राष्ट्रीय राजमार्ग: एआई और कैमरों से होगी यातायात की निगरानी, उल्लंघन करने वालों के घर पहुंचेगा ई-चालान
- एक हजार किमी नेशनल हाईवे पर ऑटोमैटिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लगाने को सरकार ने दी मंजूरी
- ओवरस्पीडिंग और गलत तरीके से लेन बदलने वालों पर रखी जाएगी कड़ी नजर
विस्तार
देश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए ट्रैफिक नियमों की निगरानी अब पूरी तरह हाई-टेक होने जा रही है। सड़क सुरक्षा और यातायात को सुचारू बनाने के लिए केंद्र सरकार ने देश के करीब 1,000 किलोमीटर लंबे नेशनल हाईवे पर ऑटोमैटिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एटीएमएस) लागू करने की सहमति दे दी है। जल्द ही यह तय किया जाएगा कि किन-किन एक्सप्रेसवे और हाईवे पर इसे चरणबद्ध तरीके से स्थापित किया जाना है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सीसीआई के एक सम्मेलन में इसकी जानकारी दी है।
कैसे काम करेगा नया एटीएमएस?
यह पूरी व्यवस्था अत्याधुनिक कैमरों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेंसर्स और रियल-टाइम डेटा पर आधारित होगी। सिस्टम लागू होने के बाद ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले वाहनों की पहचान तकनीक के जरिए होगी और संबंधित वाहन मालिक को ऑटोमैटिक नोटिस या ई-चालान भेजा जा सकेगा।
विशेष तौर पर ओवरस्पीडिंग (विशेषकर 120 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक गति से चलने वाले वाहन), गलत तरीके से लेन बदलना और अन्य यातायात उल्लंघनों की निगरानी की जाएगी। सड़क हादसों की एक बड़ी वजह गलत लेन में चलना भी होता है, जिस पर इस प्रणाली से लगाम कसेगी।
इस हाई-टेक निगरानी के शुरू होने से हाईवे पर नियमों का पालन कराने के लिए हर जगह पुलिस या प्रवर्तन टीमों की भौतिक मौजूदगी पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी।
इन एक्सप्रेसवे पर पहले से है व्यवस्था
सरकार हाई ट्रैफिक वाले चुनिंदा एक्सप्रेसवे पर पहले ही एटीएमएस का सफल इस्तेमाल कर रही है। वर्तमान में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, ट्रांस-हरियाणा एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख कॉरिडोर पर यह व्यवस्था पूरी तरह लागू है। अब इसी तर्ज पर इसे देश के अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी विस्तारित किया जा रहा है।
दुर्घटना में तुरंत मिलेगी मदद
परिवहन विशेषज्ञों के अनुसार, एटीएमएस का उद्देश्य केवल ई-चालान काटना नहीं है, बल्कि इसके कई अन्य बड़े फायदे भी हैं। हाईवे पर सड़क दुर्घटना होने, वाहन खराब होने या किसी अन्य आपातकालीन घटना की तत्काल पहचान कर मौके पर राहत और सहायता पहुंचाने में मदद मिलेगी। रियल-टाइम डेटा मिलने से जाम की स्थिति से तुरंत निपटा जा सकेगा। सरकार की योजना इस आधुनिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से देश के पूरे हाईवे नेटवर्क पर लागू करने की है, जिससे सड़क यात्रा को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सके।