दिल्ली विधासभा चुनावः 170 करोड़ रुपये केवल विज्ञापनों पर खर्च होने का अनुमान
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आठ फरवरी को दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सभी पार्टियां केवल विज्ञापनों पर 170 करोड़ रुपये खर्च कर देंगी। इस खर्च में सोशल मीडिया पर किया जाने वाला खर्च शामिल भी है। भाजपा, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस इस चुनाव में मुख्य तौर पर मैदान में है।
सबसे ज्यादा रहेगा डिजिटल पर फोकस
विज्ञापन एजेंसियों के मुताबिक इस बार पार्टियों का सबसे ज्यादा फोकस सोशल मीडिया पर रहेगा। हालांकि पार्टियां प्रिंट और आउट ऑफ होम जैसे पारंपरिक प्रचार माध्यमों पर भी खर्च करेंगे। हालांकि आप और भाजपा बड़ी कंपनियों के बजाए कई छोटी कंपनियों के जरिए अपना प्रचार करेगी। इसके अलावा पार्टियों के प्रचार विभाग भी इस तरह के विज्ञापन खुद भी तैयार करेंगे।
इन पर रहेगा फोकस
राजनीतिक विज्ञापनों के खर्च पर लगाम के कारण सभी दल इनडायरेक्ट तरीकों का इस्तेमाल करके ट्विटर, व्हाट्सएप समूह, फेसबुक ब्लॉग, टिकटॉक और अन्य माध्यमों पर विज्ञापन देंगे। कंपनियों का कहना है कि इस तरह के विज्ञापनों को आसानी से ट्रेक नहीं किया जा सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि पेमेंट किसी कंपनी के बजाए एक व्यक्ति को जाता है, जो इनको पोस्ट या फिर ट्रेंड कराता है।
पहले के चुनावों में पार्टियां एक बड़ी विज्ञापन कंपनी को नियुक्त करती थीं, जो उनके सभी प्रचार माध्यमों के लिए विज्ञापन तैयार करती थी। लेकिन अब कम्यूनिकेशन चैनल्स का दायरा बढ़ने के कारण कई कंपनियों की सेवाएं ली जाएंगी।
आप ने खर्च किए चार साल में 78 करोड़ रुपये
आम आदमी पार्टी ने पिछले चार साल में केवल विज्ञापनों पर 78 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। वहीं पिछली तिमाही में अकेले फेसबुक पर दिल्ली के राजनीतिक दलों ने 74.88 लाख रुपये खर्च किए थे।