ईयू से ब्रेक-अप: अलग होने के फैसले से थर्राया दुनिया का बाजार
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ऐतिहासिक जनमत संग्रह में ब्रिटेन ने यूरोेपीय संघ (ईयू) से अलग रहने का फैसला किया है। ईयू छोड़ने के पक्ष में वोट डालने वालों की तादाद संघ में बने रहने से थोड़ी ही ज्यादा रही लेकिन इसने ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरून की कुर्सी ले ली। ईयू से ब्रिटेन के बाहर निकलने के फैसले के साथ ही पूरी दुनिया के बाजार ध्वस्त हो गए
भारतीय समेत दुनिया के तमाम शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई। रुपया और पाउंड काफी कमजोर होकर बंद हुआ। जनमत संग्रह के नतीजों के बाद कैमरून ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया। उन्होंने कहा, मैं अक्टूबर में इस्तीफा दे दूंगा। मुझे नहीं लगता कि देश जिस अगले पड़ाव पर जा रहा है, वहां मुझे इसकी कमान संभालनी चाहिए।
कंजर्वेटिव पार्टी को या नेता चुन लेना चाहिए। वहीं नए पीएम के लिए ईयू छोड़ने के अभियान का नेतृत्व करने वाले लंदन के पूर्व मेयर बोरिस जॉनसन, सीनियर कंजरवेटिव नेता और चासंलर जॉर्ज ओेसबोर्न और होम सेक्रेट्री टेरेसा मे के नाम सामने तेजी से सामने आए हैं। कैमरून ने कहा कि नए पीएम अक्टूबर तक देश की कमान संभाल कर 28 देशों के वाले संगठन ईयू से अलग होने की प्रक्रिया शुरू कर दें।
जनमत संग्रह के नतीजों के मुताबिक ईयू छोड़ने वालों की तादाद थोड़ी ही ज्यादा रही। ईयू न छोड़ने के पक्ष में 48.1 फीसदी लोगों ने वोट दिए, जबकि इससे बाहर निकलने के पक्ष में फैसला देने वालों की तादाद 51.9 फीसदी थी। ईयू में रहने के पक्ष में 1.61 करोड़ लोगों ने वोट दिए औैर इसके विपक्ष में 1.74 करोड़ लोगों के वोट पड़े। यानी कुल 13 लाख वोटों का अंतर ब्रिटेन को ईयू से बाहर ले गया।
बेहद मामूली अंतर से हुए इस फैसले के बाद ब्रिटेन के यूरोप, भारत और तमाम दूसरे देशों के साथ कारोबारी रिश्ते बदल जाएंगे। जनमत संग्रह के फैसले के बाद पूरे यूरोप में आप्रवास और दक्षिणपंथी राजनीति के बढ़ते असर जैसे मुद्दों पर नई बहस छिड़ गई है।
कैमरून और उनकी पार्टी का भविष्य
जर्मनी के बाद यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ब्रिटेन ग्रीनलैंड के बाद ईयू छोड़ने वाला दूसरा देश बन गया है। अलग होने या साथ रहने के सवाल पर हुए जनमत सर्वेक्षण में 72.2 फीसदी लोगों ने हिस्सा लिया और यह 1992 के बाद किसी वोटिंग के लिए सबसे ज्यादा तादाद रही।
जनमत संग्रह के नतीजों के बाद दुनिया भर के बाजारों में इसका भारी असर दिखा। लेकिन पांच साल के दूसरे कार्यकाल का पहला साल ही पूरा कर पाए कैमरून ने कहा कि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है। उन्होंने ब्रिटेन में रह रहे यूरोप के दूसरे देशों के लोगों से कहा कि उनकी मौजूदा स्थिति में भी कोई परिवर्तन नहीं आएगा।
भावुक कैमरून के रूंधे गले से कहा कि देश को आगे ले जाने के लिए नए नेतृत्व की जरूरत है। अब मेरा जहाज का कप्तान रहना ठीक नहीं है। लेकिन मैं मदद के लिए हमेशा मौजूद रहूंगा।
बाजार में कोहराम
ब्रिटेन के ईयू से बाहर आने का फैसला आते ही बांबे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स 604.51अंक गिर कर 26,397.71 पर आ गया। एनएसई के निफ्टी सूचकांक में शुरुआत में 181 अंक नीचे आ गया लेकिन बाद में यह बढ़ कर बंद हुआ। ब्रेग्जिट की वजह से भारतीय निवेशकों को 1.79 लाख करोड़ रुपये का चूना लग गया। रुपये में भारी गिरावट देखने को मिली और यह एक समय यह 96 पैसे घट कर डॉलर के मुकाबले 68 से भी नीचे पर आ गया। ब्रिटेन के ईयू से बाहर आने के फैसले के साथ एशियाई और यूरोपीय बाजार में 8 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई।
शेयर बाजार की गिरावट
यूरोप प्रतिशत में
एफटीएसई (इंग्लैंड) - 717.17 ( 1.85)
सीएसी 40 (फ्रांस) - 225 ( 5.14)
डैक्स (जर्मनी) - 587 ( 5.73)
एशिया
सेंसेक्स ( भारत) -604 (2.95)
हेंगसेंग (हांगकांग) -614 (2.95)
निक्केई ( जापान) -1286 ( 7.92)
शंघाई कंपोजिट ( चीन) -37.67 ( 1.30)
अमेरिका
डो-जोंस - 393 ( 2.18)
एसएंडीपी - 49 ( 2.3)
ईयू से क्यों हटा ब्रिटेन
अलग होने के समर्थकों का कहना है कि ईयू के साथ रहने की वजह से ब्रिटेन अपने राजनीतिक फैसले नहीं कर पा रहा था। इसके अलावा उसका आर्थिक बोझ और आप्रवासियों का बोझ बढ़ता जा रहा है। अब वह अपनी इकोनॉमी, विदेश नीति और आप्रवास नीति पर स्वतंत्र फैसले कर सकेगा।
आगे क्या?
ब्रिटेन को ईयू से अलग होने में दो साल का समय लगेगा। कैमरून ने कहा है कि ब्रिटेन लिस्बन संधि के अनुच्छेद 50 का आह्वान करेगा, जिसके सहमति के लिए दो साल का समय शर्तों के साथ लगेगा। लेकिन अब कैमरून अक्टूबर में पद छोड़ने की बात कर रहे हैं लिहाजा इसकी समय सीमा अनिश्चित है।
क्या होगा ईयू का भविष्य?
ब्रिटेन के अलग होने से ईयू को आर्थिक घाटा होगा। ईयू ब्रिटेन का बाजार का 45 फीसदी हिस्सा है। ईयू को अब इस हिस्सेदारी के लिए ज्यादा मशक्कत करनी होगी। लंदन वित्तीय बाजार का हब है। इसका असर भी ईयू पर पड़ेगा। साथ ही अब ईयू के आप्रवासियों के लिए ब्रिटेन में नियम सख्त होंगे। ब्रिटेन के देखादेखी अन्य देशों में भी ईयू से अलग होने की प्रवृति जोेर पकड़ सकती है।
भारतीय बाजार पर क्या होगा असर
ब्रिटेन में 800 भारतीय कंपनियां हैं। ब्रिटेन के ईयू से अलग होने की दिशा में भारतीय कंपनियों के पूंजी निवेश पर असर पड़ सकता है और ये कंपनियां अपनी पूंजी वहां से निकाल सकती हैं। यूरो-पाउंड में गिरावट थमे हुए भारतीय एक्सपोर्ट कारोबार को और झटका दे सकता है।
कैमरून और उनकी पार्टी का भविष्य
कैमरून ने अपने पहले कार्यकाल में जनमत संग्रह का वादा किया था। यह वादा उन पर भारी पड़ा। कैमरून पीएम नहीं रहेंगे लेकिन उनकी पार्टी कमजोर होगी। हालांकि कंजरवेटिव पार्टी के कई नेता पीएम की रेस में हैं।
ब्रिटेन में 800 भारतीय कंपनियां हैं। ब्रिटेन के ईयू से अलग होने की दिशा में भारतीय कंपनियों के पूंजी निवेश पर असर पड़ सकता है और ये कंपनियां अपनी पूंजी वहां से निकाल सकती हैं। यूरो-पाउंड में गिरावट थमे हुए भारतीय एक्सपोर्ट कारोबार को और झटका दे सकता है।
कैमरून और उनकी पार्टी का भविष्य
कैमरून ने अपने पहले कार्यकाल में जनमत संग्रह का वादा किया था। यह वादा उन पर भारी पड़ा। कैमरून पीएम नहीं रहेंगे लेकिन उनकी पार्टी कमजोर होगी। हालांकि कंजरवेटिव पार्टी के कई नेता पीएम की रेस में हैं।
Published By Rahul Sankrityayan