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फ्लिपकार्ट में 85 फीसदी हिस्सेदारी लेने की तैयारी में वॉलमार्ट, कर सकता है 3 अरब डॉलर का निवेश
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 13 May 2018 05:58 PM IST
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ई-कॉमर्स जगत के सबसे बड़े सौदे के बाद अब वॉलमार्ट ने एक और फैसला लिया है। देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी में 77 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के बाद अब वॉलमार्ट 3 अरब डॉलर का निवेश कर फ्लिपकार्ट की 85 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी में है। इस बात की जानकारी दुनिया के सबसे बड़े रिटेलर ने शुक्रवार को अमेरिकी सिक्यॉरिटीज और एक्सचेंज कमीशन को दी। रिटेलर ने ये भी बताया कि वॉलमार्ट के बाकी शेयर भी उसी कीमत पर खरीदे जाएंगे जिस कीमत पर 77 फीसदी शेयर खरीदे गए थे।
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वॉलमार्ट ने अभी इस बारे में कुछ नहीं बताया कि उसने किस दर पर ये शेयर खरीदे थे। वहीं इसके विभिन्न हिस्सों को विभिन्न दामों पर खरीदा गया था। इसके अलावा वॉलमार्ट की फाईलिंग इसलिए भी जरूरी है क्योंकि फ्लिपकार्ट के बड़े निवेशक जापानी इंटरनेट, टेलीकॉम कंपनी, सॉफ्ट बैंक ने शेयरों को बेचने पर कोई फैसला नहीं लिया है। बता दें सॉफ्ट बैंक के पास फ्लिपकार्ट के करीब 22 फीसदी शेयर हैं। इससे पहले मीडिया रिपोर्टस से भी ये बात सामने आई थी कि वॉलमार्ट और सॉफ्ट बैंक पहले की कीमत पर ही शेयर ट्रांजेक्शन के लिए वक्त निकाल कर बातचीत करने की तैयारी कर रहे थे।
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एसईसी फाइलिंग के मुताबिक वॉलमार्ट 2 अरब डॉलर का कैश निवेश कर फ्लिपकार्ट के मौजूदा शेयर धारकों से 14 अरब डॉलर के शेयर खरीद सकता है। वहीं फ्लिपकार्ट का कहना है कि वह बोर्ड और फाउंडर की सलाह से फ्लिपकार्ट ग्रुप ऑफ कंपनीज के सीईओ और प्रिंसिपल एग्जिक्यूटिव को नियुक्त कर सकता है या बदल भी सकता है। जानकारी के लिए बता दें इस समय फ्लिपकार्ट के सीईओ कल्यआण कृष्णमूर्ति हैं और कंपनी के को-फाउंडर और ग्रुप सीईओ बिन्नी बंसल हैं। बिन्नी से पहले इस पद पर सचिन बंसल थे।
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बता दें भारतीय बाजार में वॉलमार्ट का मुकाबला अन्य प्रमुख कंपनी अमेजॉन से होगा। इससे पहले शुक्रवार को भी वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट सौदे पर नीति आयोग और स्वदेशी जागरण मंच भी आपस में भिड़ गए थे। मंच के पदाधिकारी की ओर से सोशल मीडिया पर किए गए हमले का जवाब खुद आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने दिया था। उन्होंने इसमें कहा कि मंच ने हमेशा मल्टी ब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का विरोध किया है।
जहां एक तरफ मंच के सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा था कि सरकार ई-कॉमर्स कंपनी के इतने बड़े सौदे पर चुप है। उन्होंने कहा कि इस सौदे पर वॉलमार्ट के सीईओ से प्रधानमंत्री और वाणिज्य मंत्री ने बात भी नहीं की। वहीं आयोग ने इस पर सहमति जताई और कुमार ने कहा कि इस सौदे का भारत के विदेशी निवेश पर अच्छा असर पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि 16 अरब डॉलर का यह सौदा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मानदंडों के मुताबिक ही हुआ है। जबकि मंच ने कहा था कि आयोग के उपाध्यक्ष को छोटे और मझोले व्यापारियों का कोई ख्याल नहीं है और जब इस सौदे पर पूरी सरकार चुप है फिर भी उनका वॉलमार्ट के प्रति प्रेम साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।