बजट: किसानों की खुदकुशी रोकने की दिखेगी कवायद
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सोमवार को पेश किए जाने वाले आम बजट में ग्रामीण और कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने पर खास जोर रहने की उम्मीद है। इसमें किसानों की खुदकुशी रोकने की कवायद भी दिख सकती है। सरकार रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए कृषि क्षेत्र की कमजोरियों को दूर करने की कोशिश करेगी।
सड़क नेटवर्क का विस्तार कर कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के उपाय भी किए जाएंगे। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में गरीबी दूर करने के लिए नई सामाजिक योजनाओं की शुरुआत के साथ आवास निर्माण पर बल दिए जाने की भी उम्मीद है।
कृषि क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती किसानों की आत्महत्या रोकने की है। इस स्थिति का मुख्य कारण खेती का मौसम पर निर्भर रहना, कृषि उत्पादों का वाजिब दाम न मिलना और कर्ज का बढ़ता दबाव है। खेती में लागत बढ़ने की वजह से यह घाटे का सौदा बन गई है। पीएम खेती की स्थिति सुधारने की अपनी प्रतिबद्धता पहले ही जता चुके हैं।
सस्ते दर पर कर्ज कराया जाएगा मुहैया
सिंचाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए 50 हजार करोड़ की लागत वाली
प्रधानमंत्री सिंचाई योजना की शुरुआत की गई है। यह राशि पांच वर्षों में
खर्च होनी है। बीते बजट में इस मद से 5000 करोड़ रुपये दिए गए थे। इस वर्ष
इस मद में 10000 करोड़ से ज्यादा की राशि आवंटित किए जाने की उम्मीद है।
सरकार किसानों से खेती के पैटर्न में बदलाव की अपील भी करेगी। किसानों को
केवल गेहूं, धान और गन्ने की खेती के बजाय दलहन, बागवानी, मशरूम या अन्य
व्यापारिक फसलों की को उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
पशुपालन और
दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने को और रियायतें दी जाएंगी। छोटे किसान को
बाजार के सूदखोरों से निजात दिलाने के लिए, सस्ते दर पर कर्ज मुहैया कराया
जाएगा। कम समय के कर्ज के साथ किसानों को लंबी अवधि के कर्ज के लिए प्रेरित
किया जाएगा। बैंको में किसान कर्ज अनिवार्य किए जाएंगे।
कृषि उत्पाद को
वाजिब दाम दिलाने के लिए राष्ट्रीय कृषि बाजार शुरू किया जाएगा। उत्पाद का
क्षय रोकने के लिए गांवों में सड़क नेटवर्क बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।