फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Bonus ›   If you have insurance donot worry about loans get money against surrender value of policy not on sum assured

बीमा है, तो न हों कर्ज के लिए परेशान: पॉलिसी के बदले सम इंश्योर्ड नहीं, सरेंडर वैल्यू पर आसानी से मिलता है लोन

Mon, 07 Sep 2026 10:20 AM IST
द बोनस निशा संघवी (डायरेक्टर, प्रोमोर फिनटेक)
निशा संघवी (डायरेक्टर, प्रोमोर फिनटेक) Published by: द बोनस Updated Mon, 07 Sep 2026 10:20 AM IST
विज्ञापन
If you have insurance donot worry about loans get money against surrender value of policy not on sum assured
बीमा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : amar ujala

कानपुर के कपड़ा कारोबारी शिशिर गुप्ता के न सामने पिछले महीने अचानक संकट खड़ा हो गया। शिशिर तुरंत उस बैंक में पहुंचे जहां उनका वर्षों पुराना करंट अकाउंट था। पूरा भरोसा था पर्सनल लोन मिल जाएगा। लेकिन सिबिल स्कोर 640 होने पर बैंक ने हाथ खड़े कर दिए।

विज्ञापन
  • दूसरे गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान भारी-भरकम ब्याज और ऊंची प्रोसेसिंग फीस पर लोन की पेशकश कर रहे थे।

हताश होकर शिशिर अपने सीए के पास पहुंचे। सीए ने एलआईसी पॉलिसी के बदले कर्ज लेने की सलाह दी। बिना किसी सिबिल जांच और बिना किसी ईएमआई दबाव के, वो भी सामान्य ब्याज पर 48 घंटे के भीतर शिशिर के खाते में पैसे आ गए और उनका बीमा कवर भी सुरक्षित था।

विज्ञापन


कैसे काम करता है पॉलिसी लोन ?
शिशिर जैसी स्थिति देश के लाखों मध्यमवर्गीय परिवारों की होती है। अधिकांश भारतीय अपनी जीवन बीमा पॉलिसी को केवल एक भावनात्मक निवेश मानते हैं, यह सोचकर कि इसका फायदा उनके जाने के बाद ही परिवार को मिलेगा। लेकिन सच्चाई यह है कि पॉलिसी चालू रहते हुए भी यह आपकी नकदी की तात्कालिक जरूरतों को पूरा कर सकती है। बीमा कंपनी या बैंक आपकी पॉलिसी के कुल सम इंश्योर्ड (बीमा कवर) पर नहीं, बल्कि उसकी सरेंडर वैल्यू के आधार पर कर्ज देते हैं। इसमें पॉलिसी सरेंडर नहीं होती, बल्कि केवल गारंटी के तौर पर गिरवी रखी जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

पर्सनल लोन और पॉलिसी लोन में कितना अंतर?
पैमाना असुरक्षित पर्सनल लोन जीवन बीमा पॉलिसी पर लोन
ब्याज दर 12 से 18% (या उससे भी अधिक) कंपनियों से 9 से 10%, बैंकों से 10-15%
सिबिल / क्रेडिट जांच अनिवार्य, खराब स्कोर पर लोन खारिज शून्य क्रेडिट जांच, कोई सिबिल स्कोर नहीं देखा जाता
ईएमआई का दबाव हर महीने तय तारीख पर अनिवार्य ईएमआई कोई फिक्स्ड ईएमआई नहीं, ब्याज कभी भी चुकाने की छूट
कागजी कार्रवाई आय प्रमाण, बैंक स्टेटमेंट और लंबी प्रक्रिया न्यूनतम औपचारिकताएं, तुरंत और आसान डिस्बर्सल
क्या हर पॉलिसी पर लोन मिलता है?
नहीं, शुद्ध सुरक्षा वाले टर्म इंश्योरेंस में कोई सरेंडर वैल्यू नहीं होती, इसलिए इस पर कर्ज नहीं मिलता। कर्ज केवल उन पॉलिसियों पर मिलता है जिनमें बचत का हिस्सा जुड़ा हो, जैसे एंडोमेंट, मनी-बैक, होल लाइफ प्लान और चुनिंदा यूलिप। एलआईसी में आमतौर पर कम से कम तीन साल (सिंगल प्रीमियम में एक साल) प्रीमियम भरने के बाद यह सुविधा मिलती है। चालू पॉलिसी पर सरेंडर वैल्यू का 90% तक और पेड-अप पॉलिसी पर करीब 85% तक का कर्ज आसानी से मिल जाता है।

  • उदाहरण के लिए मान लीजिए आपकी एलआईसी एंडोमेंट पॉलिसी की सरेंडर वैल्यू 4 लाख रुपये है। एलआईसी आमतौर पर चालू पॉलिसी पर इसका 90% तक, यानी लगभग 3,60,000 रुपये तक लोन देती है।

जानना जरूरी है: कब लें यह कर्ज?
जब आपको 6 महीने से 1 साल के लिए तात्कालिक नकदी चाहिए और आप ऐसी पॉलिसी को मैच्योरिटी के करीब पहुंचकर तोड़ना नहीं चाहते, जिस पर अच्छा बोनस जुड़ रहा हो। यह 15-18% वाले महंगे क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन को टालने का सबसे कारगर साधन है।

  • इसे कभी भी लंबी अवधि की उधारी न बनाएं। पारंपरिक एंडोमेंट पॉलिसियों का वास्तविक सालाना रिटर्न महज 5 से 6 फीसदी होता है, जबकि आप उसी पैसे पर 9 से 10 फीसदी ब्याज चुका रहे होते हैं। यदि आप लंबे समय तक मूलधन और ब्याज नहीं चुकाते, तो चक्रवृद्धि ब्याज आपकी पूरी मैच्योरिटी वैल्यू को खत्म कर देगा।

इन 4 जोखिमों पर रखें पैनी नजर

  1. यदि आप सालाना ब्याज भी नहीं चुकाते, तो वह मूलधन में जुड़ जाता है और उस पर भी व्याज लगना शुरू हो जाता है। इससे बिना अतिरिक्त पैसे निकाले भी लोन बढ़त्ता चला जाता है।
  2. यदि बकाया कर्ज और ब्याज की रकम बढ़कर पॉलिसी की सरेंडर वैल्यू के बराबर पहुंच गई, तो बीमा कंपनी तुरंत पॉलिसी जब्त कर लेगी और आपका लाइफ कवर वहीं खत्म हो जाएगा।
  3. लोन अवधि के दौरान यदि पॉलिसीधारक के साथ कोई अनहोनी हो जाती है, तो बीमा कंपनी परिवार को पूरा क्लेम नहीं देगी। पहले बकाया लोन और ब्याज काटा जाएगा, बाकी बची रकम ही आश्रितों को मिलेगी।
  4. कर्ज लेने से पहले बैंक के ओवरड्राफ्ट या गोल्ड लोन की दरों से तुलना कर लें। कई बार गोल्ड लोन की दरें पॉलिसी लोन से भी सस्ती मिल जाती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed