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ब्रेग्जिट से आईटी-फार्मा क्षेत्र को नुकसान, कई फायदे भी

Sat, 26 Dec 2020 05:53 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 26 Dec 2020 05:53 AM IST
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Brexit may harm India IT pharma sector and many benefits
सांकेतिक तस्वीर

भारत पर असर...यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ 45 साल पुराने संबंधों को तोड़कर ब्रिटेन बाहर आने की तैयारी में है। दुनिया की 6वीं बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश मेें होने वाली इस राजनीतिक और व्यापारिक घटना का असर भारत पर भी पड़ेगा।

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बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन के ईयू से अलग होने (ब्रेग्जिट) का भारत को फौरी तौर पर कई क्षेत्रों में नुकसान उठाना पड़ेगा, लेकिन भविष्य में बड़ा लाभ होने की संभावना है। ब्यूरो
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180 अरब डॉलर के आईटी क्षेत्र पर असर
आईटी उद्योग संगठन नासकॉम ने अनुमान जताया है कि ब्रिटेन अगर यूरोपीय संघ से बाहर आता है, तो भारत के 108 अरब डॉलर के आईटी उद्योग पर गहरा असर पड़ेगा। ब्रिटेन सहित अन्य यूरोपीय देशों में आईटी उत्पादों का 25 फीसदी हिस्सा निर्यात किया जाता है।
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भारतीय अर्थव्यवस्था में हर साल 180 अरब डॉलर का राजस्व सिर्फ आईटी उद्योग क्षेत्र से आता है। इसमें भी 70-80 फीसदी हिस्सेदारी निर्यात की होती है। 2019-20 में भारत को आईटी उत्पादों व सेवाओं के निर्यात से 147 अरब डॉलर का राजस्व मिलने की उम्मीद है।

नासकॉम का कहना है कि ब्रेग्जिट की घटना यूरोपीय देशों के साथ भारत के इस निर्यात पर असर डाल सकती है। आईटी के अलावा फार्मा और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के उत्पाद निर्यात पर भी असर पड़ सकता है। 

भारतीय कंपनियां छोड़ सकती हैं ब्रिटेन 
टाटा समूह की जगुआर लैंडरोअर सहित 800 से ज्यादा भारतीय कंपनियों ने ब्रिटेन में अपनी विनिर्माण इकाई लगा रखी है। इन कंपनियों में 1.10 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार भी मिला है। इनमेें से ज्यादातर कंपनियों ने यूरोपीय संघ के बड़े बाजार को ध्यान में रखकर निवेश किया है।

ब्रिटेन के संघ से बाहर निकलने पर उनके लिए बाजार के मौके कम हो सकते हैं। इसके अलावा इन कंपनियों के सभी सौदे और लेनदेन भी पाउंड के आधार पर होते हैं। ब्रेग्जिट से ब्रिटिश मुद्रा के मूल्यांकन में गिरावट आएगी और इन कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में कई भारतीय कंपनियां ब्रिटेन से बाहर निकलने का रास्ता तलाश सकती हैं। 

रुपया, शेयर और सोेने पर भी दबाव
भारत के लिए ब्रिटेन एफडीआई का तीसरा सबसे बड़ा स्रोत है। ब्रेग्जिट के बाद विदेशी निवेशक बाजार से पूंजी निकाल सकते हैं, जिसका असर स्टॉक और डॉलर पर दिखेगा। विदेशी मुद्रा के बाहर जाने और डॉलर मजबूत होने से भारतीय मुद्रा दबाव में आ जाएगी।

2016 में ब्रेग्जिट की चर्चा शुरू होने के बाद डॉलर के मुकाबले रुपये में 20 फीसदी गिरावट आई थी। इस बार भी ऐसा हुआ तो आयात का बोझ बढ़ सकता है, क्योंकि वैश्विक व्यापार के सौदे डॉलर में होते हैं। एफपीआई के पूंजी बाजार से निकलने पर शेयरों में भी गिरावट आ सकती है। निवेशक फिर सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ेंगे और सोेने की कीमतों में उछाल आएगा।

ईंधन और इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद हो सकते हैं महंगे
रुपये में गिरावट से आयात बिल पर बोझ बढ़ता है, तो घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम भी बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के आयात बिल में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी कच्चे तेल की होती है। इसके अलावा ब्रिटेन से आने वाले इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद व यूरोप से आयातित दवाईयों की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है। 

इन क्षेत्रोें में ब्रिटेन के साथ मजबूत हो सकते हैं रिश्ते

  • यूरोपीय संघ से बाहर आने के बाद ब्रिटेन को बड़े व्यापारिक रिश्तों की तलाश होगी और भारत उसके लिए नया बाजार बन सकता है। अभी भारत के लिए ब्रिटेन 12वां बड़ा व्यापारिक साझेदार देश है।
  • भारतीय उत्पादों का निर्यात ब्रिटेन के जरिये ग्रीस और पुर्तगाल जैसे बड़े यूरोपीय देशों तक आसानी से पहुंच सकता है। 
  • पाउंड की कीमत घटने से भारतीय कंपनियां ब्रिटेन में सस्ते सौदों के साथ अधिग्रहण और विस्तार कर सकेंगी।
  • ब्रेग्जिट के बाद ब्रिटेन द्विपक्षीय सौदा करने के लिए स्वतंत्र होगा और तकनीक, साइबर सुरक्षा, रक्षा और वित्त क्षेत्र में भारत के लिए नए अवसर खुलेंगे। 
  • पाउंड में गिरावट से ब्रिटेन से आयात सस्ता होगा और भारतीय छात्रों के लिए वहां पढ़ना और रहना आसान हो जाएगा
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