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Adani: 'सभी लेनदेन वैध, सुप्रीम कोर्ट ने भी हमारे पक्ष में फैसला दिया', OCCRP के दावों को अदाणी समूह का जवाब

Thu, 31 Aug 2023 11:46 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 31 Aug 2023 11:46 AM IST
सार

Adani: ओसीसीआरपी की ओर से किए गए दावे एक दशक पहले के बंद हो चुके मामलों पर आधारित हैं जब राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने अधिक चालान, विदेश में धन हस्तांतरण, संबंधित पार्टी लेनदेन और एफपीआई के माध्यम से निवेश के आरोपों की जांच की थी।

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Adani: 'All transactions legal, Supreme Court also ruled in our favour', Adani Group's reply to OCCRP's claims
अदाणी समूह के मुखिया गौतम अदाणी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अदाणी समूह में निवेश पर ओसीसीआरपी (Organised Crime and Corruption Reporting Project) को ओर से किए गए दावों को कंपनी ने बयान जारी कर सिरे नकार दिया है। कंपनी की ओर से कहा गया है कि हम बार-बार लगाए जा रहे इन आरोपों को स्पष्ट रूप से अस्वीकार करते हैं। ये समाचार रिपोर्टें योग्यताहीन हिंडनबर्ग रिपोर्ट को फिर से हवा देने के लिए सोरोस से वित्त पोषित विदेशी मीडिया के एक वर्ग की ओर से जानबूझकर प्रकाशित की गई है। वास्तव में यह पहले से ही प्रत्याशित था। पिछले सप्ताह मीडिया रिपोर्ट्स में भी इसके दावे किए गए थे। 

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अदाणी ग्रुप का पलटवार- आरोपों की कोई प्रासंगिकता या आधार नहीं

ओसीसीआरपी की ओर से किए गए दावे एक दशक पहले के बंद हो चुके मामलों पर आधारित हैं जब राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने अधिक चालान, विदेश में धन हस्तांतरण, संबंधित पार्टी लेनदेन और एफपीआई के माध्यम से निवेश के आरोपों की जांच की थी। एक स्वतंत्र निर्णायक प्राधिकारी और एक अपीलीय न्यायाधिकरण दोनों ने इसकी पुष्टि की थी कि कोई अधिक मूल्यांकन नहीं किया गया था और लेनदेन लागू कानूनी रूप से वैध थे। मार्च 2023 में मामला अंतिम पड़ाव पर पहुंचा था जब भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने हमारे पक्ष में फैसला सुनाया। स्पष्ट रूप से, चूंकि कोई अधिक मूल्यांकन नहीं था, इसलिए धन के हस्तांतरण पर इन आरोपों की कोई प्रासंगिकता या आधार नहीं है।

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अदाणी समूह का दावा- कीमतों में हेरफेर के कोई सबूत नहीं

समूह ने कहा, "ये एफपीआई पहले से ही भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की जांच का हिस्सा हैं। माननीय सर्वोच्च न्यायालय की ओर से नियुक्त विशेषज्ञ समिति के अनुसार, न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (एमपीएस) आवश्यकताओं के उल्लंघन या स्टॉक की कीमतों में हेरफेर का कोई सबूत नहीं है।"

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ग्रुप ने कहा- इन आरोपों का उद्देश्य स्टॉक की कीमतों को गिराकर मुनाफा कमाना

अदाणी समूह ने अपने बयान में कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इन प्रकाशनों ने, जिन्होंने हमें प्रश्न भेजे थे, हमारी प्रतिक्रिया को पूरी तरह से प्रकाशित नहीं किया। इन प्रयासों का उद्देश्य, अन्य बातों के साथ-साथ, हमारे स्टॉक की कीमतों को गिराकर मुनाफा कमाना है और इन शॉर्ट सेलरों की विभिन्न अधिकारियों की ओर से जांच की जा रही है। चूंकि माननीय सर्वोच्च न्यायालय और सेबी इन मामलों की निगरानी कर रहे हैं, इसलिए चल रही नियामक प्रक्रिया का सम्मान करना महत्वपूर्ण है।

समूह ने कहा- हमें कानून पर पूरा भरोसा

हमें कानून की उचित प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है और हम अपने खुलासों की गुणवत्ता और कॉरपोरेट प्रशासन मानकों के प्रति आश्वस्त हैं। इन तथ्यों के आलोक में, इन समाचार रिपोर्टों का समय संदिग्ध, शरारतपूर्ण और दुर्भावनापूर्ण है और हम इन रिपोर्टों को पूरी तरह से खारिज करते हैं।

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