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भारतीय नियामकों से इस तरह बचना चाहती थी अमेजन, दस्तावेजों में हुआ खुलासा

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 17 Feb 2021 08:18 PM IST
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अमेजन
अमेजन - फोटो : पिक्साबे
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यह बात साल 2019 की शुरुआत की है, अमेजन डॉट कॉम इंक के सीनियर एग्जीक्यूटिव जे कार्नी एक महत्वपूर्ण बैठक के लिए तैयारी कर रहे थे। पूर्व बराक ओबामा के राष्ट्रपति रहते हुए उनके प्रेस सचिव रहे कार्नी को वाशिंगटन में अमेरिका के लिए भारतीय राजदूत के साथ वार्ता करनी थी। भारत सरकार ने हाल ही में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को लेकर नियमों की घोषणा की थी। इन नियमों से दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन के दुनिया की दूसरी सर्वाधिक आबादी वाले देश में व्यापार पर खतरा मंडराने लगा था। 
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बैठक से पहले अमेजन के कर्मचारियों ने कार्नी के लिए एक नोट तैयार किया था। इसमें कार्नी को यह बताया गया था कि भारतीय राजदूत के सामने उन्हें क्या बोलना है और क्या नहीं। नोट में उनसे कहा गया था कि इस बात का उल्लेख करना है कि अमेजन ने भारत में 55 लाख डॉलर से अधिक का निवेश किया है और चार लाख से अधिक भारतीय विक्रेताओं को मंच उपलब्ध कराया है। लेकिन, उन्हें इस बात पर चर्चा न करने को कहा गया था कि वेबसाइट पर बेची जाने वाली कुल वस्तुओं में से करीब एक तिहाई 33 अमेजन विक्रेताओं ने बेची हैं। 


इस नोट में इस जानकारी को संवेदनशील और नहीं साझा करने योग्य बताया गया था। उल्लेखनीय है कि कंपनी के अन्य दस्तावेजों में भी ऐसी ही संवेदनशील जानकारी सामने आई है। इसके अनुसार अमेजन की भारतीय वेबसाइट पर दो और विक्रेता 2019 की शुरुआत में कंपनी की कुल बिक्री में से 35 फीसदी के हिस्सेदार थे। इन विक्रेताओं में अमेजन की सीधी इक्विटी हिस्सेदारी है। इसका मतलब है कि अमेजन के भारत में चार लाख विक्रेताओं में से  करीब 35 विक्रेताओं की इसकी ऑनलाइन बिक्री में करीब दो तिहाई हिस्सेदारी रही।

यह पूरी जानकारी राजनीतिक रूप से काफी अहम थी। यदि यह जानकारी सामने आ जाती तो उन छोटे भारतीय विक्रेताओं को राहत मिल सकती थी, जो आरोप लगाते रहे हैं कि अमेजन नियमों का उल्लंघन कर कुछ बड़े विक्रेताओं को फायदा पहुंचा रही है और उनके व्यापार को नुकसान पहुंचा रही है। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी खफा हो सकते थे, जिनके राजनीतिक आधार में इन लाखों छोटे विक्रेताओं की अहम भूमिका है। इसके साथ ही अमेजन की वह बात भी गलत साबित हो जाती कि कंपनी भारत में छोटे व्यापारियों की मित्र है।

बैठक में कार्नी और भारतीय राजदूत के बीच क्या बात हुई थी, इसकी जानकारी सामने नहीं आ पाई है। अप्रैल 2019 में दोनों के बीच एक बैठक हुई थी, लेकिन दोनों ही पक्षों ने इसे लेकर किसी तरह की कोई टिप्पणी नहीं की थी। अमेजन दावा करती है कि वह एक पारदर्शी ऑनलाइन बाजार चलाती है और सभी विक्रेताओं के साथ समान व्यवहार करती है। हालांकि, अमेजन के आंतरिक दस्तावेजों पर उसके दावे सही नहीं उतरते हैं। दस्तावेजों में यह भी पता चला है कि कंपनी ने कुछ सबसे बड़े विक्रेताओं की सूची पर नियंत्रण का प्रयोग किया है।

उल्लेखनीय है कि जनवरी 2020 में भारतीय प्रतियोगिता आयोग (कॉम्पिटीशन कमीशन ऑफ इंडिया या सीसीआई) ने कहा था कि वह अमेजन और वालमार्ट इंक की ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट की जांच कर रहा है। यह जांच एक भारतीय व्यापारी समूह की शिकायत पर शुरू की गई थी। आयोग ने चार कथित प्रतियोगिता विरोधी कार्रवाइयों की बात कही थी। इसमें कंपनियों द्वारा मोबाइल फोन की विशेष लॉन्चिंग, अपनी वेबसाइट पर पसंदीदा विक्रेताओं को बढ़ावा देना, अधिक छूट और कुछ विक्रेताओं को प्रमुखता देना शामिल था।
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