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चार बैंकों में हुई जन धन खाते में एक-एक रुपया डालने की घटना: जेटली

Fri, 16 Sep 2016 05:55 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 16 Sep 2016 05:55 PM IST
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We are probing 1 rupee incident in Jan Dhan accounts: Jaitley
जेटली - फोटो : Getty

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खाताधारकों के अकाउंट में एक-एक रुपये डालने की घटना 4 बैंकों में हुई है। इस बारे में जांच चल रही है। सार्वजनिक क्षेत्र के इन चार बैंकों को एक सप्ताह में रिपोर्ट वित्त मंत्रालय के बैंकिंग प्रभाग को भेजने को कहा गया है।

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चालू वित्त वर्ष के दौरान पहली तिमाही के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की समीक्षा करने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में जेटली ने बताया कि जन धन योजना के तहत खातेदारों के अकाउंट में एक-एक रुपया जमा होने की घटना सिर्फ चार बैंकों में हुई है।
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उन बैंकों में इस बात की जांच की जा रही है कि यह पैसा खाता धारकों ने डाला है या उस बैंक के बिजनेस करोसपोंडेंट ने। बैंकों से एक सप्ताह के अंदर जांच रिपोर्ट वित्त मंत्रालय को भेजने के लिए कहा गया है।
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उल्लेखनीय है कि पंजाब एंड सिंध बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक आफ बड़ौदा तथा बैंक ऑफ इंडिया की कुछ शाखाओं में जन धन योजना के तहत खोले गए जीरो बैलेंस खाते में एक-एक रुपया डालने की बात सामने आई है। 

एक-एक रुपये से जमा नहीं होते 42000 करोड़ रुपये

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जन ध्‍ान - फोटो : Getty

जेटली ने कहा कि जन धन योजना के तहत अभी तक 24 करोड़ खाते खुल चुके हैं। इनमें से अधिकतर खाते कमजोर वर्गों के लोगों के हैं। इन्होंने अपने खाते में 42 हजार करोड़ रुपये जमा किया है।

बैंक द्वारा एक रुपया डाल कर जीरो बैंलेंस खाते को बैलेंस वाले खाते में बदलने संबंधी आरोपों को झुठलाते हुए उन्होंने पूछा कि क्या एक-एक रुपये डालने से इतनी रकम जमा होती है।

उनका कहना है कि इस तरह का काम चार बैंकों के चंद खातों में हुआ है और यह कैसे हुआ है, इस बारे में तहकीकात की जा रही है। 

सरकारी बैंकों की हालत खराब नहीं

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केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली - फोटो : amar ujala

वित्तमंत्री ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की हालत खराब नहीं है। इसका अंदाजा पहली तिमाही के परिणाम से मिलता है। चालू वर्ष की पहली तिमाही में सभी सरकारी बैंकों का परिचालन लाभ 32967 करोड़ रुपये रहा है। लेकिन इन बैंकों का एनपीए इतना बढ़ गया है कि उनके लिए भारी रकम की प्रोविजनिंग करनी पड़ रही है।

जब एनपीए के लिए प्रोविजनिंग की जा रही है तो बैंकों को नियमानुसार कर का भुगतान भी करना पड़ रहा है। इन सब को यदि काट दिया जाए तो पहली तिमाही में इन बैंकों का शुद्घ लाभ महज 222 करोड़ रुपये बचता है।

जेटली ने बताया कि बैंकों का सर्वाधिक एनपीए इस्पात और ढांचागत संरचना क्षेत्र में है। हालांकि हाल में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से दोनों क्षेत्रों में सुधार के लक्षण दिखे हैं। यही वजह है कि कुछ एनपीए खातों में अब मूल धन तो नहीं लेकिन ब्याज का भुगतान होने लगा है। यह बैंकिंग और अर्थव्यवस्था, दोनों के लिए अच्छी खबर है। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में बैंकों की हालत सुधरेगी।

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