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भारत-ब्रिटेन एफटीए: शुल्क छूट वाले कोटे में 5,000 के मुकाबले सिर्फ 642 कारों के लिए आए आवेदन, जानिए सबकुछ

Thu, 17 Sep 2026 07:10 PM IST
द बोनस बोनस डेस्क, नई दिल्ली
बोनस डेस्क, नई दिल्ली Published by: द बोनस Updated Thu, 17 Sep 2026 07:10 PM IST
सार

भारत-ब्रिटेन एफटीए के तहत 5,000 कारों के रियायती कोटे में से केवल 642 कारों के लिए आवेदन आए हैं। जानें क्यों ईवी को बाहर रखा गया और कार कंपनियों ने क्यों दिखाई कम दिलचस्पी। पूरी विस्तृत रिपोर्ट पढ़ें।

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India-UK FTA Car Quota Sees Tepid Response: Only 642 Applications Received Against 5,000 Quota
सीईटीए का कैसे मिलेगा लाभ? - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक संबंधों को नई मजबूती देने के लिए हुए मुक्त व्यापार समझौते के मोर्चे पर एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। इस समझौते के तहत ब्रिटेन से शुल्क में छूट पर भारत आने वाली लग्जरी और अन्य कारों के लिए 5,000 कारों का बड़ा कोटा तय किया गया था, लेकिन इसके मुकाबले भारतीय बाजार में कंपनियों ने उतनी उत्सुकता नहीं दिखाई है। विदेश व्यापार महानिदेशालय के पास इस कोटे के तहत महज 642 कारों के आयात के लिए ही आवेदन पहुंचे हैं।

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वाणिज्य मंत्रालय के अधीन आने वाले डीजीएफटी के आंकड़ों के अनुसार, इस विशेष कोटे के तहत अब तक कुल आठ कंपनियों ने ब्रिटेन से कारें आयात करने के लिए आवेदन किया था। डीजीएफटी ने आवश्यक कानूनी और कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद इनमें से सात कंपनियों को कुल 642 कारों के आयात की अनुमति दे दी है।
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एक कंपनी की ओर से जरूरी दस्तावेज और कागजी कार्रवाई पूरी न हो पाने के कारण उसके आवेदन को फिलहाल रोक दिया गया है।

इलेक्ट्रिक वाहनों को नहीं मिली है जगह

इस समझौते और कोटे को लेकर सरकार की नीति बिल्कुल साफ है। भारत-ब्रिटेन एफटीए के तहत ब्रिटेन में बनने वाली चुनिंदा कारों को ही तय कोटे के भीतर कम शुल्क पर भारत लाने की छूट दी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच ऑटोमोबाइल सेक्टर में कारोबार को बढ़ावा देना है।

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हालांकि, डीजीएफटी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस ड्यूटी-फ्री या रियायती कोटे के दायरे से इलेक्ट्रिक वाहनों को पूरी तरह बाहर रखा गया है। यानी इस कोटे के तहत कोई भी ईवी आयात नहीं की जा सकेगी।

क्यों कम दिख रहा है उत्साह?

तय कोटे यानी 5,000 कारों के मुकाबले सिर्फ 642 कारों के आवेदन आने का मतलब साफ है कि कोटे का एक बहुत बड़ा हिस्सा अभी भी खाली पड़ा है। चूंकि इस कैलेंडर वर्ष को खत्म होने में अब केवल कुछ ही महीने बचे हैं, इसलिए जानकारों का मानना है कि इस साल के भीतर अब और अधिक संख्या में कारों के आयात की बड़ी संभावना नहीं है। आने वाले महीनों में देखना होगा कि ऑटोमोबाइल कंपनियां इस बचे हुए कोटे का लाभ उठाने के लिए नए सिरे से आवेदन करती हैं या नहीं।

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