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हैदराबाद की इस कंपनी ने लगाया 8 बैंकों को 1394 करोड़ का चूना, CBI ने दर्ज किया मुकदमा

Fri, 23 Mar 2018 11:28 AM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 23 Mar 2018 11:28 AM IST
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cbi lodges case against hyderabad company for 1394 crore loan fraud

देश में बैंकों से धोखाधड़ी के मामले थम नहीं रहे हैं। अब आठ बैंकों के संघ से 1394.43 करोड़ के घपले का मामला सामने आया है। सीबीआई ने इस मामले में हैदराबाद स्थित एक कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी टॉटेम इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और इसके प्रमोटरों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।  

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यूबीआई ने की थी शिकायत
सीबीआई ने आठ बैंकों के  संघ में शामिल यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यूबीआई) की शिकायत पर कंपनी और इसके प्रमोटर और डायरेक्टर टॉट्टेमपुड़ी सलालिथ और टॉट्टेमपुड़ी कविता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनसे पूछताछ की जा रही है। यूबीआई ने अकेले कंपनी को 313.84 करोड़ रुपये का लोन दिया था। सभी बैंकों से लिए गए लोन को न चुकाने पर 30 जून 2012 को इसे एनपीए घोषित कर दिया गया था। 
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2015 में हुई थी डिफॉल्टर घोषित
आयकर विभाग ने 2015 में 400 करोड़ रुपये से अधिक का कर नहीं चुकाने पर कंपनी का नाम अपनी कर डिफाल्टरों की सूची में शामिल किया था और कंपनी का पता बताने वाले को 15 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी।
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उस समय कंपनी के प्रमोटरों को पहुंच से बाहर बताया गया था लेकिन सीबीआई ने उनके नए आवास का पता लगाकर वहां छापेमारी की। एजेंसी ने कंपनी के प्रमोटरों के देश से बाहर जाने से रोकने के लिए लुकआउट नोटिस जारी किया था। 

कनिष्क गोल्ड के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी

cbi lodges case against hyderabad company for 1394 crore loan fraud

कनिष्क गोल्ड प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों और प्रोमोटरों को देश से बाहर जाने से रोकने के लिए सीबीआई ने लुकआउट नोटिस जारी किया है। कनिष्क गोल्ड के ऊपर विभिन्न बैंकों के करीब 824 करोड़ रुपये का कर्ज है। सीबीआई ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की अगुआई वाले 14 बैंकों के समूह की तरफ से इस कर्ज घोटाले में एफआईआर दर्ज करते हुए बुधवार को ही जांच शुरू कर दी थी।

एक अधिकारी के अनुसार, सीबीआई ने इस मामले में कनिष्क गोल्ड के प्रमोटर निदेशक भूपेश कुमार जैन, निदेशक नीता जैन, तेजराज अच्छा, अजय कुमार जैन, सुमित केडिया समेत कई अज्ञात सरकारी अधिकारियों को आरोपी बनाया है। 


वर्ष 2008 में आईसीसीआईसीआई से कनिष्क गोल्ड के कर्ज का अधिग्रहण करने वाले एसबीआई की तरफ से दी गई शिकायत में इसके बिजनेस मॉडल ही बदल देने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में है कि कंपनी 2014 तक ‘क्रिज्ज’ ब्रांड नेम से वितरकों के जरिए जेवरातों का निर्माण कर बेचती थी, लेकिन 2015 से उसने बी2बी मॉडल अपनाते हुए बड़े रिटेल ज्वैलरों को जेवरात सप्लाई करने शुरू कर दिए थे।

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