सही रिस्क प्रोफाइल पर रखें नींव: अपने निवेश का खुद लें इम्तिहान...साल में दो बार रिव्यू करना क्यों जरूरी?
पैसा कमाना जितना कठिन है, उसे सही दिशा में सुरक्षित रखना उससे भी बड़ी कला है। जिस तरह बिना प्लानिंग के की गई यात्रा रास्ते से भटका सकती है, ठीक वैसे ही बिना नियमित समीक्षा के आपका निवेश भी आपके वित्तीय लक्ष्यों से दूर हो सकता है। जब आप किसी लंबी यात्रा पर निकलते हैं, तो क्या आप सिर्फ बैग पैक करके किसी भी गाड़ी में बैठ जाते हैं? बिल्कुल नहीं!
विस्तार
आप पहले मंजिल तय करते हैं, टिकट बुक करते हैं और रास्ते में भी लगातार यह जांचते रहते हैं कि आप सही दिशा में जा रहे हैं या नहीं। लेकिन जब बात हमारी गाढ़ी कमाई और निवेश की आती है, तो अक्सर हम पोर्टफोलियो बनाकर उसे भगवान भरोसे छोड़ देते हैं। पोर्टफोलियो भी कुछ अलग नहीं है। यह सिर्फ वह वाहन है, जो आपको आपकी मंजिल तक ले जाता है।
जिंदगी में कई लक्ष्य हो सकते हैं- जैसे एक मंजिल तक पहुंचने के बाद आपकी कई और मंजिलें हो सकती हैं, या अलग-अलग वर्षों में अलग-अलग मंजिलें, जिनकी योजना पहले से बनाई गई हो।
एक बार यात्रा शुरू होने के बाद, आपको लगातार यह जांचते रहना होता है, क्या मैं सही बस, ट्रेन या प्लेन में हूं?
- क्या मैं तय समय-सारणी पर हूं? अगर नहीं, तो आप रास्ता सुधारते हैं- और निवेश में पोर्टफोलियो रिव्यू ठीक यही काम करता है।
साल में दो बार रिव्यू क्यों जरूरी?
- साल में कम से कम दो बार-यानी हर छह महीने में पोर्टफोलियो का रिव्यू करना जरूरी होता है। चाहे वह कैलेंडर वर्ष के हिसाब से हो या वित्तीय वर्ष के हिसाब से।
अब सवाल है, दो बार ही क्यों, ज्यादा या कम क्यों नहीं?
- क्योंकि आप यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि आप चुपचाप ऐसे रास्ते पर तो नहीं भटक गए, जहां आप जाना ही नहीं चाहते थे। रिव्यू आपको यह मौका देता है कि आप इसे जल्दी पकड़ लें और रास्ता सुधार लें ताकि अपने लक्ष्य से न भटकें।
रिसर्च क्या कहती है?
- वैनगार्ड की लंबे समय से चली आ रही एडवाइजर्स अल्फा रिसर्च इस मामले में एक उपयोगी आंकड़ा देती है। 1960 से 2017 तक 60% इक्विटी और 40% डेट वाले एक पोर्टफोलियो के अध्ययन में, हर साल रीबैलेंस किए गए पोर्टफोलियो का रिटर्न बिना रीबैलेंस वाले पोर्टफोलियो के मुकाबले थोड़ा कम रहा (9.05% बनाम 9.45%)- लेकिन इसका जोखिम काफी कम था (11.09% बनाम 13.76% स्टैंडर्ड डेविएशन)।
- वैनगार्ड की व्यापक रिसर्च यह भी बताती है कि अनुशासित और नियमित रिव्यू एक व्यावहारिक सुरक्षा-कवच का काम करता है।
- यह निवेशकों को उतार-चढ़ाव के दौर में जल्दबाजी और गलत समय पर लिए गए फैसलों से बचाता है, जो अक्सर रिटर्न को नुकसान पहुंचाते हैं।
- इसका निष्कर्ष यह नहीं है कि रिव्यू करने से रिटर्न ज्यादा मिलने की गारंटी है, बल्कि यह है कि नियमित रिव्यू मुख्य रूप से एक जोखिम-नियंत्रण और अनुशासन का साधन है।
यह आपके पोर्टफोलियो के जोखिम स्तर को वहीं बनाए रखता है, जहां आपने तय किया था, और आपको दो रिव्यू के बीच भावनाओं में बहकर फैसले लेने से रोकता है।
रिव्यू कब करना चाहिए?
इसके लिए कैलेंडर पर कोई सही तारीख तय नहीं है। ज्यादा जरूरी यह है कि आप इस आदत को किसी ऐसी घटना से जोड़ दें जो आपको स्वाभाविक रूप से याद रहे। सही तारीख से ज्यादा जरूरी है कि आपके मन में एक भरोसेमंद घंटी बजे, जो याद दिलाए कि अब रिव्यू करने का समय आ गया है।
पोर्टफोलियो रिव्यू चेकलिस्ट
| चरण | क्या जांचें? | उद्देश्य |
|---|---|---|
| लक्ष्य | क्या निवेश तय वित्तीय लक्ष्यों के अनुकूल है? | सही दिशा और समय पर फंड की उपलब्धता सुनिश्चित करना। |
| एसेट एलोकेशन | इक्विटी, डेट और गोल्ड का अनुपात क्या है? | जोखिम को नियंत्रित रखना और अति-जोखिम से बचना। |
| परफॉर्मेंस | फंड/स्टॉक अपने बेंचमार्क से कितना आगे या पीछे है? | कमजोर निवेश को बाहर कर बेहतर विकल्प चुनना। |
| रीबैलेंसिंग | क्या अनुपात बिगड़ने पर बदलाव किया गया है? | बाजार के उतार-चढ़ाव में अनुशासित रहना। |
सही रिस्क प्रोफाइल पर रखें नींव
अपने ऊपर सीधे तौर पर एक सामान्य नियम लागू न करें। कोई भी रणनीति तभी वांछित परिणाम देती है, जब इसकी नींव एक सही रिस्क प्रोफाइल पर रखी गई हो। अगर आपने अभी तक अपने लक्ष्य स्पष्ट रूप से तय नहीं किए हैं और आपका रिस्क प्रोफाइल तय नहीं हुआ है, तो यही सही शुरुआती बिंदु है, किसी रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर या म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर से बातचीत करें।पहले लक्ष्य, फिर एसेट एलोकेशन
यह क्रम मायने रखता है, और इसे उल्टा समझ लेना आसान है। पहले अपने लक्ष्य तय करें, और उसके बाद ही एसेट एलोकेशन तय करें।- पोर्टफोलियो बनाते समय, जितनी कम अवधि होगी, इक्विटी का हिस्सा उतना ही कम और डेट का हिस्सा उतना ही ज्यादा रखा जाता है।
- जैसे-जैसे निवेश अवधि लंबी होती जाती है, इक्विटी का हिस्सा आमतौर पर बढ़ता जाता है।
- गोल्ड को आमतौर पर पोर्टफोलियो में एक सहायक भूमिका में रखा जाता है, न कि प्रमुख भूमिका में।