Budget 2023: जीएसटी पर कोई राहत न मिलने से व्यापारी निराश, ई-कॉमर्स पर लगाम न लगने से नाराजगी
Budget 2023: व्यापारी संगठन कैट के नेता प्रवीण खंडेलवाल ने अमर उजाला से कहा कि GST और ऑनलाइन व्यापार पर कोई राहत न मिलने से देश के करोड़ों व्यापारियों को निराशा हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार को व्यापारियों को बचाने की कोशिश करनी चाहिए थी...
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केंद्रीय बजट 2023-24 में व्यापारियों को जीएसटी से राहत देने की कोई कोशिश नहीं की गई। इससे व्यापारियों में निराशा है। देश के खुदरा छोटे व्यापारियों की लंबे समय से मांग थी कि उन्हें बहुराष्ट्रीय ई-कॉमर्स कंपनियों के ऑनलाइन बाजार के नकारात्मक असर से बचाने के लिए उचित नीतियां बनाई जाएं। लेकिन केंद्र सरकार ने ऑनलाईन बाजार को नियंत्रित करने में कोई रुचि नहीं दिखाई है, इससे छोटे व्यापारियों में बजट को लेकर निराशा है। सरकार ने टैक्स स्लैब में बढ़ोतरी कर आम उपभोक्ताओं की जेब में ज्यादा पैसा छोड़कर मांग में बढ़ोतरी का रास्ता बनाने की कोशिश की है। इसे लेकर व्यापारियों ने सकारात्मक रुख दिखाया है।
केंद्र सरकार ने दावा किया था कि देश में कई टैक्स दरों को हटाकर एक स्तरीय जीएसटी (GST) सिस्टम लागू करने से टैक्स अदायगी में लोगों को राहत मिलेगी। इससे व्यापारियों को कई स्तरों पर अलग-अलग टैक्स भरने की परेशानी से भी बचाया जा सकेगा। लेकिन व्यापारियों का कहना है कि यह नया सिस्टम उनके लिए ज्यादा परेशानी देने वाला साबित हुआ है। व्यापार जगत इस सिस्टम में बदलाव की मांग कर रहा था। लेकिन वर्तमान बजट में सरकार ने व्यापारियों को इससे कोई राहत देने का संकेत नहीं दिया है।
छोटे व्यापारियों का बचाव नहीं
देश का छोटा व्यापारी और दुकानदार अप्रत्यक्ष रूप से देश की अर्थव्यवस्था में भारी योगदान देता है। दावा है कि वह लगभग 11 करोड़ छोटे उपक्रमों के माध्यम से लगभग 44 करोड़ लोगों को रोजगार और आजीविका उपलब्ध कराता है। लेकिन बहुराष्ट्रीय कंपनियों की भारी भरकम पूंजी और आक्रामक व्यापार रणनीति से इस वर्ग के व्यापार को भारी चोट लगी है। व्यापारियों की मांग है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां बेतरतीब ढंग से छूट की घोषणा कर उनका व्यापार झटक ले रही हैं। व्यापारी नियमों में बदलाव के माध्यम से इस असंगति को दूर करने की मांग कर रहे थे, लेकिन फिलहाल सरकार ने इस तरह की कोई राहत देने की ओर सकारात्मक रुख नहीं दिखाया है।
मांग बढ़ने से खुशी
व्यापारी संगठन कैट के नेता प्रवीण खंडेलवाल ने अमर उजाला से कहा कि GST और ऑनलाइन व्यापार पर कोई राहत न मिलने से देश के करोड़ों व्यापारियों को निराशा हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार को व्यापारियों को बचाने की कोशिश करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने टैक्स स्लैब में छूट देकर लोगों की जेब में ज्यादा पैसा छोड़ने की रणनीति अपनाई है। इससे लोगों के पास खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा रहेगा। इससे मांग में बढ़ोतरी होगी और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि यह बजट प्रगतिशील बजट दस्तावेज है, जो सुनियोजित तरीके से भविष्य में प्रत्येक क्षेत्र के विकास के मापदंड को बताता है, वहीं व्यापार एवं लघु उद्योग के चरणबद्ध विकास, स्वास्थ्य क्षेत्र और अन्य सेवाओं में मजबूत विकास के पैरामीटर्स को रेखांकित करता है। कुल मिला कर हम इसे एक संपूर्ण विकासशील बजट कह सकते हैं।
व्यापारी नेताओं ने कहा कि आय कर के पांच स्लैब बनाना तथा नई कर ढांचे में व्यक्तिगत आय कर छूट को 7 लाख करना वित्त मंत्री का साहसिक कदम है। बजट में लोगों को उद्यमी की ओर प्रोत्साहित करना भी एक बड़ा कदम है। वहीं डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दिया जाना और अनेक वस्तुओं पर कस्टम ड्यूटी को घटाना प्रशंसनीय है।