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भारत ने दी मंदी को मात, विकास दर में 0.4 फीसदी बढ़त
Sat, 27 Feb 2021 02:28 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 27 Feb 2021 02:28 AM IST
सार
- 23.9 फीसदी गिरावट रही थी पहली तिमाही में
- 7.3 फीसदी घटी थी दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था
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भारतीय अर्थव्यवस्था
- फोटो : social media
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विस्तार
कोरोना महामारी के दबाव में लगातार दो तिमाही तक बड़ी गिरावट झेलने के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था ने आखिरकार मंदी को मात दे दी। दिसंबर तिमाही में जीडीपी ने गिरावट से उबरकर 0.40 फीसदी की विकास दर हासिल कर ली। सरकार ने शुक्रवार को बताया कि अर्थव्यवस्था अब तकनीकी रूप से मंदी से बाहर निकल चुकी है।
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राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की शुरुआती दो तिमाहियों में विकास दर शून्य से काफी नीचे चली गई थी। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था भी तकनीकी रूप से मंदी की चपेट में आ गई थी।
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हालांकि, v आकार में तेज सुधारों के बूते अर्थव्यवस्था ने तीसरी तिमाही में ही मंदी को पीछे छोड़ दिया। अप्रैल-जून तिमाही में जहां विकास दर शून्य से 23.9 फीसदी नीचे चली गई थी, वहीं जुलाई-सितंबर की दूसरी तिमाही में भी 7.3 फीसदी की बड़ी गिरावट का सामना करना पड़ा था।
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अक्तूबर के बाद से ही औद्योगिक गतिविधियों में तेजी और घरेलू उत्पादन व खपत बढ़ने से तीसरी तिमाही में विकास दर 0.40 फीसदी पर आ गई। एनएसओ ने बताया कि 2019-20 की तीसरी तिमाही में 3.3 फीसदी विकास दर रही थी।
घरेलू उत्पादन में 14 हजार करोड़ का इजाफा
सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) को मूल्य के आधार पर देखा जाए तो 2020-21 की तीसरी तिमाही में इसका आकार 36.22 लाख करोड़ पहुंच गया, जो 2019-20 की समान तिमाही में 36.08 लाख करोड़ था। इस तरह घरेलू उत्पादन में 14 हजार करोड़ का इजाफा हुआ है, जो 0.40 फीसदी ज्यादा है।
चिंता अब भी बरकरार
एनएसओ ने पूरे वित्तवर्ष के दौरान जीडीपी में आने वाली गिरावट के अनुमान को बढ़ा दिया है। सरकार ने जनवरी में 7.7 फीसदी गिरावट का अनुमान लगाया था, जिसे बढ़ाकर 8 फीसदी कर दिया गया है।
इसका मतलब है कि 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 8 फीसदी घट जाएगा। 2019-20 में भारत की विकास दर 4 फीसदी रही थी। अक्तूबर-दिसंबर तिमाही में चीन की विकास दर 6.5 फीसदी रही, जो पहली तिमाही की 4.9 फीसदी से काफी ज्यादा है।