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Hindi News ›   Business ›   Bonus ›   Tata Sons story 55000 crore earnings 28000 crore losses balance sheet raises concerns amid listing pressure

टाटा संस की असली कहानी: 55,000 करोड़ कमाई, 28,000 करोड़ का घाटा, लिस्टिंग दबाव के बीच बैलेंस शीट ने बढ़ाई चिंता

Tue, 22 Sep 2026 08:32 AM IST
द बोनस बोनस डेस्क, नई दिल्ली।
बोनस डेस्क, नई दिल्ली। Published by: द बोनस Updated Tue, 22 Sep 2026 08:32 AM IST
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Tata Sons story 55000 crore earnings 28000 crore losses balance sheet raises concerns amid listing pressure
टाटा संस वित्तीय और आंतरिक मोर्चे पर भारी उठापटक से जूझ रहा। - फोटो : amarujala.com (AI Assisted)

टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के लिए वित्त वर्ष 2025-26 वित्तीय और आंतरिक मोर्चे पर भारी उठापटक वाला रहा है। कंपनी द्वारा जारी वार्षिक रिपोर्ट के आंकड़ों से चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। एक तरफ जहां सूचीबद्ध कंपनियों और मजबूत ब्रांड-फीस के दम पर टाटा संस ने किसी तरह अपना संतुलन बनाए रखा, वहीं गैर-सूचीबद्ध सहायक कंपनियों का बढ़ता घाटा होल्डिंग कंपनी पर भारी पड़ता नजर आ रहा है।

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टाटा समूह की 16 प्रमुख गैर-सूचीबद्ध कंपनियों में से सात ने वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 31,823 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया। यह एक साल पहले के 17,553 करोड़ के मुकाबले 81% अधिक है।  गैर-सूचीबद्ध कंपनियों के इस भारी-भरकम घाटे का सीधा असर टाटा संस के समेकित मुनाफे पर पड़ा है। लाभ कमाने वाली कंपनियों को समायोजित करने के बाद भी पूरे पोर्टफोलियो का शुद्ध घाटा 27,854 करोड़ रहा।  
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टाटा के लिए राहत की बात यह है कि पांच प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों ने कुल 55,061 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया। टीसीएस और टाटा कैपिटल जैसी सूचीबद्ध कंपनियों तथा टाटा मोटर्स, टाटा स्टील व टाइटन से मिलने वाले डिविडेंड के कारण टाटा संस की साख बची रही। टाटा मोटर्स जगुआर लैंड रोवर में साइबर हमले के कारण नुकसान में रहा, जबकि अन्य कंपनियों ने लाभ दर्ज किया।
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घाटे में टाटा संस की कंपनियां

कंपनी राजस्व शुद्ध घाटा
एअर इंडिया 71,870 -22,238
टाटा डिजिटल 35,990 -4,974
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स 1,310,82 -1,611
एग्रेटास 45 -1,101
टाटा प्रोजेक्ट्स 16,623 -891
टाटा प्ले 3,546 -552
टाटा रियल्टी 1,620 -456

फायदे में रहने वाली कंपनियां

कंपनी शुद्ध लाभ
सूचीबद्ध कंपनियां 55,061
टीसीएस 59,588
टाइटन कंपनी 4,535
टाटा स्टील 3,174
टाटा कंज्यूमर 1,577

स्रोत: टाटा संस की वित्त वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट (सभी आंकड़े करोड़ रुपये में )

सबसे बड़ा बोझ बनी एअर इंडिया 

समूह के लिए सबसे बड़े निवेश और घाटे का केंद्र  एअर इंडिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में इसका घाटा बढ़कर 22,238 करोड़ पहुंच गया, जो पहले के दोगुने से भी अधिक है। 
  • दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान कंपनी की आय में 9% की गिरावट भी दर्ज हुई। टाटा समूह के अन्य बड़े दांव भी फिलहाल मुनाफे से दूर हैं। 
  • टाटा डिजिटल को वित्त वर्ष 2025 -26 में 4,974 करोड़ का घाटा हुआ। टेक कंपनी एपल के लिए कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग करने वाली टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स को 1,611 करोड़ का नुकसान हुआ, जबकि उसकी आय लगभग दोगुनी होकर 1.31 लाख करोड़ रुपये हो गई।

टाटा संस के वैल्यूएशन पर विवाद 

टाटा संस की संभावित लिस्टिंग को लेकर अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह बन गया है कि निवेशक कंपनी का मूल्यांकन किस आधार पर करेंगे। कंपनी का एकीकृत मुनाफा वित्त वर्ष 2025-26 में 22% बढ़कर 31,961 करोड़ रुपये पहुंच गया। इसमें टाटा कैपिटल आईपीओ से जुड़े लाभ और ब्रांड शुल्क आय का योगदान रहा। 
  • समेकित स्तर (एक साथ सभी कंपनियां शामिल) पर यह तस्वीर अलग है। निजी कारोबारों के घाटे के कारण समूह का समेकित लाभ 38% गिरकर 17,923 करोड़ रुपये रह गया, जो तीन वर्षों का निचला स्तर है।
  • अगर टाटा संस का मूल्यांकन 10 लाख करोड़ माना जाए तो यह एकीकृत कमाई के आधार पर करीब 31 गुना और समेकित कमाई के आधार पर करीब 56 गुना बैठता है। यही कारण है कि बाजार में होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट से ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि अब किस कमाई को आधार माना जाए।

नोएल बनाम चंद्रा : लिस्टिंग मुद्दे पर दो खेमे में बंटा ग्रुप 

नोएल टाटा और उनके समर्थकों का कहना है कि एअर इंडिया, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कारोबार भले ही करोड़ों का घाटा दिखा रहे हैं, लेकिन भविष्य में ये समूह के नए विकास इंजन बन सकते हैं। nचंद्रशेखरन खेमे का तर्क है कि इन कारोबारों का निवेश भविष्य की कमाई और मूल्य सृजन की नींव रख रहा है। हालांकि लिस्टिंग के बाद निवेशक इन घाटों को कितने धैर्य से स्वीकार करेंगे, यह बड़ा सवाल बना रहेगा।


संपत्ति बनाने में अडाणी समूह का दबदबा : सबसे तेज रिटर्न देने में अडाणी समूह की कंपनियां आगे निकल गईं। इकिगाई एसेट मैनेजर के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों में निवेशकों की संपत्ति में सबसे बड़ा इजाफा रिलायंस इंडस्ट्रीज ने किया। अडाणी इंटरप्राइजेस सबसे तेज पैसा बनाने वाली रही। इसका पूंजीकरण 10 वर्षों में 44.8% चक्रवृद्धि दर से बढ़ा।

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