बैंक मर्जर से क्या पड़ेगा लोन, एफडी या चेक बुक पर असर, इधर जानें अपने सभी सवालों के जवाब
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केंद्र सरकार ने मंदी से निपटने के लिए शुक्रवार को बड़ा एलान करते हुए देश के 18 बैंकों में से छह सरकारी बैंकों को विलय कर दिया। इन 18 सरकारी बैंकों में से 14 बैंक मुनाफे में है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 10 बैंकों का विलय कर चार बड़े सरकारी बैंक बनाने का एलान किया है। 2017 में देश में 27 सरकारी बैंक थे जिनकी संख्या इस विलय के बाद घटकर सिर्फ 12 रह जाएगी।
इन बैंकों का हुआ विलय
- पंजाब नेशनल बैंक में ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक का विलय होगा। ये दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक होगा, जो पीएनबी से 1.5 गुना बड़ा होगा। इनका कारोबार 17.95 लाख करोड़ रुपये का होगा और इस बैंक की 11,437 शाखाएं होंगी। बैंक का नया नाम पीएनबी होगा।
- केनरा बैंक का विलय सिंडिकेट बैंक में होगा, जो देश का चौथा सबसे बड़ा बैंक होगा। इनका 15.20 लाख करोड़ रुपये का कारोबार होगा और देश में इस बैंक की 10,324 शाखाएं होंगी। बैंक का नया नाम केनरा होगा।
- इंडियन बैंक का विलय इलाहाबाद में बैंक में किया गया है, जो देश का सातवां सबसे बड़ा सरकारी बैंक बनेगा। इनका 8.08 लाख करोड़ रुपये का कारोबार होगा। बैंक का नया नाम इलाहाबाद बैंक होगा।
- इसके अलावा यूनियन बैंक, आंध्रा बैंक और कॉर्पोरेशन बैंक का विलय होगा, जो देश का पांचवां सबसे बड़ा सरकारी बैंक बनेगा। इसका 14.59 लाख करोड़ रुपये का विलय होगा और बैंक की 9,609 शाखाएं होंगी। बैंक का नया नाम यूनियन बैंक ऑफ इंडिया होगा।
बैंकों के विलय से ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर ?
- इस विलय के बाद ग्राहकों को नई खाता संख्या और कस्टमर आईडी मिल सकती है।
- जिन ग्राहकों को नए अकाउंट नंबर या IFSC कोड जारी होंगे, उन्हें इनकी जानकारी आयकर विभाग, इंश्योरंस कंपनियों, म्यूचुअल फंड, नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) और दूसरी सरकारी योजनाओं में अपडेट करानी होंगी।
- जिन ग्राहकों की SIP या लोन ईएमआई चल रही है, उन्हें नया इंस्ट्रक्शन फॉर्म भरना पड़ सकता है।
- इसके अलावा नई चेकबुक, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड भी जारी हो सकता है।
- फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) या रेकरिंग डिपॉजिट (आरडी) पर मिलने वाले ब्याज में कोई बदलाव नहीं होगा।
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क्या लोन की ब्याज दरों में होगा बदलाव ?
जिन ब्याज दरों पर व्हीकल लोन, होम लोन, पर्सनल लोन आदि लिए गए हैं, वह स्थिर रहेगी और कोई बदलाव नहीं होगा। विलय के बाद कुछ शाखाएं बंद होंगी, जिसके लिए ग्राहकों को नई शाखाओं में जाना पड़ेगा।
क्यों हुआ बैंकों का विलय ?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि पिछले साल तीन बैंकों के विलय से फायदा हुआ, रिटेल लोन ग्रोथ में 25 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 50 साल पहले जुलाई 1969 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 14 निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया था।
क्या बैंकों के विलय से दूर होगी एनपीए की समस्या ?
कई सरकारी बैंकों का एनपीए काफी बढ़ गया है। ऐसे में सरकार के पास विलय करना मजबूरी है। जानकारों के मुताबिक कई बैंकों का एनपीए सात फीसदी के पार जा चुका है। ऐसे में विलय करने से सरकार बैंकों के एनपीए को कम कर सकेगी। बैंकों के लिए एनपीए बड़ी समस्या है। बैंकों के विलय से एनपीए की समस्या से निजात मिलेगी। अभी सरकारी बैंकों का 88 फीसदी बिजनेस इन 10 बैंकों से चार बैंकों के पास चला जाएगा। इससे इन 10 सरकारी बैंकों का एनपीए पांच से सात फीसदी तक कम होने की उम्मीद है।