Elcid: एशियन पेंट्स से जुड़ी कंपनी का रिकॉर्ड, एक दिन में ही 10 हजार का निवेश ₹67 करोड़ में बदला, ये है कारण
ELCID INVESTMENTS LTD Share Price: एल्सिड इन्वेस्ट कंपनी के शेयरों का भाव बीएसई पर 3.37 रुपये से चढ़कर 260465.60 रुपये पर पहुंच गया जिससे कंपनी में किया गया 10,000 रुपये का छोटा सा निवेश सिर्फ एक कारोबारी सत्र में 67 करोड़ रुपये में बदल गया।
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विस्तार
कुछ दिन पहले, शेयर बाजार में कुछ असाधारण हुआ। BSE पर सूचीबद्ध NBFC (गैर-बैंकिंग वित्त कंपनी) एल्सिड इन्वेस्टमेंट के शेयरों की कीमत में लगभग 67,00,000% की उछाल आई और तीन रुपये 53 पैसे का शेयर देश के सबसे महंगे शेयर एमआरएफ को पछाड़कर 2,36,250 रुपये के भाव पर पहुंच गया।
लेकिन आप पूछेंगे कि कम कीमत वाले पेनी स्टॉक की कीमतों में इतना बड़ा उछाल कैसे आया?
खैर, यह कोई जादू नहीं था। यह वास्तव में बाजार नियामक सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) की नई "विशेष कॉल नीलामी" प्रणाली की बदौलत संभव हुआ। अगर आप अब भी नहीं समझे तो चलिए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
कुछ महीने पहले, सेबी ने कुछ अजीब बात देखी। कई निवेश कंपनियां (IC) और निवेश होल्डिंग कंपनियां (IHC) उस कीमत पर कारोबार नहीं कर रही थीं, जिसके वे हकदार थे। जिन्हें नहीं पता, उनके लिए बता दें कि निवेश कंपनियां मुख्य रूप से स्टॉक, म्यूचुअल फंड और डिबेंचर में निवेश करती हैं, जबकि IHC अन्य कंपनियों में हिस्सेदारी रखती हैं। इन कंपनियों का अपना कोई संचालन नहीं होता या वे खुद कुछ भी नहीं बनातीं। इसके बजाय उनका मुख्य काम सिर्फ अपने निवेश का प्रबंधन करना और लाभांश और रिटर्न के जरिए पैसे कमाना होता है। लेकिन, इन कंपनियों के पास वास्तविक व्यावसायिक गतिविधि नहीं है, इसलिए इनमें आम तौर पर निवेशकों की बहुत ज्यादा दिलचस्पी नहीं होती। अंतिम परिणाम यह होता है कि उनके शेयर अक्सर उनके बुक वैल्यू (देयता घटाने के बाद उनकी संपत्तियों का कुल मूल्य) से काफी नीचे कारोबार करते हैं।
सेबी की एक प्रक्रिया के कारण शेयर की कीमतों में आया बड़ा बदलाव
इसलिए, लिक्विडिटी को बेहतर बनाने, निवेशकों को उचित मूल्य खोजने में मदद करने और आम तौर पर इन शेयरों में अधिक रुचि पैदा करने के लिए, सेबी एक विशेष कॉल नीलामी का एलान किया। यह प्रणाली उन शेयरों के लिए ट्रेडिंग को बढ़ावा देने में मदद करती है जिनमें बहुत अधिक गतिविधि नहीं होती है, जबकि कीमतें स्थिर रहती हैं। कॉल नीलामी में, स्टॉक एक्सचेंज एक विशिष्ट दिन पर एक विशेष ट्रेडिंग विंडो सेट करता है। इस समय के दौरान, निवेशक बिना किसी मूल्य सीमा के खरीद या बिक्री के ऑर्डर कर सकते हैं, जिसका अर्थ है कि बिनी किसी ऊपरी या निचले सर्किट के बिना कारोबार संभव होता है, इसलिए कीमतें उतनी ही अधिक या कम हो सकती हैं जितनी निवेशक भुगतान करने को तैयार हो।
क्या सभी कंपनियों को मिलता है यह मौका?
नहीं, सभी IC और IHC स्टॉक इस नीलामी के लिए योग्य नहीं होते। इस नीलामी में शामिल होने की कुछ शर्तें हैं। यह योग्यता हासिल करने के लिए कंपनी को कम से कम एक साल के लिए एक्सचेंज पर सूचीबद्ध होना चाहिए और उस दौरान उसे ट्रेडिंग से कभी निलंबित नहीं किया जाना चाहिए। उन्हें अपनी परिसंपत्तियों का कम से कम 50% अन्य सूचीबद्ध कंपनियों में निवेश करना होता है। साथ ही, स्टॉक का वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP), जो मूल रूप से एक स्टॉक का औसत मूल्य होता है और इस बात पर आधारित है कि एक निश्चित अवधि में इसका कितना कारोबार हुआ, इस मामले में, छह महीने- प्रति शेयर इसकी बुक वैल्यू के 50% से कम होना चाहिए।
एल्सिड इन्वेस्टमेंट ने इन सभी कसौटियों पर खरा उतरा। 93% संपत्ति अन्य सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में निवेश करने वाली एक आईसी होने के नाते और शेयर की कीमत प्रति शेयर अपने बुक वैल्यू से 1,65,00,000% कम होने के कारण, यह सेबी की विशेष कॉल नीलामी के लिए योग्य बन गई थी। इसके बाद एल्सिड इन्वेस्टमेंट में किया गया 1 लाख का निवेश ₹670 करोड़ से अधिक का हो गया। जो बाजार के लिहाज से आश्चर्यजनक है।
लेकिन रुकिए... क्या एल्सिड इन्वेस्टमेंट्स का स्टॉक वास्तव में अपनी वर्तमान कीमत का हकदार है?
ऐसे कई तरीके हैं जिनसे आप एल्सिड जैसी आईसी का मूल्यांकन कर सकते हैं। एक सामान्य विधि बुक वैल्यू विधि है। मूल रूप से, आप कंपनी की शुद्ध परिसंपत्तियों के मूल्य की गणना करते हैं और फिर उसे बाजार में उपलब्ध कुल शेयरों की संख्या से विभाजित करते हैं। यदि आप एल्सिड इन्वेस्टमेंट के लिए ऐसा करते हैं, तो आप पाएंगे कि इस कंपनी के स्टॉक का वास्तव मूल्य ₹5.8 लाख प्रति शेयर होना चाहिए। इसका मतलब है कि, इसकी वर्तमान कीमत पर भी जितनी इसकी कीमत होनी चाहिए उससे 125% कम है।
निवेश से पहले यह पक्ष भी जानना जरूरी
लेकिन इससे पहले कि आप उत्साहित हो जाएं और स्टॉक पर अपना पैसा दांव पर लगा दें, एक और पक्ष भी जानना जरूरी है। देखिए, एल्सिड जैसी निवेश कंपनियों में लिक्विडिटी बहुत कम होती है, जिसका मतलब है कि वहां बहुत ज्यादा खरीदार या विक्रेता नहीं होते। कंपनी में असल में केवल 328 सार्वजनिक शेयरधारक हैं जो एल्सिड इन्वेस्टमेंट के मालिक हैं। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार "यह एक विशेष क्लब है" जिससे लिक्विडिटी के बेहतर होने की उम्मीद कम है। अब ऐसा क्यों है?
इसे समझने के लिए, हमें पीछे जाकर उन अन्य तरीकों को देखना होगा जिनसे एल्सिड इन्वेस्टमेंट जैसी कंपनियों का मूल्यांकन किया जाता है। जैसे कि लाभांश छूट मॉडल, जो भविष्य के लाभांश के आधार पर किसी शेयर के वर्तमान मूल्य की गणना करता है। अब, एल्सिड ने पिछले दो दशकों में ₹10 से ₹25 के बीच लाभांश का भुगतान किया है, जो सुनने में बहुत अच्छा लग सकता है क्योंकि यह उसके पिछले शेयर मूल्य का 100% से अधिक है।
लेकिन जब आप गहराई से खोजते हैं, तो यह उतना आकर्षक नहीं लगता। एल्सिड एशियन पेंट्स और पेटीएम जैसी कंपनियों में निवेश से लगभग ₹110 करोड़ कमाता है और अगर उस लाभ को सभी शेयरधारकों के साथ साझा किया जाता, तो यह लगभग ₹5,500 प्रति शेयर होता है। इसके बजाय, कंपनी ने पिछली बार लाभांश के रूप में मात्र ₹25 का भुगतान किया था। इसका मतलब यह है कि कंपनी अपनी अधिकांश कमाई अपने पास रखती है, जो नए निवेशकों के लिए हतोत्साहित करने वाली बात है। इस स्थिति कंपनी के मूल्य को उस स्तर तक बढ़ने से रोकती है, जहां इसे वास्तव में होना चाहिए।
लेकिन एल्सिड इन्वेस्टमेंट जैसे स्टॉक के मूल्य को अनलॉक करने का एक और तरीका है। और वह है शेयरधारकों द्वारा प्रमोटरों पर दबाव डालना कि वे एशियन पेंट्स जैसी लाभदायक कंपनियों में कुछ संपत्तियां या शेयर बेच दें। इससे शेयरधारकों के बीच लाभ साझा किया जा सकेगा और स्टॉक का मूल्य बढ़ सकेगा।
ऐसे शेयरों को खरीदना और फिर बेचना है मुश्किल, तो हम-आप क्या करें?
हालांकि, यहां यह भी संभव नहीं है क्योंकि ज़्यादातर IC और IHC में प्रमोटरों के पास आम तौर पर लगभग 75% शेयर होते हैं, जिससे आप और मेरे जैसे खुदरा निवेशकों का बहुत कम प्रभाव रह जाता है। इसके बिना, एल्सिड के शेयर की कीमत के लिए उसका सही मूल्य दर्शाना मुश्किल है, जो खुदरा निवेशकों के लिए सही नहीं है और अगर यह अगर यही स्थिति बनी रही तो इसके शेयरों की लिक्विडिटी कभी नहीं सुधरेगी। इसके अलावा, चूंकि इसकी कीमत अब भी बहुत कम है, तो कोई आपको इसे इतनी कम कीमत पर क्यों बेचेगा, जबकि उन्हें पता है कि इसकी कीमत कहीं ज्यादा हो सकती है? इसलिए, बेचने के लिए तैयार किसी व्यक्ति को ढूंढना लगभग असंभव है।
लेकिन मान लीजिए कि आपको किसी तरह मौका मिल जाता है और आप इसे खरीदने में कामयाब हो जाते हैं; बाद में इसे बेचना भी मुश्किल होगा। जैसा कि हमने आपको बताया है, विशेष कॉल नीलामी से लिक्विडिटी में बहुत सुधार नहीं हो सकता है, जिसका मतलब है कि आप तब तक स्टॉक में फंसे रह सकते हैँ जब तक कि कंपनी बंद न हो जाए या प्रमोटर द्वारा निर्धारित कीमत पर डीलिस्ट न हो जाए। दूसरी ओर, एलसिड के लिए भी डीलिस्टिंग आसान नहीं है। उन्होंने पहले भी कोशिश की है और असफल रहे हैं क्योंकि शेयरधारक वास्तविक बुक वैल्यू से कम पर नहीं बेचेंगे, जो प्रमोटरों के लिए बहुत महंगा सौदा है।इसलिए, सफल डीलिस्टिंग की संभावना भी नहीं है। तो यह एक दुष्चक्र की तरह है। एल्सिड इन्वेस्टमेंट जैसे स्टॉक से पैसा कमाने वाले केवल वही निवेशक रहेंगे, जो सालों पहले इसमें शामिल हुए थे। अगर आप उन लोगों में से एक हैं, तो बहुत बढ़िया। अगर नहीं, हैं तो आपको केवल इस उतार-चढ़ाव का आनंद बाहर से लेते रहना चाहिए।