑर्डरों पर निर्भर हैं। अगर सरकार की तरफ से ऑर्डर में देरी होती है या बजट में कटौती होती है, तो इससे इन कंपनियों की कमाई पर असर पड़ सकता है। रक्षा उत्पादों का निर्यात करना आसान नहीं है, क्योंकि इसमें कई प्रक्रियाएं और अनुमति की जरूरत होती है। इसलिए डिफेंस स्टॉक्स में निवेश सोच-समझकर करें।
सही लक्ष्य पर कंपनियों के तिमाही नतीजे
ऑपरेशन के बाद, रक्षा क्षेत्र की कंपनी भारत डायनामिक्स लि., हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लि., पारस डिफेंस और जेन टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियों के शेयरों में उल्लेखनीय तेजी आई। खासतौर पर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स और भारत डायनामिक्स ने निवेशकों का जबरदस्त ध्यान आकर्षित किया।
हाल में घोषित वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही के नतीजों ने भी डिफेंस सेक्टर को मजबूती दी है। कोचीन शिपयार्ड ने 287 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 27 फीसदी अधिक है। गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स का मुनाफा दोगुना होकर 224 करोड़ पहुंच गया। एचएएल का मुनाफा थोड़ा कम हुआ, लेकिन पूरे वर्ष के लिए उसने 10 फीसदी की वृद्धि दर्ज की और 2.5 लाख करोड़ से अधिक का ऑर्डर बुक बनाए रखा है।
बाजार मूल्य 1.5 लाख करोड़ से ज्यादा बढ़ा
ऑपरेशन सिंदूर के बाद दो ही दिनों में भारतीय रक्षा कंपनियों के बाजार मूल्य में 1.5 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा बढ़ गया। इस तेजी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब केवल हथियारों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि एक बड़ा निर्माता और निर्यातक बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह ऑपरेशन भारत के आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र की सच्ची तस्वीर पेश करता है। ऐसे में डिफेंस सेक्टर के चुनिंदा शेयरों में निवेश का सही मौका है। लक्ष्मीश्री की रिसर्च एनालिस्ट टीम ने लंबी अवधि के लिए भारत डायनामिक्स लि., हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स, बीईएल, गार्डन रीच शिप, और मझगांव डॉक जैसे डिफेंस स्टॉक्स खरीदने की सलाह दी है।
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सरकारी के साथ निजी कंपनियों में मौके
सरकार की नीति भी अब इस दिशा में बढ़ चुकी है कि भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने 400 से ज्यादा रक्षा उपकरणों को ऐसी लिस्ट में डाला है, जिन्हें अब विदेश से आयात नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, सरकार ने आईडीईएक्स जैसे प्लेटफॉर्म शुरू किए हैं, जिससे स्टार्टअप्स को नए-नए रक्षा उपकरण बनाने का मौका मिल रहा है। इससे निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों में रक्षा तकनीक पर काम हो रहा है। ये सभी पहल भारत को रक्षा उत्पादन और निर्यात में अगली पंक्ति में लाकर खड़ा कर सकती हैं।
विदेश में भारतीय रक्षा उत्पादों की मांग
हाल के वर्षों में मिस्र, आर्मेनिया, ब्राजील और ओमान जैसे देशों ने रक्षा उत्पाद खरीदने में रुचि दिखाई है। फिलिपीन ने तो पहले ही भारत से ब्रह्मोस मिसाइल की खरीद का करार कर लिया है। इससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में भारत न केवल आत्मनिर्भर होगा, बल्कि रक्षा उपकरणों का बड़ा निर्यातक भी बन सकता है।