एफआरडीआई बिलः पीएम के सामने जेटली ने बताई रणनीतिकारों को सच्चाई
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सरकार के प्रस्तावित नए कानून फाइनेंशियल रिजॉल्यूशन एंड डिपॉजिट इंश्योरेंस बिल (एफआरडीआई) पर भ्रम आम जनता को ही नहीं बल्कि सरकार के शीर्ष मंत्रियों और सांसदों के बीच भी है। एफडीआरआई पर भ्रम का मामला पीएम नरेंद्र मोदी के सामने जब उठा तो उन्होंने भाजपा रणनीतिकारों के मन में फैले भ्रम को दूर करने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली को मोर्चे पर उतारा।
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सरकार के प्रस्तावित नए कानून फाइनेंशियल रिजॉल्यूशन एंड डिपॉजिट इंश्योरेंस बिल (एफआरडीआई) पर भ्रम आम जनता को ही नहीं बल्कि सरकार के शीर्ष मंत्रियों और सांसदों के बीच भी है। एफडीआरआई पर भ्रम का मामला पीएम नरेंद्र मोदी के सामने जब उठा तो उन्होंने भाजपा रणनीतिकारों के मन में फैले भ्रम को दूर करने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली को मोर्चे पर उतारा।
सूत्र बताते हैं कि संसद के शीत सत्र की रणनीति बनाने के लिए शुक्रवार को हुई भाजपा संसदीय दल की कार्यकारी बैठक में एक सांसद ने एफआरडीआई कानून के भ्रम का मामला उठाया। उक्त सांसद ने कहा कि जनता में इसे लेकर भ्रम है, इसे जल्द दूर करना चाहिए।
इस पर तुरंत ही पीएम मोदी ने वित्त मंत्री जेटली की ओर इशारा किया कि वे भ्रम दूर करें। तब जेटली ने एफआरडीआई पर फैले भ्रम को कोरी बकवास बताते हुए बिल के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
क्या है एफआरडीआई बिल, क्यों फैला है भ्रम?
दरअसल मोदी सरकार ने फाइनेंशियल रिजॉल्यूशन एंड डिपॉजिट इंश्योरेंस बिल, (एफआरडीआई बिल) का प्रस्ताव किया है। इस बिल को लेकर आम जन में भ्रम यह है कि बुरे वक्त के समय बैंक सामान्य ग्राहक के खातों में जमा पैसे को जब्त कर लेगा और उससे अपना घाटा पूरा करेगा।
कई जगह क्षेत्रीय और निजी बैंकों ने प्रस्तावित बिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। समाज के विभिन्न वर्गों में बैंकों और वित्तीय संस्थाओं में जमा पब्लिक का पैसा फंसने का हौव्वा व्याप्त है। यह बात भाजपा के सांसदों और नेताओं तक पहुंची है।
इसकी वजह से ही संसदीय दल की कार्यकारी बैठक में पार्टी के एक सांसद ने पीएम मोदी के सामने एफआरडीआई के भ्रम का मुद्दा उठाया। मगर सरकार का दावा है कि एफआरडीआई बिल 2017 अभी संसद की स्थायी समिति के पास लंबित है।
यहां सारी खामियां दूर होने के बाद ही सरकार इस पर आगे बढ़ेगी। दरअसल बिल को लेकर भ्रम इसलिए फैल रहा है कि बिल की धारा 52 में कई ऐसे विवादित उपबंध हैं जिनको लेकर बैंकों को वित्तीय संस्थाओं का अधिकार प्राप्त हो जाएगा और वो विपरीत परिस्थितियों में ग्राहक की डिपॉजिट रकम को जब्त कर सकते हैं।
मन को नहीं भा रही सरकार की सफाई
यही वजह है कि बिल को लेकर जनता में भ्रम फैला हुआ है। जनता पर वित्त मंत्री अरुण जेटली और उनके मंत्रालय की सफाई बेअसर साबित हो रही है। जेटली ने कहा है कि बिल के जरिए सरकार वित्तीय संस्थाओं और जमाकर्ताओं के हित का पूरी तरह संरक्षण करना चाहती है।
उनके मंत्रालय ने ये भी कहा है कि बैंकों और वित्तीय संस्थाओं में जमा धन की सुरक्षा की गारंटी देने वाले जो नियम अभी चल रहे हैं, वो एफआरडीआई के बाद भी नहीं बदलेंगे। एफआरडीआई बिल में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिससे बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को आर्थिक और प्रस्तावित मदद देने में सरकार की भूमिका सीमित हो जाए।