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अमेरिका ने जल्दबाजी में समाप्त किया भारत का जीएसपी दर्जा
Tue, 04 Jun 2019 06:13 AM IST
Avdhesh Kumar
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Tue, 04 Jun 2019 06:13 AM IST
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अमेरिका की ओर से भारत से निर्यात प्रोत्साहन सुविधा को वापस लेने का फैसला जल्दबाजी में लिया गया है। इससे घरेलू निर्यातकों पर प्रभाव पड़ेगा। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष विक्रम किर्लोस्कर ने सोमवार को कहा कि भारत का जीएसपी दर्जा (सामान्य तरजीही प्रणाली) समाप्त किए जाने से हमें और विशेषकर छोटे उत्पादों के निर्यातकों को नुकसान होगा। इन लाभों कोे वापस लिए जाने से भारतीय और अमेरिकी कंपनियों दोनों पर प्रभाव पड़ेगा।
किर्लोस्कर ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों इस मुद्दे पर बातचीत कर समाधान निकालेंगे। अमेरिका ने भारतीय निर्यातकों को जीएसपी कार्यक्रम के तहत दिए जाने वाले प्रोत्साहनों को 5 जून, 2019 से वापस लेने की घोषणा की है। जीएसपी कार्यक्रम में वर्ष 1976 में लाया गया था। इसके तहत रसायनों और इंजीनियरिंग जैसे 1,900 भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बिना शुल्क निर्यात करने का अनुमति थी, जो अब समाप्त हो गई है।
अमेरिकी कंपनियों भी होंगी प्रभावित
किर्लोस्कर ने कहा कि जीएसपी दर्जा समाप्त किए जाने से सिर्फ हमारे ऊपर ही असर नहीं होगा बल्कि इससे दोनों पक्ष प्रभावित होंगे। इससे अमेरिकी विनिर्माताओं की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी क्योंकि उनकी लागत कम होगी। जीएसपी कार्यक्रम के तहत अमेरिका का दो-तिहाई आयात होता है। इसमें उत्पादों के विनिर्माण के लिए कच्चे माल और कलपुर्जे शामिल होते हैं। इस कार्यक्रम से अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए कई महंगे सामान पर शुल्क समाप्त हो जाता है। उन्होंने बताया कि 2016 और 2017 में जीएसपी कार्यक्रम के तहत अमेरिकी आयातकों को 73 करोड़ डॉलर की बचत हुई। इससे अमेरिकी कंपनियों ने 89.4 करोड़ डॉलर बचाए।
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किर्लोस्कर ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों इस मुद्दे पर बातचीत कर समाधान निकालेंगे। अमेरिका ने भारतीय निर्यातकों को जीएसपी कार्यक्रम के तहत दिए जाने वाले प्रोत्साहनों को 5 जून, 2019 से वापस लेने की घोषणा की है। जीएसपी कार्यक्रम में वर्ष 1976 में लाया गया था। इसके तहत रसायनों और इंजीनियरिंग जैसे 1,900 भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बिना शुल्क निर्यात करने का अनुमति थी, जो अब समाप्त हो गई है।
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अमेरिकी कंपनियों भी होंगी प्रभावित
किर्लोस्कर ने कहा कि जीएसपी दर्जा समाप्त किए जाने से सिर्फ हमारे ऊपर ही असर नहीं होगा बल्कि इससे दोनों पक्ष प्रभावित होंगे। इससे अमेरिकी विनिर्माताओं की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी क्योंकि उनकी लागत कम होगी। जीएसपी कार्यक्रम के तहत अमेरिका का दो-तिहाई आयात होता है। इसमें उत्पादों के विनिर्माण के लिए कच्चे माल और कलपुर्जे शामिल होते हैं। इस कार्यक्रम से अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए कई महंगे सामान पर शुल्क समाप्त हो जाता है। उन्होंने बताया कि 2016 और 2017 में जीएसपी कार्यक्रम के तहत अमेरिकी आयातकों को 73 करोड़ डॉलर की बचत हुई। इससे अमेरिकी कंपनियों ने 89.4 करोड़ डॉलर बचाए।
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भारत जल्द करेगा पलटवार
इस मुद्दे पर भारतीय व्यापार संवर्द्धन परिषद (टीपीसीआई) का कहना है कि अमेरिका द्वारा जीएसपी दर्जा वापस लेने के फैसले का भारत जवाब देगा। आगामी महीनों में जवाबी शुल्क लगाया जाएगा। टीपीसीआई के चेयरमैन मोहित सिंगला ने कहा कि इस लाभ को वापस लेने से खास असर नहीं पड़ेगा क्योंकि भारतीय निर्यातक इस चुनौती का सामना करने को तैयार हैं। जीएसपी दर्जा खत्म होने से भारत पर करीब 19 करोड़ डॉलर का बोझ बढ़ेगा, जो अमेरिका को होने वाले निर्यात के मुकाबले न्यूनतम है। 2017 में जीएसपी योजना के तहत भारत को सबसे अधिक लाभ हुआ था। इसने अमेरिका को बिना शुल्क 5.7 अरब डॉलर का निर्यात किया था।
निर्यातकों की मदद करे सरकार
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) के अध्यक्ष गणेश कुमार गुप्ता ने कहा कि अमेरिका के इस निर्णय से भारतीय निर्यातकों पर मामूली प्रभाव पड़ेगा। हालांकि, जीएसपी के तहत तीन फीसदी या उससे अधिक लाभ वाले उत्पादों के संबंध में निर्यातकों को इसके नुकसान की भरपाई में मुश्किलें आ सकती हैं। ऐसे में सरकार को आभूषण, चमड़े की वस्तुएं, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, प्लास्टिक, प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों के निर्यातकों की मदद मुहैया करानी चाहिए।
निर्यातकों की मदद करे सरकार
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) के अध्यक्ष गणेश कुमार गुप्ता ने कहा कि अमेरिका के इस निर्णय से भारतीय निर्यातकों पर मामूली प्रभाव पड़ेगा। हालांकि, जीएसपी के तहत तीन फीसदी या उससे अधिक लाभ वाले उत्पादों के संबंध में निर्यातकों को इसके नुकसान की भरपाई में मुश्किलें आ सकती हैं। ऐसे में सरकार को आभूषण, चमड़े की वस्तुएं, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, प्लास्टिक, प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों के निर्यातकों की मदद मुहैया करानी चाहिए।