RBI की घोषणा के बाद शेयर बाजार धड़ाम, 500 से भी ज्यादा अंक टूटा सेंसेक्स
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सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन यानी गुरुवार को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट में कटौती की घोषणा के बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 553.82 अंक यानी 1.38 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ, जिसके बाद ये 39529.72 के स्तर पर पहुंचा। वहीं दिनभर के कारोबार के बाद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 177.90 अंक यानी 1.48 फीसदी की गिरावट के बाद 11843.80 के स्तर पर बंद हुआ।
ऐसा रहा दिग्गज शेयरों का हाल
दिनभर के कारोबार के बाद गुरुवार को गेल के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। गेल के शेयर 12 फीसदी टूटे। इसके साथ ही इंडियाबुल्स हाउसिंग, इंडसइंड बैंक, यस बैंक और भारती स्टेट बैंक (SBI) के शेयरों में चार से आठ फीसदी की गिरावट देखने को मिली। दिग्गज शेयरों की बात करें तो कोल इंडिया, टाइटन कंपनी, हीरो मोटोकॉर्प और एचयूएल के शेयर एक से दो फीसदी उछले।
40032.69 के स्तर पर खुला था सेंसेक्स
गुरुवार को शेयर बाजार लाल निशान के साथ खुला था। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 50.85 अंकों की गिरावट के साथ 40032.69 के स्तर पर खुला था। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 22.70 अंक यानी 0.19 फीसदी की गिरावट के बाद 11999 के स्तर पर खुला था।
इसलिए आई गिरावट
दरअसल भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आम लोगों के लिए बड़ी घोषणा की है, जिसका असर शेयर बाजार में देखने को मिला। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की समीक्षा बैठक में लिए गए फैसले के अनुसार रेपो रेट को छह फीसदी से घटाकर 5.75 फीसदी कर दिया गया है। नौ सालों में पहली बार रेपो रेट इतना कम हुआ है।
एमपीसी के सभी छह सदस्यों, डॉ. चेतन घाटे, डॉ. पामी दुआ, डॉ. रविंद्र एच ढोलकिया, डॉ. मिशेल देबब्रत पात्रा, डॉ. विराल वी आचार्य और शक्तिकांता दास ने रेपो रेट में कटौती का समर्थन किया। रेपो रेट के अतिरिक्त रिवर्स रेपो रेट में भी कटौती की गई है। नई मौद्रिक नीति के तहत रिवर्स रेपो रेट घटकर 5.50 फीसदी पर आ गया है, जबकि बैंक रेट छह फीसदी पर है। छह सदस्यीय एमपीसी की बैठक की अध्यक्षता आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने की।
लगातार तीसरी बार घटा रेपो रेट
केंद्रीय बैंक ने आर्थिक वृद्धि में तेजी लाने के लिए इस साल फरवरी और अप्रैल में रेपो रेट में 25-25 आधार अंकों (0.25 फीसदी) की कटौती की थी। हालांकि अप्रैल में जब आरबीआई द्वारा रेपो रेट में कटौती की गई थी, तब कुछ ही बैंकों ने इसका लाभ लोगों को दिया था।
इसलिए उठाया गया कदम
आर्थिक विकास की रफ्तार सुस्त पड़ने से आरबीआई पर ब्याज दर में कटौती करने का दबाव बढ़ गया था। इसी वजह से ये कदम उठाया गया। वित्त वर्ष 2018-19 में विकास दर 6.8 फीसदी रही, जो पिछले पांच साल में सबसे कम है। ऐसे में केंद्रीय बैंक की कोशिश है कि सस्ते कर्ज के जरिए बाजार में नकदी बढ़ाकर अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज की जाए।